Maharashtra Assembly Election, महाराष्ट्र चुनाव: बीजेपी के सामने विपक्ष की भूमिका निभाएगा कौन, शिवसेना या NCP?
Maharashtra Assembly Election, महाराष्ट्र चुनाव: बीजेपी के सामने विपक्ष की भूमिका निभाएगा कौन, शिवसेना या NCP?

महाराष्ट्र चुनाव: बीजेपी के सामने विपक्ष की भूमिका निभाएगा कौन, शिवसेना या NCP?

महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं और परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे.
Maharashtra Assembly Election, महाराष्ट्र चुनाव: बीजेपी के सामने विपक्ष की भूमिका निभाएगा कौन, शिवसेना या NCP?

Maharashtra Assembly Election 2019: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. साथ ही भतीजे अजीत पवार और अन्य के ख़िलाफ़ भी केस दर्ज किया गया है.

शरद पवार ने केस दर्ज़ किए जाने को लेकर कहा है कि ‘केस दर्ज़ कर लिया गया है. अगर मैं जेल भी जाता हूं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं. मैं इससे पहले कभी भी जेल नहीं गया हूं इसलिए अगर ऐसा कुछ हुआ तो मुझे ख़ुशी होगी. अगर कोई मुझे जेल भेजने की तैयारी कर रहा है तो उनका स्वागत है.’

ज़ाहिर है महाराष्ट्र में चुनाव की घोषणा हो चुकी है. 21 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 24 अक्टूबर को मतगणना. ऐसे में शरद पवार के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए जाने की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

एनसीपी प्रमुख शरद पवार पहले भी कह चुके हैं कि सत्तापक्ष की तरफ से विपक्षी नेताओं को एजेंसियों का डर दिखाया जा रहा है.

शरद पवार महाराष्ट्र में निभाएंगे विपक्ष की भूमिका?

तो क्या यह माना जाए कि महाराष्ट्र चुनाव इस बार शरद पवार बनाम सत्तापक्ष बन गया है. हाल के दिनों में देखा जाए तो विपक्षी दलों कांग्रेस और एनसीपी के कई कद्दावर नेता बीजेपी और शिवसेना ज्वाइन कर रहे हैं.

एनसीपी को छोड़ने वालों में शरद पवार के रिश्तेदार भी हैं. हाल ही में शरद पवार के रिश्तेदार पद्मसिंह पाटिल और उनके बेटे राणा जगजीत सिंह के बीजेपी ज्वाइन करने की ख़बर आई थी.

वहीं विधायक संदीप नाइक और वैभव पिचाड हाल में बीजेपी में शामिल हुए जो एनसीपी के वरिष्ठ नेता क्रमश: गणेश नाइक और मधुकर पिचाड के बेटे हैं.

महाराष्ट्र में कांग्रेस कमज़ोर

कांग्रेस के भी कई कद्दावर नेता सत्तापक्ष का रुख कर चुके हैं. हालांकि कांग्रेस की समस्या कुछ और है. पार्टी के अंदर की राजनीति कांग्रेस को महाराष्ट्र में पूरी तरह कमज़ोर कर चुकी है. पिछले महीने तक मुंबई कांग्रेस का कोई अध्यक्ष तक नहीं था.

लोकसभा चुनाव के बाद ना तो राहुल गांधी, ना सोनिया गांधी ने महाराष्ट्र की तरफ ध्यान दिया है. बिखरी हुई कांग्रेस महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है.

कमज़ोर विपक्ष को देखते हुए अब सवाल यह उठ रहा है कि महाराष्ट्र में पांच महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे फिर दोहराए जाएंगे? क्योंकि विपक्ष की भूमिका निभाएगा कौन? क्या शिवसेना विपक्ष की भूमिका निभा सकती है?

शिवसेना निभाएगी विपक्ष की भूमिका?

शिवसेना और बीजेपी के बीच सीट बंटवारे को लेकर बात बनती नहीं दिख रही है. बीजेपी इस बार महाराष्ट्र में बड़े भाई की भूमिका में रहना चाहती है. वहीं शिवसेना 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में आधे का हिस्सेदार बनना चाहती है. यानी शिवसेना बाकी सहयोगी दलों की 18 सीटें छोड़कर 135-135 सीटें पर बंटवारा चाहती है.

