महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन लगने के बाद भी सरकार बना सकते हैं BJP, शिवसेना, कांग्रेस, NCP

क्‍या राष्‍ट्रपति शासन लागू होने के बाद भी महाराष्‍ट्र में सरकार बनने की कोई संभावना है? या महाराष्‍ट्र में दोबारा चुनाव ही अंतिम विकल्‍प है?

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र में मंगलवार को राष्‍ट्रपति शासन लागू कर दिया गया. रविवार को बीजेपी के सरकार बनाने से इनकार के बाद राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए 24 घंटे का वक्‍त दिया. इसके बाद शिवसेना विधायकों ने बहुमत का समय मांगा, जिसके राज्‍यपाल ने खारिज कर दिया.

शिवसेना के बाद राज्‍यपाल ने एनसीपी ने सरकार बनाने का न्‍योता दिया, लेकिन वह भी निर्धारित समय में बहुमत नहीं जुटा सकी. एनसीपी ने भी शिवसेना की तरह बहुमत साबित करने के लिए समय मांगा और राज्‍यपाल ने समय देने से इनकार करते हुए राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूर कर लिया और बाद में राष्‍ट्रपति ने इस पर मुहर लगा दी.

अब एक सवाल सबके जेहन में उठ रहा है कि क्‍या राष्‍ट्रपति शासन लागू होने के बाद भी महाराष्‍ट्र में सरकार बनने की कोई संभावना है? या महाराष्‍ट्र में दोबारा चुनाव ही अंतिम विकल्‍प है?

सबसे पहले राष्‍ट्रपति शासन लागू होने के बाद सरकार के गठन की. तो इसका जवाब है कि हां, राष्‍ट्रपति शासन लागू होने के बाद अगर शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस या बीजेपी राज्‍यपाल के पास जाकर बहुमत के जरूरी संख्‍या का दावा कर विधायकों का समर्थन पत्र सौंपते हैं और राज्‍यपाल को लगता है कि दावा करने वाले दल या गठबंधन के पास पर्याप्‍त संख्‍या है और वह स्थिर सरकार देने में सक्षम है तो महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन हटा दिया जाएगा और नई सरकार बनने का रास्‍ते साफ हो जाएगा.

महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन लागू होने के बाद अगर विधानसभा भंग कर दी जाए, तब सरकार बनाने का रास्‍ता खत्‍म हो जाएगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया गया है.

अब कौन-कौन बना सकता है सरकार?

महाराष्‍ट्र में 288 सीटों पर चुनाव हुआ था. इस तरह से सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. कुल मिलाकर केवल दो विकल्‍प महाराष्‍ट्र में बन सकते हैं.

पहला विकल्‍प- बीजेपी छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करे और एनसीपी फ्लोर टेस्‍ट के दौरान वॉकआउट कर जाए.

दूसरा विकल्‍प- शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस मिलकर सरकार बना लें. इन तीनों के पास क्रमश: 56+54+44=154 सीटें हैं, इस तरह आंकड़ा बहुमत के पार चला जाता है.

अब अगर बीजेपी सरकार बनाने का दावा पेश न करे और शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के बीच भी सहमति नहीं पाई तो राज्‍यपाल विधानसभा भंग कर देंगे और उसके बाद चुनाव कराए जाएंगे.