दो पवार, दो धोखे और महाराष्‍ट्र में तीन दिन में दो ‘सरकार’

मंगलवार को अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के इस्‍तीफे की खबर सामने आते ही शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई. सबसे पहले बयान आया शिवसेना नेता संजय राउत का, जिन्‍होंने बिना देरी किए ऐलान कर दिया कि उद्धव ठाकरे अब अगले पांच साल के लिए महाराष्‍ट्र के सीएम होंगे.

मुंबई: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में भले ही बीजेपी और शिवसेना को बहुमत मिला, लेकिन नतीजे आने के बाद सीएम पद पर दोनों दलों के बीच ऐसी रार मची कि महाराष्‍ट्र की सियासत में हलचल मच गई. पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच अलगाव हुआ, इसके बाद कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना साथ आए.

23 नवंबर 2019 को उस वक्‍त टर्निंग पॉइंट आ गया, जब अजित पवार ने बीजेपी को समर्थन दे दिया और रातों-रात राष्‍ट्रपति शासन हटाकर शनिवार सुबह देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद की शपथ ले ली. शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने डिप्‍टी सीएम पद की शपथ ली. इधर बीजेपी की सरकार बनी और उधर शिवसेना सुप्रीम कोर्ट चली गई. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्‍ट का आदेश दिया और उसके बाद घटनाक्रम 360 डिग्री घूम गया.

मंगलवार को फ्लोर टेस्‍ट का आदेश आने के कुछ समय बाद ही अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस को इस्‍तीफा सौंप दिया. कुछ देर बाद देवेंद्र फडणवीस ने भी इस्‍तीफे का ऐलान कर दिया. प्रेस कॉन्‍फ्रेंस से उठकर देवेंद्र फडणवीस सीधे राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी के पास गए और इस्‍तीफा सौंप दिया. इस तरह तीन दिन के अंदर सीएम से देवेंद्र फडणवीस को इस्‍तीफा देना पड़ गया.

अजित पवार ने दिए दो धोखे

शरद पवार के भतीजे और एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार ने रातोंरात बीजेपी को समर्थन देने का फैसला कर लिया. एक दिन पहले तक अजित पवार कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना के बीच गठबंधन सरकार बनाने की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन अचानक उन्‍होंने चाचा शरद पवार को झटका देते हुए बीजेपी को समर्थन दे दिया, लेकिन शरद पवार ने हार नहीं मानी.

उन्‍होंने सबसे पहले अजित पवार की जगह जयंत पाटिल को विधायक दल का नेता बनाया, इसके बाद अजित पवार पर पारिवारिक दबाव बनाया और उनसे वापस लौटने की भावुक अपील की. शरद पवार की लगातार कोशिशों के बाद भी जब अजित पवार नहीं पिघले उन्‍होंने पत्‍नी प्रतिभा पवार से कहा कि वह अजित पवार को समझाएं. शरद पवार की यह ट्रिक काम कर गई और अजित पवार ने इस्‍तीफा देकर दूसरा धोखा बीजेपी को दे दिया.

कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी ने विधायकों पर बनाए रखी पकड़

शरद पवार, उद्धव ठाकरे और सोनिया गांधी ने लगातार अपनी-अपनी पार्टी के विधायकों से न केवल संपर्क बनाए रखा बल्कि तीनों दलों ने एकजुट होकर लगातार संदेश दिया कि तोड़फोड़ आसान नहीं है. तीनों दलों ने अपने-अपने विधायकों पर लगातार पहरा भी लगाया, यहां तक मोबाइल फोन पर अंकुश लगा दिया.

शिवसेना की मदद से विधायकों को वापस लाने में सफल रहे शरद पवार

अजित पवार के साथ जो विधायक गए थे, उनमें से कुछ शरद पवार की भावुक अपील पर लौट आए और बाकी बचे विधायकों को शिवसैनिकों ने खोजकर निकाला और उन्‍हें वापस मुंबई लाया गया. राज्‍यपाल, मीडिया और देवेंद्र फडणवीस को अपनी ताकत दिखाने के लिए कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना ने 162 विधायकों की परेड कराई. सभी विधायकों को शपथ दिलाई गई. विधायकों की इस परेड के अगले ही दिन अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस ने इस्‍तीफा दे दिया.

मंगलवार को अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के इस्‍तीफे की खबर सामने आते ही शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई. सबसे पहले बयान आया शिवसेना नेता संजय राउत का, जिन्‍होंने बिना देरी किए ऐलान कर दिया कि उद्धव ठाकरे अब अगले पांच साल के लिए महाराष्‍ट्र के सीएम होंगे. राउत ने दावा किया कि अजित दादा अब उनके साथ हैं. संजय राउत ने ढाई-ढाई साल के सीएम वाले फॉर्मूले की बात को सिरे से खारिज करते हुए स्‍पष्‍ट कर दिया कि उद्धव ठाकरे ही पूरे पांच साल सीएम होंगे.