पिछले हफ्ते ‘मुंबई मेट्रो’ नाम से आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर बैठे उद्धव ठाकरे को ‘छोटा भाई’ कहा था. तो क्या यह माना जाए कि मोदी ने सांकेतिक तौर पर महाराष्ट्र की नई राजनीति समझाने का प्रयास किया था.

एक सूत्र यह भी बताते हैं कि शिवसेना अलग चुनाव लड़ने पर भी विचार कर रही है. ज़ाहिर है पिछले विधानसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां अलग-अलग मैदान में थी. बीजेपी में भी एक धरा है जो चाहता है कि इस बार भी चुनाव अलग-अलग ही लड़े जाएं.

बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे के ऐसे सूत्र पर समझौता चाहती है, जिसपर बीजेपी के पास 122 सीटें बनी रहें और शिवसेना पर उसके हिस्से की 63 सीटें रहें. और शेष सीटों में से कुछ सीटें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) जैसे गठबंधन के छोटे दलों को देने के बाद आपस में बराबर बांट ली जाएं.

अलग चुनाव लड़ने का मूड बना रही है शिवसेना?

चुनावी प्रचार मोड को देखकर भी लगता है कि शिवसेना अलग चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने अगस्त के महीने में ‘महाजनादेश यात्रा’ शुरू की थी. लेकिन उस यात्रा के ऐलान होते ही शिवसेना नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने ‘जनआशीर्वाद’ यात्रा की शुरुआत कर दी.

शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए आदित्य का नाम लेना भी शुरु हो गया. माना जा रहा है कि आदित्य मुंबई की किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. बता दें कि अब तक ठाकरे परिवार से कोई भी सदस्य चुनाव नही लड़ा है.

2014 Maharashtra Assembly Election में क्या हुआ था?

पिछले विधानसभा चुनाव की ही बात करें तो 2014 की लहर पर सवार बीजेपी ने महाराष्ट्र चुनाव में 122 सीटें हासिल की थी. लेकिन उसे बहुमत साबित करने के लिए 23 और सीटों की ज़रूरत थी. शिव सेना, चुनाव से पहले ही बीजेपी से गठबंधन तोड़ चुकी थी. इसलिए वो किसी क़ीमत पर सरकार बनाने के लिए बीजेपी को समर्थन देने के लिए तैयार नहीं थी.

बाद में शरद पवार ने बीजेपी को बाहर से समर्थन देने का प्रस्ताव दिया. उनकी पार्टी एनसीपी के पास कुल 41 विधायक थे. शरद पवार ने कहा था, “एक स्थायी सरकार के निर्माण के लिए और महाराष्ट्र के भले के लिए, हमारे पास सिर्फ़ एक ही विकल्प बचता है कि हम बीजेपी को समर्थन दें ताकि वो सरकार बना सकें.”

एनसीपी के समर्थन ने बीजेपी के लिए राज्य में सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त तो किया ही साथ ही शिवसेना को राजनीति में अपना स्थान तय करने पर भी मजबूर किया. नतीजा यह हुआ कि चुनाव के तीन महीनों बाद ही शिवसेना ने सरकार के साथ जाने का फ़ैसला कर लिया. उनके कुल 63 विधायक चुन कर आए थे. यह दूसरा मौक़ा था जब महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी की सरकार बनी. इससे पहले सिर्फ 1995 में शिवसेना-बीजेपी की सरकार महाराष्ट्र मे बनी थी जो राज्य की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी.

बता दें कि महाराष्ट्र में 1999 से 2014 तक यानी 15 साल, कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार रही. लेकिन 2014 मे कांग्रेस 42 और एनसीपी 41 सीटों पर सिमट गई.

पिछले पांच सालों में ही देखा जाए तो शिवसेना सहयोगी होने के बावजूद बीजेपी पर हमलावर रही है. नोटबंदी, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन या मुंबई के ग्रीन जोन आरे कॉलोनी में मेट्रो कारशेड निर्माण. सभी मामलों में शिवसेना बीजेपी के विरोध में रही है.

Maharashtra Assembly Election, महाराष्ट्र चुनाव: बीजेपी के सामने विपक्ष की भूमिका निभाएगा कौन, शिवसेना या NCP?
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