Saamana Editorial in Hindi, नरेंद्र मोदी का देश के प्रधानमंत्री के रूप में कोई तोड़ नहीं मगर… शिवाजी से तुलना पर बिफरी शिवसेना
Saamana Editorial in Hindi, नरेंद्र मोदी का देश के प्रधानमंत्री के रूप में कोई तोड़ नहीं मगर… शिवाजी से तुलना पर बिफरी शिवसेना

नरेंद्र मोदी का देश के प्रधानमंत्री के रूप में कोई तोड़ नहीं मगर… शिवाजी से तुलना पर बिफरी शिवसेना

शिवसेना ने ‘आज के शिवाजी नरेंद्र मोदी’ नामक किताब को ढोंग और चमचागिरी का उदाहरण बताया है.
Saamana Editorial in Hindi, नरेंद्र मोदी का देश के प्रधानमंत्री के रूप में कोई तोड़ नहीं मगर… शिवाजी से तुलना पर बिफरी शिवसेना

एक किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से होने पर शिवसेना भड़क गई है. पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा है कि ‘मोदी को भी ये तुलना पसंद नहीं आई होगी.’ शिवसेना ने ‘आज के शिवाजी नरेंद्र मोदी’ नामक किताब को ढोंग और चमचागिरी का उदाहरण बताया है.

क्‍या है आज ‘सामना’ के संपादकीय में?

“छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना प्रधानमंत्री मोदी से किए जाने के कारण महाराष्ट्र में संताप का बवंडर उठ चुका है. इसमें कुछ गलत है, ऐसा नहीं लगता. ये समझ लेना चाहिए कि ये बवंडर प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में नहीं है. ये सब मोदी के पीठ पीछे हो रहा है. भाजपा के एक नए चमचे ने ‘आज के शिवाजी नरेंद्र मोदी’ नामक पुस्तक लिखी है. इस पुस्तक का विमोचन भाजपा के दिल्ली कार्यालय में हुआ. महाराष्ट्र की ११ करोड़ जनता को ये बिल्कुल भी पसंद नहीं आया. श्री मोदी एक कर्तबगार और लोकप्रिय नेता हैं, देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कोई तोड़ नहीं. फिर भी वे देश के छत्रपति शिवाजी हैं क्या? उन्हें छत्रपति शिवराय का स्थान देना सही है क्या? इसका उत्तर एक स्वर में यही है, ‘नहीं… नहीं…!’ उनकी तुलना जो लोग शिवाजी महाराज से कर रहे हैं उन्होंने छत्रपति शिवाजी राजे को समझा ही नहीं. प्रधानमंत्री मोदी को भी ये तुलना पसंद नहीं आई होगी. लेकिन अति उत्साही भक्त नेताओं के लिए अक्सर परेशानी खड़ी कर देते हैं. ये मामला भी कुछ ऐसा ही है.

शिवराय ने औरंगजेब के सिर पर पैर रखकर हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की. उसी प्रकार ‘औरंगशाह को खुद दिल्ली में ही बंद करूंगा’, छत्रपति का यह वाक्य अंग्रेजी रिकॉर्ड्स में भी है. यही शिवराय की प्रतिमा है. छत्रपति शिवराय के पत्र, मुद्रा और आदेश आदि अब उपलब्ध हैं. शिवाजी महाराज की मुद्रा का विचार करें तो उसमें ये नहीं दिखता कि उनके उद्देश्य में किसी प्रकार का स्वार्थ निहित था. शिवराय लड़े, शत्रु राज्यों में घुसकर लूट की और हमले किए. ये सब शिवराय ने इसलिए किया क्योंकि स्वराज्य के लिए यह आवश्यक था. ये स्वराज्य की जरूरत थी. स्वराज्य के मार्ग में आनेवाले रोड़ों को हटाने के लिए उन्होंने कुछ काम किए. ये सब शिवराय ने खुद के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के हितार्थ किया. विदेशी इतिहासकारों की दृष्टि में शिवाजी राजे एक पराक्रमी महापुरुष थे. १६७० में एक अंग्रेज इतिहासकार द्वारा लिखा पत्र विचारणीय है. उस समय महाराज बंकापुर मुहिम पर थे. इतिहासकार लिखता है, ‘वो विजयी होगा, ऐसा लोग कहते हैं (मतलब शिवाजी राजे).’

