महाराष्ट्र: कोरोना कनेक्शन के हर विवाद का संजय राउत ने दिया जवाब, पीयूष गोयल-सीएम योगी पर पलटवार

महाराष्ट्र (Maharshtra) कोरोना से संबंधित ज्यादातर खबरों के केंद्र में है. ऐसे में राज्य की सत्ता में काबिज शिवसेना (Shiv Sena) के सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने महाराष्ट्र और उसके कोरोना कनेक्शन से जुड़े कई मसलों पर अपने विचार साझा किए हैं.
Corona connection to Maharashtra, महाराष्ट्र: कोरोना कनेक्शन के हर विवाद का संजय राउत ने दिया जवाब, पीयूष गोयल-सीएम योगी पर पलटवार

कोरोनावायरस का कहर पूरे भारत में फैला हुआ है. हालांकि इससे सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है. महाराष्ट्र कोरोना (Coronavirus) से संबंधित ज्यादातर खबरों के केंद्र में भी है. ऐसे में महाराष्ट्र की सत्ता में काबिज शिवसेना (Shiv Sena) के सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने महाराष्ट्र और उसके कोरोना कनेक्शन से जुड़े कई मसलों पर अपने विचार साझा किए हैं.

रेल मंत्रालय और पीयूष गोयल को जवाब

महाराष्ट्र में फंसे प्रवासी श्रमिकों को लेकर राज्य सरकार और रेलवे मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) के बीच ट्विटर पर जंग सी छिड़ गई. गोयल का कहना था कि वह राज्य में फंसे मजदूरों को घर भेजने के लिए ट्रेन चलाने को तैयार हैं, लेकिन इसी के साथ उन्होंने राज्य सरकार से कहा कि वो मजदूरों की लिस्ट भेजें, ताकि पहले की तरह ट्रेन खाली ने जाएं. इसपर शिवसेना सांसद संजय राउत ने उन्हें घेरा.

राउत ने सवाल करते हुए कहा कि पूरे देश से रेल मंत्रालय ने इस प्रकार की लिस्ट किस राज्य से मंगाई हैं. इसके बारे में कुछ मालूम नहीं  है. महाराष्ट्र सरकार का इस मामले में जो काम है बहुत बढ़िया चल रहा है. हम मानते हैं कि रेलवे मंत्रालय पर बहुत बड़ा प्रेशर है. पूरे देश से लोगों को अपने-अपने घर पहुंचाने के लिए महाराष्ट्र (Maharashtra) ने जितनी मांग की थी रेलवे ट्रेन की उतनी नहीं मिल पाई हैं. इस बारे में अगर सरकार की तरफ से कोई टिप्पणी की गई है, तो इसमें इतना कोई गुस्सा होने की जरूरत नहीं है.

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उन्होंने आगे कहा कि लाखोंं मजदूरों को महराष्ट्र सरकार ने अपने गांव अपने घर भेजा है. यह बड़ी बात है बहुत से लोग अभी भी अपने घर जाना चाहते हैं अलग-अलग राज्यों में. अगर राज्य सरकार और केंद्र की सरकार दोनों मिलकर प्रयास करें तो यह लोग अपने घर पहुंच सकते हैं. जो लिस्ट हमें देनी थी, वह हमने रेलवे मंत्रालय (Railway Ministry) को दी है और उसकी सूची भी हमने जारी की है.

शिवसेना सांसद ने कहा कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. कल मुख्यमंत्री ने भी फेसबुक लाइव में साफ कहा था कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, केंद्र में हो, राज्य की हो, केंद्र की जिम्मेदारी है आप हमारे घर के गार्डियन हैं. पक्षीय राजनीति अपनी-अपनी पार्टियों को नहीं करनी चाहिए. यह देश हमारा है सभी राज्य हमारे हैं. बीजेपी के नेता जिस तरह से काली पट्टी और झंडे दिखा रहे थे, उससे तो लगता है कि अपनी राजनीति सेकना चाहते हैं.

योगी आदित्यनाथ को भी दिया जवाब

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भी मजदूरों को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा था. योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जब महाराष्ट्र सरकार बसों और ट्रेनों में सारी सुविधाएं देकर चार लाख मजदूरों को रवाना कर चुकी है तो महाराष्ट्र की सड़कों से भूखे प्यासे मजदूरों की तस्वीरें क्यों आ रही हैं. इसके जवाब में संजय राउत ने कहा कि जो लाखों मजदूर महाराष्ट्र से हमने यूपी तक पहुंचाएं हैं, अगर आप उनका मत लें, उनसे बातचीत करें तो उनके मन में और दिमाग में एक ही नारा गूंजेगा जय महाराष्ट्र.

वहीं योगी आदित्यनाथ द्वारा यूपी के मजदूरों को बुलाने के लिए परमिशन लेने वाले मुद्दे पर संजय राउत ने कहा कि इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल हमने नहीं किया है. दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, जिन्हें हमने संत का दर्जा दिया है, उन योगी जी ने किया है.

राउत ने आगे कहा कि इतने सालों साल से पूरे देश के मजदूरों को मुंबई (Mumbai) ने पाला है, पोषा है, बड़ा किया है, घर दिया है और दाना-पानी दिया है. उसमें ज्यादा उत्तर प्रदेश के थे. हमारे यहां भाईचारे से रहते थे. अभी संकट की घड़ी में मजबूरन उनको जाना पड़ा. इसके लिए केंद्र सरकार की कुछ नीतियां जवाबदार हैं. लॉकडाउन की वजह से काम नहीं है तो उसका दोष अगर कोई राज्य सरकार को देता है तो यह ठीक नहीं है.

शरद पवार की राज्यपाल से मुलाकात पर

वहीं राज्य सरकार में साथी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) की राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात पर राउत ने कहा कि राज्यपाल महाराष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख हैं. उनसे हमेशा बातचीत होना जरूरी होता है. इस तरह से पवार साहब भी मिले. महाराष्ट्र और देश में इस तरह का संकट बना हुआ है और राज्यपाल हर व्यक्ति से जानना चाहते हैं कि क्या हो रहा है? क्या करना चाहिए? यह राज्यपाल की अच्छी भावना है सब से बात कर अपनी भूमिका बनाना चाहते हैं. राज्यपाल एक्टिव होने चाहिए.

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