PM मोदी ने राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर-1 कहकर राहुल को दिखाया उनका ‘कर्म’- शिवसेना

शिवसेना ने अपने मुख्यपत्र 'सामना' के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजीव गांधी पर दिए बयान का बचाव किया है.

मुंबई. शिवसेना ने अपने मुख्यमत्र ‘सामना’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजीव गांधी को ‘भ्रष्टाचारी नंबर एक’ कहने वाले भाषण पर टिप्पणी की है. शिवसेना के मुख्यपत्र के माध्यम से लिखा है कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री ने उनका ‘कर्म’ ही दिखाया है. बता दें कि पीएम मोदी ने यूपी की एक जनसभा में राहुल गांधी को उद्देशित कर कहा था कि ‘तुम्हारे पिताजी ‘मि. क्लीन’ के रूप में राजनीति में ढिंढोरा पीटते हुए आए लेकिन ‘भ्रष्टाचारी नंबर एक’ के रूप में आखिरकार उनका अंत हुआ.’

शिवसेना के मुख्यपत्र सामना में लिखा गया- 

“प्रधानमंत्री मोदी के एक बयान को लेकर इन दिनों टीका-टिप्पणियों का कोहराम मचा हुआ है. राहुल गांधी को उद्देशित कर प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘तुम्हारे पिताजी ‘मि. क्लीन’ के रूप में राजनीति में ढिंढोरा पीटते हुए आए लेकिन ‘भ्रष्टाचारी नंबर एक’ के रूप में आखिरकार उनका अंत हुआ.’ ‘मोदी को इस तरह बोलना शोभा नहीं देता, राजीव गांधी आज जिंदा नहीं हैं, देश के लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया है’, ऐसा सुर इस बहाने लगाया जा रहा है. मोदी कुछ भी बोलते हैं, उनमें दूसरों के प्रति आदर नहीं, ऐसा भी कुछ लोगों का कहना है. प्रधानमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति को संयम बरतना चाहिए यह मान्य लेकिन ताली एक हाथ से नहीं बजती. 

मोदी महात्मा गांधी या विनोबा भावे नहीं, वे एक पक्के मंजे हुए राजनीतिज्ञ हैं. मुख्य बात यह है कि वे हाजिरजवाबी हैं. राहुल गांधी उन्हें सार्वजनिक सभाओं से ‘चोर’ कहते हैं और मोदी इसके लिए गांधी पर फूलों की बरसात करें या घर पर चायपान को बुलाएं ऐसी किसी को उम्मीद है क्या? प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राजीव गांधी के बारे में किया गया बयान गलत है इसे एक बार मान भी लें पर क्रांतिकारियों के शिरोमणि वीर सावरकर के बारे में राहुल गांधी ने जिस तरह के गंदे शब्दों का इस्तेमाल कर संपूर्ण क्रांतिकारियों का जो अपमान किया था उसके लिए किसी ने दुख व्यक्त किया है क्या? एक सार्वजनिक सभा में राहुल गांधी ने वीर सावरकर ब्रिटिशों से माफी मांगकर कैसे छूटे इसकी नकल करके दिखा रहे थे.

उन्हें अब प्रधानमंत्री ने उनका ‘कर्म’ ही दिखाया है. राजीव गांधी तमिल आतंकवादियों के हमले में मारे गए. राहुल और प्रियंका के सिर पर से पिता की छत्रछाया हट गई इसका दुख सभी को है. राजनीति में आने से पहले राजीव गांधी ने कोई भी बड़ा देश कार्य नहीं किया था इसलिए देश के लिए त्याग जैसे शब्द उनसे बहुत दूर ही हैं. इंदिरा गांधी की निर्मम हत्या के बाद राजीव गांधी सीधे प्रधानमंत्री बने और बाद में उनकी राजनीति तथा जिंदगी भी दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से खत्म हुई. 

