मुंबई में पेड़ों से क्यों चिपके हैं लोग? इस तस्वीर ने दिला दी सुंदर लाल बहुगुणा की याद

बहुगुणा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का आग्रह किया. इसके बाद पेड़ों के काटने पर 15 साल के लिए रोक लगा दी गई.
mumbai aarey colony sunderlal bahuguna, मुंबई में पेड़ों से क्यों चिपके हैं लोग? इस तस्वीर ने दिला दी सुंदर लाल बहुगुणा की याद

पेड़ से चिपकी इस महिला की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. यह तस्वीर एक सामाजिक कार्यकर्ता की है जो मुंबई के आरे में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रही है.

यह तस्वीर काफी कुछ कहती है. ये कहती है कि एक्टिविस्ट ज़िंदगी को गले लगा रही है. ये कहती है कि लड़ाई मेरे या तुम्हारे लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए है.

इस तस्वीर ने एक बार फिर से विकास बनाम जंगल की लड़ाई छेड़ दी है.

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पर्यावरण संगठन मेट्रो प्रोजेक्ट के नाम पर आरे कॉलोनी के पेड़ों के काटे जाने का विरोध कर रहे हैं. इससे पहले पेड़ कटाई पर रोक लगाने के संबंध में बंबई उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गईं थीं. लेकिन, बंबई उच्च न्यायालय ने पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले पर्यावरण कार्यकर्ताओं की याचिकाएं खारिज कर दी.

जिसके बाद मुंबई मेट्रो रेल निगम लिमिटेड ने शुक्रवार रात से ही पेड़ों को काटने का काम शुरू कर दिया.

पेड़ कटाई के विरोध में सड़क पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. पुलिस ने अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया है. लोगों को रोकने के लिए आसपास के इलाक़ों में धारा 144 लागू कर दी गई है.

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ज़ाहिर है महाराष्ट्र सरकार मेट्रो शेड के निर्माण के लिए पेड़ की कटाई करना चाहती है. इस परियोजना के लिए इलाके के लगभग 2,600 पेड़ काटे जाने की बात है जबकि अबतक 800 पेड़ काटे जा चुके हैं.

वायरल हो रही इस तस्वीर ने उत्तराखंड के समाजसेवी सुंदर लाल बहुगुणा की याद दिला दी.

कौन हैं सुंदर लाल बहुगुणा?

साल 1973 में पेड़ों को बचाने के लिए उत्तराखंड के चमोली (तब यूपी) ज़िले में सुंदर लाल बहुगुणा के नेतृत्व में चिपको आंदोलन की शुरुआत की गई थी. चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और सुंदरलाल बहुगुणा समेत कई लोग पेड़ों को बचाने के लिए सामने आए. उन्होंने जंगलों की अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू किया.

26 मार्च, 1974 को चमोली ज़िले में जब ठेकेदार के आदमी पेड़ काटने आए तो ग्रामीण महिलाएं पेड़ से चिपककर खड़ी हो गईं. यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया. 1980 की शुरुआत में बहुगुणा ने हिमालय की 5,000 किलोमीटर की यात्रा की. उन्होंने गांव-गांव का दौरा कर लोगों को पेड़-पौधे होने के फ़ायदे गिनाए और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश फैलाया.

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उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का आग्रह किया. इसके बाद पेड़ों के काटने पर 15 साल के लिए रोक लगा दी गई.

बहुगुणा ने टिहरी बांध के खिलाफ भी आंदोलन चलाया. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के शासनकाल में डेढ़ महीने तक भूख हड़ताल की थी. नतीजा यह हुआ कि टिहरी बांध का काम रुक गया और फिर साल 2004 में बांध पर काम शुरू किया गया. हालांकि इसको रोकने के लिए सालों तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन चलता रहा था.

बहुगुणा कहते थे कि इससे सिर्फ धनी किसानों को फायदा होगा. उन्होंने कहा कि बांध भले ही भूकंप का सामना कर लेगा लेकिन पहाड़ियां नहीं कर पाएंगी. उनका कहना था कि पहाड़ियों में दरारें पड़ गई हैं, इसलिए अगर बांध टूटा तो 12 घंटे के अंदर बुलंदशहर तक का इलाका डूब जाएगा.

गांधी के पक्के अनुयायी बहुगुणा के जीवन का एकमात्र लक्ष्य तथा पर्यावरण की सुरक्षा करना. उनका जन्म 9 जनवरी, 1927 को हुआ था.

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18 साल की उम्र में वे पढ़ने के लिए लाहौर चले गए थे. उन्होंने मंदिरों में हरिजनों के प्रवेश के लिए आंदोलन भी किया था.

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