अयोध्या कारसेवा में शामिल रहे शिव सैनिकों ने कहा- BJP से ज्यादा हिंदुत्व प्रेम, राम मंदिर बनने की खुशी

ठाकरे (Uddhav Thackeray) की तरफ से सुझाव तक दिया गया कि कोरोनोवायरस (Coronavirus) के प्रसार को रोकने के लिए ई-भूमि पूजन (E-Bhoomi Pujan) होना चाहिए. भूमि पूजन के लिए कई शिवसेना कार्यकर्ता अयोध्या में मौजूद हैं.
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राम जन्मभूमि आंदोलन ने न केवल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सत्ता तक पहुंचने में मदद की, बल्कि शिवसेना (Shiv Sena) के लिए भी यह आंदोलन काफी महत्वपूर्ण रहा, जिसने बढ़-चढ़कर राम मंदिर (Ayodhya Ram Temple) बनाने की मांग की. 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस (Babri Masjid Demolition) के बाद 1993 में सीबीआई (CBI) द्वारा पहली चार्जशीट फाइल की गई थी. इस चार्जशीट में 48 लोगों का नाम था, जिसमें से 8 लोग शिवसेना से जुड़े हुए थे. इनमें शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे भी थे.

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भूमि पूजन में आमंत्रित नहीं किए जाने से निराश शिवसेना

अब दो दशक से भी ज्यादा समय के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है. अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए बीजेपी ने एकमात्र स्वामित्व ले लिया है और शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, जो दो गैर-हिंदुत्व दलों के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में हैं, को भूमि पूजन समारोह में आमंत्रित तक नहीं किया है. पांच अगस्त को राम मंदिर के भूमि पूजन में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़कर कोई भी अन्य सीएम शामिल नहीं होगा.

चूंकि उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना, कांग्रेस और नेशनल कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ महाविकास अघाड़ी गठबंधन के साथ महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज है, इसलिए वे सार्वजनिक तौर पर इसका विरोध नहीं कर सकते. हो सकता है कि यही वजह हो, जिसके कारण शिवसेना प्रमुख को भूमि पूजन के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है. अगर शिवसेना को आमंत्रित किया गया तो महाविकास अघाड़ी गठबंधन के लिए यह अधिक जटिल हो सकता है.

हिदुत्व को लेकर शिवसेना का आज भी यही स्टैंड

ठाकरे की तरफ से सुझाव तक दिया गया कि कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के लिए ई-भूमि पूजन होना चाहिए. भूमि पूजन के लिए कई शिवसेना कार्यकर्ता अयोध्या में मौजूद हैं. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, औरंगाबाद से चार बार सांसद रह चुके और शिवसेना के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन के बावजूद हिंदुत्व को लेकर शिवसेना का स्टैंड आज भी नहीं बदला है, इसलिए पार्टी को भूमि पूजन में पार्टी को आमंत्रित किया जाना चाहिए.

चंद्रकांत ने दावा किया कि जब बाबरी मस्जिद का गुंबद गिराया तो वो वहीं अयोध्या में मौजूद थे और उन्होंने याद किया कि उन्होंने तब उसी दौरान स्थापित की गई राम की प्रतिमा को छुआ था. चंद्रकांत ने कहा कि यह उनकी जिंदगी का सबसे खुशी का लम्हा था. उन्होंने कहा कि भूमि पूजन की खबर सुनने के बाद कई लोगों ने मुझसे पूछा कि क्या मैं जा रहू हूं. आयोजन के लिए भारी सुरक्षा है और पीएम भी आ रहे हैं. ऐसी खबरें थीं कि यह कार्यक्रम आतंकवादियों के रडार पर है, इसलिए किसी भी कानून व्यवस्था के मुद्दे से बचने के लिए वहां जाना बेहतर नहीं है.

बीजेपी की तुलना में शिवसेना ज्यादा हिंदुत्ववादी

रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना नेता सुर्यकांत महादिक ने बताया कि जब विध्वंस के दौरान वो कार सेवा का हिस्सा थे. सूर्यकांत ने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि गुंबद गिराने के बाद नेता वहां इकट्ठे हो गए और भाषण देने लगे थे. मैंने भी भाषण दिया था, जिसे लोगों द्वारा सराहा गया. एक हिंदू होने के नाते मैं खुश हूं कि राम मंदिर का निर्माण जल्द ही शुरू हो रहा है.

75 वर्षीय नेता ने जोर देकर कहा कि भले ही बीजेपी ये आरोप लगाती है कि सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के बाद शिवसेना ने हिंदुत्व छोड़ दिया है, लेकिन बीजेपी की तुलना में शिवसेना ज्यादा हिंदुत्ववादी है. शिवसेना फाइटर है और बीजेपी पर्दों के पीछे से लड़ती है. यह बात शिवसेना नेता ने बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर बीजेपी पर कटाक्ष किया.

आडवाणी को दिया जाना चाहिए क्रेडिट

मुंबई के बीएमसी नगरसेवकों का एक दल भी तत्कालीन सेना प्रमुख के निर्देशों का पालन करते हुए अयोध्या गया था. विश्वनाथ नेरुकार जो कि उस समय बीएमसी कोर्पोरेटर थे, उन्होंने कहा कि वहां पहुंचने के बाद, हमने कार सेवा में भाग लिया, लेकिन सेना के आने की घोषणाओं को सुनने के बाद अपनी वापसी की यात्रा की योजना बनाई.

उन्होंने कहा कि भूमि पूजन बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के हाथों होना चाहिए, क्योंकि इसका क्रेडिट उन्हीं को जाता है. उन्होंने ही रथ यात्रा की शुरुआत की और हम जैसे लोग उस रथ यात्रा के जरिए ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़े. हमें इस आयोजन के लिए बीजेपी से निमंत्रण की उम्मीद नहीं है, क्योंकि आडवाणी जी को भी नजरअंदाज कर दिया है.

जो शिवसेना ने भूमिका निभाई उससे कोई इनकार नहीं कर सकता

एक अन्य बीएमसी कोर्पोरेटर विजय दारुवाले भी उस विश्वनाथ की टीम का हिस्सा थे. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि गुंबद ध्वस्त होने के बाद मैंने कार सेवा में भाग लेकर राम मंदिर आंदोलन में कुछ छोटा योगदान दिया है. चाहे कोई भी उस महत्वपूर्ण भूमिका से इनकार नहीं कर सकता है जो राम जन्मभूमि आंदोलन में शिवसेना ने निभाई थी.

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