पालघर मॉब लिंचिंग: RSS और जावेद अख्तर ने की कार्रवाई की मांग, फोगाट ने पूछा- इतना सन्नाटा क्यों?

सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) से घटना को लेकर बात की थी, जिसमें सीएम ने गृहमंत्री को भरोसा दिलाया कि वो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.
Palghar Mob Lynching, पालघर मॉब लिंचिंग: RSS और जावेद अख्तर ने की कार्रवाई की मांग, फोगाट ने पूछा- इतना सन्नाटा क्यों?

महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं और उनके एक ड्राइवर की मॉब लिचिंग के मामले में पुलिस ने मुख्य दोषी को गिरफ्तार कर लिया है. इसकी जानकारी सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दी. इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है और साथ ही दो पुलिसवालों को भी सस्पेंड कर दिया गया है. सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह ने उद्धव ठाकरे से घटना को लेकर बात की थी, जिसमें सीएम ने गृहमंत्री को भरोसा दिलाया कि वो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.

इस बीच देश के कोने-कोने से पालघर मॉब लिंचिंग को लेकर आवाज उठनी लगी हैं. आम जनता से लेकर नामी हस्तियां भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए घटना को बर्बर बता रही हैं और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रही हैं.

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लेखक जावेद अख्तर ने घटना पर ट्वीट किया, “दो संतों और उनके ड्राइवर की हत्या के दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए. सभ्य समाज में बर्बर और जघन्य अपराध के लिए कोई सहिष्णुता नहीं होनी चाहिए.”

पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान ने लिखा, “पालघर मॉब लिंचिंग की तस्वीरें देखकर बहुत दुख हुआ. बहुत ही भयानक और बर्बर.”

वहीं रेसलर बबीता फोगाट ने भी पालघर मॉब लिंचिंग पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए हैं कि पालघर मॉब लिंचिंग पर इतना सन्नाटा क्यों है?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने लिखा, “महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक दूरस्थ गांव में जूना अखाड़े के पूज्य संतों पू. महंत कल्पवृश्र गिरी जी महाराज और पू. सुशील गिरी जी की दुखद निर्मम हत्या की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कठोर निंदा करता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाराष्ट्र सरकार से यह अपेक्षा करता है कि इस पूरे षडयंत्र को उजागर करते हुए वास्तविक दोषियों को गिरफ्तार कर योथोचित दंड सुनिश्चित करें.”

क्या है मामला?

मुंबई के कांदिवली के रहने वाले दो साधुओं और उनके ड्राइवर को गडचिंचल में ग्रामीणों के एक समूह ने पीट-पीट कर मार डाला था. लॉकडाउन के बावजूद भी तीनों ने 120 किमी का सफर पूरा कर लिया था, लेकिन गडचिंचल गांव के पास वन विभाग की एक टीम ने उन्हें रोक दिया.

बुधवार रात करीब 10 बजे कार में बैठे तीनों लोगों की दो वन विभाग के कर्मियों के साथ बातचीत हो रही थी कि अचानक कुछ लोग कार के पास आए और बहस करने लग गए, जैसे ही बहस तेज हुई तो भीड़ ने तीनों को पीट दिया. इस बीच वन रक्षकों ने कासा पुलिस स्टेशन में फोन किया, जो कि घटनास्थल से 35 किलोमीटर दूर था.

पुलिस को धमकाया

इसके बाद कासा के चार पुलिसकर्मियों की एक टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक भीड़ ने उस कार को पलट दिया था जिसमें तीनों लोग सवार थे और यहां तक ​​कि वे लोग पुलिसकर्मियों को भी धमकाने लगे. वहां मौजूद कुछ लोगों ने अपने फोन से वीडियो शूट कर लिया, जिसमें भीड़ को तीन लोगों की पिटाई करते हुए देखा गया.

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