महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन लागू, पढ़ें दिन भर चली सियासी हलचल का पूरा अपडेट

एनसीपी तय समय में बहुमत साबित नहीं कर सकी, शिवसेना भी ऐसा नहीं कर सकी, लेकिन शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस के बीच बातचीत काफी तेज हो गई है. राष्‍ट्रपति शासन लग चुका है, ऐसे में अब तीनों दल साथ आने का फॉर्मूला तलाशने में लगे हैं.

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन लगा दिया गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कैबिनेट की सिफारिश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. पंजाब के दौरे पर गए राष्ट्रपति जैसे ही दिल्ली लौटे उन्होंने गृह मंत्रालय की ओर से भेजी गई राष्‍ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश पर मुहर लगा दी. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे 24 अक्‍टूबर को आए थे, लेकिन अब तक कोई भी दल समर्थन नहीं जुटा सका, जिसके बाद राज्‍यपाल ने राष्‍ट्रपति शासन की संस्‍तुति भेजी दी, जिसे मंजूर कर लिया गया.

मंगलवार को महाराष्‍ट्र में दिनभर सियासी सरगर्मियां बनी रहीं. सबसे पहले हलचल मची एनसीपी की ओर से राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी को भेजे गए पत्र की वजह से. एनसीपी को राज्‍यपाल ने सोमवार को सरकार बनाने का न्‍योता भेजा था. शरद पवार की पार्टी को भी राज्‍यपाल ने शिवसेना की तरह 24 घंटे का वक्‍त दिया था. मतलब मंगलवार रात साढ़े आठ बजे की मोहलत एनसीपी के पास थी, लेकिन एनसीपी ने पत्र लिखकर राज्‍यपाल से कहा कि उन्‍हें और समय चाहिए और इस वक्‍त उनके पास बहुमत नहीं है.

सबसे पहले बीजेपी ने सरकार बनाने से इनकार किया, इसक बाद शिवसेना को 24 घंटे का वक्‍त मिला, लेकिन उसने असमर्थता जताते हुए 48 घंटे का समय मांगा, जो राज्‍यपाल ने देने से इनकार कर दिया. इसके बाद एनसीपी ने भी बहुमत न होने की बात कही और राज्‍यपाल से ज्‍यादा मांगा, मगर राज्‍यपाल ने एनसीपी को भी अतिरिक्‍त समय नहीं दिया और राष्‍ट्रपति शासन लगाने की संस्‍तुति कर दी. राज्‍यपाल की संस्‍तुति के बाद केंद्रीय कैबिनेट ने राष्‍ट्रपति शासन को हरी झंडी दिखाई और राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी फैसले पर मुहर लगा दी.

इससे पहले एनसीपी नेता नवाब मलिक ने पार्टी विधायकों की बैठक के बाद दी जानकारी दी थी कि मंगलवार को हुई विधायक दल की बैठक में पार्टी के सभी 54 विधायक मौजूद रहे. इसमें यह प्रस्ताव पारित किया गया कि इस बारे में फैसला लेने का अधिकार शरद पवार को दिया गया, जिन्होंने एक समिति बनाकर इस पर फैसला करने की बात कही है.

यह बात सही है कि एनसीपी तय समय में बहुमत साबित नहीं कर सकती, शिवसेना भी ऐसा नहीं कर सकी, लेकिन शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस के बीच बातचीत काफी तेज हो गई है. राष्‍ट्रपति शासन लग चुका है, ऐसे में अब तीनों दल साथ आने का फॉर्मूला तलाशने में लगे हैं, जिससे कि वे राज्‍यपाल के पास जाकर बहुमत के लिए जरूरी विधायकों के समर्थन का पत्र लेकर राज्‍यपाल से मिलें और उसके बाद अगर राज्‍यपाल को ठीक लगा तो वे राष्‍ट्रपति शासन हटाकर राज्‍य में सरकार बनाने का रास्‍ता साफ कर सकते हैं.