‘105 सीट वालों का मानसिक संतुलन बिगड़ा’, सामना में शिवसेना का BJP पर निशाना

राज्य में सरकार बनाने को लेकर बीजेपी और शिवसेना पूरी कोशिशों में लगी हुई हैं. एक तरफ तो बीजेपी का कहना है कि राज्य में उनकी ही सरकार बनेगी, वहीं शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस पार्टी गठबंधन वाली सरकार बनाने को लेकर अपनी तैयोरियों में लगे हुए हैं.
Shiv Sena Mouthpiece Samna, ‘105 सीट वालों का मानसिक संतुलन बिगड़ा’, सामना में शिवसेना का BJP पर निशाना

महाराष्‍ट्र में सत्‍ता के लिए गठबंधन अब तक फाइनल नहीं हो सका है. हालांकि NCP प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि मध्‍यावधि चुनाव की कोई संभावना नहीं है. देर-सवेर राज्‍य में सरकार बन ही जाएगी. शिवसेना, NCP और कांग्रेस के बीच कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ड्राफ्ट तैयार है.

वहीं, पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस भी कह रहे हैं बीजेपी के अलावा महाराष्‍ट्र में कोई और सरकार नहीं बना सकता. इसी बीच शिवसेना ने अपने मुखपत्र के जरिए एक बार बीजेपी पर निशाना साधा है. शिवसेना का कहना है कि 105 सीट वालों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और ये मानसिक अवस्था उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.

दिया जा रहा श्राप, नहीं टिकेगी 6 महीन सरकार

“राज्य में नए समीकरण बनता देखकर कई लोगों के पेट में दर्द शुरू हो गया है. कौन वैसे सरकार बनाता है देखता हूं, अपरोक्ष रूप से इस प्रकार की भाषा और कृत्य किए जा रहे हैं. ऐसे श्राप भी दिए जा रहे हैं कि अगर सरकार बन भी गई तो वैसे और कितने दिन टिकेगी देखते हैं. ऐसा ‘भविष्य’ भी बताया जा रहा है कि 6 महीने से ज्यादा सरकार नहीं टिकेगी. ये नया धंधा लाभदायक भले हो, लेकिन ये अंधश्रद्धा कानून का उल्लंघन है.”

“अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए ये हरकत महाराष्ट्र के सामने आ रही है. हम महाराष्ट्र के मालिक हैं और देश के बाप हैं, ऐसा किसी को लगता होगा तो वे इस मानसिकता से बाहर आएं. ये मानसिक अवस्था 105 वालों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है. ऐसी स्थिति ज्यादा समय रही तो मानसिक संतुलन बिगड़ जाएगा और पागलपन की ओर यात्रा शुरू हो जाएगी. ”

नेता कर रहे मोदी का नाम खराब

“कल आए नेता को जनता पागल या मूर्ख साबित करे ये हमें ठीक नहीं लगता.एक तो नरेंद्र मोदी जैसे नेता के नाम पर उनका खेल शुरू है और इसमें मोदी का ही नाम खराब हो रहा है. महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है और राष्ट्रपति शासन लगने के बाद 105 वालों का आत्मविश्वास इस प्रकार झाग बनकर निकल रहा है. मानो मुंबई किनारे के अरब सागर की लहरें उछाल मार रही हों.”

105 वाले कह चुके हैं हमारे पास नहीं है बहुमत

“पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने विधायकों को बड़ी विनम्रता से कहा कि बिंदास रहो, राज्य में फिर से भाजपा की ही सरकार आ रही है. कल ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि राज्य में जिसके पास 145 का आंकड़ा है उसकी सरकार आएगी और ये संवैधानिक रूप से सही है.”

“हालांकि अब जो ऐसा कह रहे हैं कि अब भाजपा की सरकार आएगी वे 105 वाले पहले ही राज्यपाल से मिलकर साफ कह चुके हैं कि हमारे पास बहुमत नहीं है! इसलिए सरकार बनाने में हम असमर्थ हैं, ऐसा कहने वाले राष्ट्रपति शासन लगते ही ‘अब सिर्फ हमारी सरकार है!’ ये किस मुंह से कह रहे हैं? जो बहुमत उनके पास पहले नहीं था वो बहुमत राष्ट्रपति शासन के सिलबट्टे से वैसे बाहर निकलेगा? यह सवाल तो है ही लेकिन हम लोकतंत्र और नैतिकता का खून करके ‘आंकड़ा’ जोड़ सकते हैं, जैसी भाषा महाराष्ट्र की परंपरा को शोभा नहीं देती, फिर ऐसा बोलने वाले मुंह का डिब्बा किसी भी पार्टी का हो.”