मगर सावरकर के साथ ऐसा नहीं था.  14 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर में स्थापित अष्टभुजा देवी के सामने देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए ब्रिटिशों के खिलाफ अंतिम सांस तक संघर्ष और मौका आने पर अपना बलिदान देने की कसम खाई. आगे चलकर सावरकर ने सशस्त्र क्रांति की तैयारी की और अंग्रेजी हुकूमत को पलटने के लिए क्रांतिकारियों को एकत्रित करना शुरू किया. सावरकर से भयभीत हुई अंग्रेज सरकार ने सावरकर को दो बार आजीवन मतलब 40 वर्षों के कालेपानी की सजा दी और उन्हें अंडमान भेजा. सावरकर को देखकर अंडमान का जेल अधिकारी कुटिलतापूर्वक हंसते हुए बोला, ‘अब यहां से तेरी मृत देह ही बाहर निकलेगी.’ इस पर सावरकर ने तत्काल कहा, ‘लेकिन तब तक अंग्रेजों की सत्ता मेरे देश में रहेगी क्या?’ ऐसा था उनका आत्मविश्वास! ‘मेरे देश के क्रांतिकारी अंग्रेजों के अत्याचारी शासन को पलट देंगे, अंडमान के दरवाजे खुलेंगे और हम स्वतंत्र होंगे.’ यही आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति वीर सावरकर के साथ 10 वर्षों तक अंडमान जेल में उनके साथ रहा. 10 वर्ष तक उन्होंने वहां पर भयंकर यातनाएं भोगीं. इसमें से तिलभर भी यातना ‘गांधी’ परिवार ने भोगी क्या? पंडित नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी सरदार थे. उनकी किस्मत में कारावास आया लेकिन वह सावरकर के अंडमान के कालेपानी की तरह नहीं था. अंडमान की काल कोठरी में 10 वर्ष तक यातना भोगने के बाद राजनीति में शामिल नहीं होने की शर्त पर अंग्रेजों ने उन्हें मुक्त किया था. यह अंग्रेजों के सामने शरणागत या माफीनामा नहीं था बल्कि एक अस्थाई व्यवस्था थी.

प्रधानमंत्री मोदी ने राजीव गांधी के बारे में जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है वो आचार संहिता भंग करनेवाला नहीं है, ऐसी ‘क्लीन चिट’ अब चुनाव आयोग ने मोदी को दी है. मगर राहुल गांधी ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर के बारे में जिन अपमानास्पद शब्दों का इस्तेमाल किया, कृति की इसके लिए उन्हें कभी भी ‘क्लीन चिट’ नहीं मिल सकेगी. सावरकर मृत्युंजय थे, वे महान स्वतंत्रता सेनानी तो थे ही लेकिन विज्ञाननिष्ठ हिंदुत्ववादी थे. गाय देवता नहीं बल्कि एक उपयुक्त पशु होने का विचार उन्होंने रखा. जाति प्रथा के खिलाफ वे लड़े और देश विभाजन के विरोध में वे खड़े रहे. ऐसे वीर सावरकर का सार्वजनिक अपमान राहुल गांधी ने किया है. सावरकर का अपमान करनेवाला उनका वीडियो हमने चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक सभाओं में दिखाया तब लोगों ने ‘शेम शेम’ के नारे लगाए. स्वातंत्र्यवीर सावरकर आज अपना पक्ष रखने के लिए जीवित नहीं हैं. उनका अपमान करनेवाले राहुल गांधी को भी उनके कर्मों का फल मोदी ने दिया है. राजीव गांधी की हत्या दुर्भाग्यपूर्ण है ही लेकिन सावरकर का त्याग सदैव प्रेरणादायी है. राहुल गांधी ने मोदी को कहा है कर्म आपका इंतजार कर रहा है. मोदी ने सावरकर के बारे में राहुल गांधी के कर्म को तत्काल सामने लाया.”

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पीएम मोदी ने राजीव गांधी को कहा था भ्रष्ट 

पीएम मोदी ने पांचवे चरण के मतदान से पहले ही यूपी की एक जनसभा में राजीव गांधी को लेकर कांग्रेस पर हमलावर हो गए थे. राहुल गांधी पर वार करते हुए पीएम ने कहा, ‘आपके पिताजी को आपके राग दरबारियों ने मिस्टर क्लीन बना दिया था. गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन मिस्टर क्लीन चला था. लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नंबर वन के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया.”

दरअसल, प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी बोफोर्स घोटाले के संदर्भ में की थी जिसमें राजीव गांधी का नाम भी शामिल किया गया था. हालांकि एक सच यह भी है कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान ही चार्जशीट में से राजीव गांधी का नाम हटाया गया और क्लीन चिट दी गई. दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 64 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत मामले में राजीव गांधी पर कोई आरोप साबित नहीं हो पाया.