अयोध्या मामला: सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र साइबर सेल की निगरानी, ऐसे कंटेंट पर रहेगी पैनी नजर

महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर, फेसबुक, मैसेजिंग एप, यूट्यूब, वीडियो शेयरिंग एप पर खास नजर रखेगी.

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले महाराष्ट्र सायबर पुलिस ने सोशल मीडिया को कंट्रोल करने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं. महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और इस तरह के अन्य प्लेटफॉर्म पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखेगी. महाराष्ट्र साइबर सेल खुफिया जानकारी पर भी नजर रखेगी और संबंधित राज्य पुलिस को सूचित करेगी.

सख्त कार्रवाई की जाएगी

महाराष्ट्र साइबर पुलिस विशेष महानिरीक्षक बृजेश सिंह ने एक मीडिया एजेंसी को बताया कि “हमारी टीम में महाराष्ट्र साइबर सेल के 10 अधिकारी शामिल हैं. हम सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की निगरानी करेंगे. हमारी टीम अफवाहें फैलाने वालों, आपत्तिजनक पोस्ट, नफरत भरे भाषण या कंटेंट वालों पर नजर रखेगी और यदि कोई ऐसा करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

तकनीकी विशेषज्ञों का पैनल

साइबर सेल की टीम घृणा पैदा करने या दो धर्मों या समूहों के बीच तनाव पैदा करने वाले कंटेंट पर भी नजर रखेगी. साइबर पुलिस टीम कफ परेड के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में रखे एक सोशल मीडिया लैब से काम करेगी. जिसमें जरूरी कंप्यूटर नेटवर्क, सॉफ्टवेयर और तकनीकी विशेषज्ञों का एक पैनल होगा जो सोशल मीडिया की निगरानी में उनकी मदद करेगा.

कीवर्ड से खोजेंगे भड़काऊ पोस्ट

टीम के एक सदस्य ने बताया “हमें कुछ ऐसे कीवर्ड दिए गए हैं जिनका उपयोग कर हम सोशल मीडिया पर गलत पोस्ट करने वालों की पहचान करने के लिए करेंगे. कुछ शब्द हमें भड़काऊ पोस्ट खोजने में भी मदद करेंगे. इसके अलावा, हम पहले से ही एक निश्चित संख्या में व्यक्तियों और ट्रोलों की पहचान कर चुके हैं, जो इस तरह की गतिविधियों में रहे हैं. उन पर भी नजर बनी हुई है. ”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ये भी शामिल

महाराष्ट्र साइबर सेल के अधीक्षक डॉ बालसिंह राजपूत ने कहा, “हम खास उपकरणों का उपयोग करेंगे जो सांप्रदायिक पोस्टों को चिह्नित करेंगे. जिनमें नफरत फैलाने वाले भाषण, फेक न्यूज, आदि शामिल हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर, फेसबुक, मैसेजिंग एप, यूट्यूब, वीडियो शेयरिंग पर खास नजर रखेगी.

बता दें कि महाराष्ट्र साइबर सेल की टीम ने विधान सभा चुनावों के दौरान, 400 से अधिक आपत्तिजनक पोस्टों को चिह्नित किया था और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के संबंधित अधिकारियों को इस मामले की रिपोर्ट करके उन्हें हटा दिया था.

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