अंग्रेजी इतिहासकार क्या कहता है वो आया, उसने देखा और जीत लिया, ऐसा अंग्रेजों ने लिखकर रखा है. उन्होंने शिवराय की तुलना अलेक्जेंडर से की है. इतिहासकार कहता है ‘शिवराय तलवार कब तक नहीं रखते? दिल्ली में ही औरंगशाह को कैद किए जाने तक तलवार नहीं रखने का उन्होंने प्रण किया है.’ यह पत्र-व्यवहार कभी प्रकाशित होगा इसकी कल्पना न होने के बावजूद पश्चिम के लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में ये मत व्यक्त किया है. इस प्रकार के गौरवोद्गार पोर्तगीज लोगों के दफ्तर में भी मिलते हैं. कवि परमानंद की कविताओं में भी ये पढ़ने को मिलता है. परमानंद शिवराय के करीबी और विश्वासपात्र कवि माने गए हैं. उन्होंने अपने ‘शिवप्रभात’ ग्रंथ में लिखा है, ‘चरितम् शिवराजस्ये भरतेस्यव भारतम्’. इतिहासकार शिवराय को शंकर का अवतार न कहते हुए विष्णु का अवतार मानते हैं. अभी जो लोग श्री मोदी को ‘आज के शिवाजी’ के रूप में संबोधित कर रहे हैं इन्हीं लोगों ने लोकसभा चुनाव के पहले मोदी को विष्णु का तेरहवां अवतार माना था. कल विष्णु के अवतार, आज ‘शिवाजी’. इसमें देश, देव और धर्म का अपमान है ही लेकिन मोदी भी घेरे में हैं.

‘आज के शिवाजी नरेंद्र मोदी’ नामक पुस्तक ढोंग और चमचागिरी का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है. महाराष्ट्र के भाजपा नेताओं को इस ढोंग का खुलकर निषेध व्यक्त करना चाहिए. दिल्ली के कुछ नेता वीर सावरकर के चरित्र को पढ़ें और दिल्ली के भाजपाई नेता छत्रपति शिवाजी महाराज को समझें. इससे गलतफहमी दूर होगी. महाराष्ट्र के छत्रपति शिवराय की गद्दी के सारे वारिस आज भाजपा में हैं. हर गद्दी के लिए हमारे मन में आदर है. महाराष्ट्र में जब संताप है तो ऐसे में शिवराय के वारिसों को कठोर भूूमिका अपनानी होगी. छत्रपति ने मुगलों के विरोध में नीति बनाई इसीलिए ‘स्वराज्य’ की स्थापना हुई. अगर उन्होंने चाकरी का मार्ग स्वीकार किया होता तो महाराष्ट्र नहीं बन पाता. शिवराय ने दिल्लीश्वरों की मनमानी को लात मारी इसीलिए ‘मराठी स्वाभिमान’ आज भी जिंदा है.

शिवराय शूर और संयमी थे इसलिए उन्होंने स्वराज्य का निर्माण किया. जिस जय भगवान गोयल ने महाराष्ट्र सदन पर हमला किया उसी ने ये पुस्तक लिखी है. उस हमले में शिवराय की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचा था. अब भाजपावाले कहते हैं कि गोयल से हमारा क्या संबंध? वैसे संबंध नहीं है? पार्टी कार्यालय में पुस्तक का विमोचन हुआ और उस समय भाजपा के नेता उपस्थित थे. गोयल आज भी कहते हैं, ‘हमारे शिवाजी सिर्फ नरेंद्र मोदी ही हैं!’ अब इस पर महाराष्ट्र के भाजपा नेताओं को बोलना है. ग्यारह करोड़ जनता बोल ही रही है. छत्रपति शिवराय के वारिस चिढ़े हुए हैं. छत्रपति शिवराय का अपमान हुआ है. शिवराय के वंशजों को तुरंत म्यान से तलवार निकालनी चाहिए. अब वे निकाल चुके हैं और इसके लिए उनका आभार! भाजपा का मुंह ‘म्यान’ बनी इसलिए हमने यह शिव व्याख्यान दिया.”

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