आदित्य ठाकरे वर्ली से लड़ेंगे चुनाव, भरा पर्चा; समझिए महाराष्ट्र में शिवसेना की पॉलिटिक्स

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा क़द होते हुए भी अब तक परिवार का कोई सदस्य सत्ता के लिए नहीं लड़ा.
Shiv Sena chief Uddhav Thackerays son Aditya, आदित्य ठाकरे वर्ली से लड़ेंगे चुनाव, भरा पर्चा; समझिए महाराष्ट्र में शिवसेना की पॉलिटिक्स

महाराष्ट्र में लगता है इस बार मुक़ाबला बीजेपी और शिवसेना के बीच ही है. मुंबई के वर्ली इलाक़े में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने गुरुवार को अपना नामांकन दाख़िल किया. नामांकन दाख़िल करने से पहले वह समर्थकों की भारी भीड़ के साथ वर्ली की सड़को पर रोड शो करते नज़र आए. तो क्या यह शिवसेना का शक्ति प्रदर्शन था?

मुबंई की सड़कों की बात करें तो  वो पोस्टर्स से पटी पड़ी हैं. हर तरफ दीवारों पर आदित्य ठाकरे की बड़ी-बड़ी पोस्टर्स दिखाई दे रही है.

इन पोस्टर्स पर नमस्ते वर्ली, सलाम वर्ली, हैलो वर्ली लिखे हैं और लगभग 7 से 8 भाषाओ में ऐसे पोस्टर्स लगाए गए हैं.

सवाल यह उठता है कि शिवसेना आदित्य ठाकरे के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर क्यों लगा रही है? क्या यह ज़ोर सिर्फ आदित्य ठाकरे की वजह से है क्योंकि वह पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं? या फिर यह संकेत है कि शिवसेना इस बार पूरे दमखम से चुनाव लड़ने वाली है. क्योंकि मामला अब कुर्सी का है. जिसकी जितनी ज़्यादा सीट, वो कुर्सी के उतने ही क़रीब.

राजानीतिक जानकार मानते हैं कि इन पोस्टर्स के ज़रिए आदित्य ठाकरे मराठी वोटरों के अलावा अन्य भाषाओं के वोटरों को लुभाने की फ़िराक़ में हैं.

नामांकन भरने से पहले लोगों से बात करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा, ‘आज मेरे लिए बड़ा दिन है. नामांकन भरने जा रहा हूं. आप सबका साथ है. बड़ो से आशीर्वाद लिया. बालासाहेब जी के साथ साथ माता पिता का आशीर्वाद लिया. मेरे कई रिश्तेदार घर पर आए हैं उनका भी आशीर्वाद लिया.’

यह पहली बार होगा जब ठाकरे परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ेगा. इससे पहले बालासाहेब ठाकरे ने जब राजनीति में पदार्पण किया था तो उनका एकमात्र उद्देश्य था बिना चुनाव लड़े राजनीतिक क़द बनाए रखना.

उत्तर भारतीयों की बढ़ती जनसंख्या के बीच मराठी मानुष के मुद्दे को बनाए रखने के लिए बालासाहेब ठाकरे ने कार्टूनिस्ट की जॉब छोड़ी. महाराष्ट्र की राजनीति में बालासाहेब ठाकरे का क़द इतना बड़ा था कि अन्य पार्टियां उनकी मर्ज़ी के बिना फ़ैसला लेने से डरती थी.

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार का सीधे-सीधे हस्तक्षेप होने के बावजूद अब तक परिवार का कोई सदस्य सत्ता के लिए नहीं लड़ा. यहां तक कि मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) प्रमुख राज ठाकरे भी चुनाव की राजनीति से दूर रहे हैं.

यह पहला मौक़ा है जब ठकारे परिवार सीधे-सीधे राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर दावा करने जा रहा है.

राजनीतिक उत्तराधिकारी इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि माना जा रहा है कि शिवसेना को अगर ज़्यादा सीटें मिलती है तो वो मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी करेगी. संभव यह भी है कि राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए शिवसेना कम से कम डिप्टी सीएम तो मांगेगी ही.

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी और शिवसेना के बीच ज़्यादा सीटों की लड़ाई इसी वजह से चल रही थी. क्योंकि सीटें ज़्यादा तो ज़्यादा उम्मीदवारों के जीतने की उम्मीद और विधायक ज़्यादा तो फिर सत्ता अपनी.

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