एक्सपोज होने के डर से केंद्र सरकार ने भीमा कोरेगांव केस NIA को सौंपा: शरद पवार

शरद पवार ने मामले की जांच के लिए एक रिटायर्ड जज की देखरेख में स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम के गठन की मांग की थी. वो चाहते थे कि यल्गार परिषद मामले में कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुणे पुलिस की कार्रवाई की जांच हो.
Koregaon Bhima probe to NIA, एक्सपोज होने के डर से केंद्र सरकार ने भीमा कोरेगांव केस NIA को सौंपा: शरद पवार

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. एनसीपी प्रमुख ने आरोप लगाए कि केंद्र सरकार ने एक्सपोज होने के डर से भीमा कोरेगांव केस नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA)को सौंप दिया.

मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि शनिवारवाड़ा में जो भाषण हुए थे वो अन्याय और अत्याचार के खिलाफ थे. अन्याय के खिलाफ बोलना नक्सलवाद नहीं होता. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सरकार को एक्सपोज होने का का डर सता रहा है इसीलिए केस NIA को सौंप दिया.

शरद पवार ने मामले की जांच के लिए एक रिटायर्ड जज की देखरेख में स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम के गठन की मांग की थी. वो चाहते थे कि यल्गार परिषद मामले में कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुणे पुलिस की कार्रवाई की जांच हो.

पवार ने कहा कि इस मामले को लेकर गलत बयानबाजी की जा रही है. बहुत गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं. पवार ने कहा कि घटना के तीन महीने बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस मामले का जिक्र भी किया था. उन्होंने माओवाद का जिक्र नहीं किया था.

उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मामले की नए सिरे से जांच कराने का अनुरोध करूंगा. मैने जांच की मांग के साथ एक चिठ्ठी, मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को भेजी थी. महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री अजित पवार ने इस मामले पर एक बैठक बुलाई. बैठक के 4 से 5 घंटे बाद ये केस NIA को सौंप दिया गया. ये जांच केंद्र और राज्य सरकार दोनो के पास है. एक्सपोस होने के डर से केंद्र सरकार ने इसे अपने पास रख लिया.

दीपक केसरकर पर के सवाल पर पवार ने कहा कि वो MOS थे, मुझे पता है कि MOS के पास कितनी जानकारी होती है, लेकिन मैं इसपर कोई बयान नहीं देना चाहता. उन्होंने फोन टैपिंग पर कहा कि हमें पता है कि हमारे फोन टैप होते हैं, लेकिन फिलहाल इस पर पूरी जानकारी के साथ बात करना चाहिए.

उन्होने कहा कि केंद्र सरकार ने उन लोगों को जेल में डाल दिया जिन्हे महाराष्ट्र सरकार ने न्याय और अधिकार की बात करने के लिए सम्मानित किया था. सरकार को इस केस की जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी देखनी चाहिए. कोर्ट में जाने के सवाल पर पवार ने कहा कि कोर्ट में जाने का तो सवाल ही नहीं उठता.

हालांकि पुणे पुलिस के अनुसार यल्गार परिषद ने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में एक सम्मेलन का आयोजन किया. इस सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था. इस सम्मेलन में दिए गए भड़काऊ भाषण की वजह से अगले दिन भीमा कोरेगांव के वॉर मैमोरियल में जातिगत हिंसा हुई.

यल्गार परिषद मामले में पुणे पुलिस ने नौ लोगो को गिरफ्तार किया था. इसमें सुधीर धवले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंसाल्वेस, सुधा भारद्वाज और वरुण राव रावत शामिल हैं.

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