राष्ट्रपति शासन की आड़ में घोड़ाबाजार

“राष्ट्रपति शासन की आड़ में घोड़ाबाजार लगाने का मंसूबा अब साफ हो गया है. स्वच्छ और पारदर्शी काम करने का वचन देने वालों का यह झूठ है और ये बार-बार साबित हो रहा है. सत्ता या मुख्यमंत्री पद का अमरपट्टा लेकर कोई जन्म नहीं लेता. खुद को विश्व विजेता कहने वाले नेपोलियन और सिकंदर जैसे योद्धा भी आए और गए.”

“श्रीराम को भी राज्य छोड़ना पड़ा. औरंगजेब आखिर जमीन में गाड़ा गया, तो अजेय होने की लफ्फाजी क्यों? एक तरफ फडणवीस ‘राज्य में फिर से भाजपा की ही सरकार!’ का दावा करते हैं और दूसरी तरफ नितिन गडकरी ने क्रिकेट का रबड़ी बॉल राजनीति में फेंक दिया है. ‘क्रिकेट और राजनीति का आखिरी कुछ नहीं होता. किसी भी क्षण फैसला बदल सकता है. एक समय हाथ से निकले मुकाबले में जीत मिल सकती है’, ऐसा सिद्धांत गडकरी ने जाहिर किया है.”

“गडकरी का क्रिकेट से संबंध नहीं है. उनका संबंध सीमेंट, इथेनॉल और कोलतार आदि वस्तुओं से है. संबंध है तो शरद पवार और क्रिकेट का है. अब पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव बन गए हैं, इसलिए भाजपा का क्रिकेट से अधिकृत संबंध जोड़ा गया है. गडकरी कहते हैं उस प्रकार से क्रिकेट में आखिर तक कब क्या होगा इसका कोई भरोसा नहीं.”

“आजकल क्रिकेट खेल कम और धंधा ज्यादा बन गया है और क्रिकेट के खेल में भी राजनीति की तरह ‘घोड़ाबाजार’ शुरू है. राजनीति में सट्टा बाजार का जोर है. ऐसे ही क्रिकेट में भी शुरू हो जाने से ‘जोड़-तोड़’ और ‘फिक्सिंग’ का वो खेल मैदान में शुरू हो गया है. इसलिए वहां खेल की जीत होती है या फिक्सिंग जीतती है इसे लेकर संशय रहता ही है. इसलिए गडकरी द्वारा महाराष्ट्र के राजनीतिक खेल को क्रिकेट का रोमांचक खेल की उपाधि देना ठीक ही है.”

“राजनीति में जिससे तटस्थ निर्णय की अपेक्षा होती है उस ‘पंच’ के दूसरे से मिल जाने (या मिला लिए जाने से) पराभव पाते लोगों की आशा जागृत होगी ही ‘अब हमारी ही सरकार!’ जैसा आत्मविश्वास इसी से जागा होगा, लेकिन मैदान पर स्टंप नाम का डंडा है. उसे हाथ में लेकर जनता तुम्हारे सिर में घुसाए बिना नहीं रहेगी. ‘फिर से हमारी सरकार!’ जैसी चिल्लाहट महाराष्ट्र के कान के परदे फाड़ रही है.”

“इस प्रकार जनता बधिर हो जाएगी लेकिन चिल्लानेवालों का मानसिक संतुलन बिगड़ जाएगा. हमें चिंता है, महाराष्ट्र में पागलों की संख्या बढ़ने की खबर राज्य की प्रतिष्ठा में बाधक है. हम उन सबको फिर से प्रेम पूर्वक सलाह देते हैं इसे इतना दिल से मत लगाओ. ‘मानव का पुत्र जगत में पराधीन है’ जैसे सत्य है वैसे ही कोई अजेय नहीं है ये भी सत्य है. महाराष्ट्र में सत्य का भगवा लहराएगा.”

 

ये भी पढ़ें-  सैटेलाइट से कश्मीर में देंगे इंटरनेट, पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी के बयान पर यूं मौज ले रहे लोग

विंटर सेशन में पेश हो सकता है नागरिकता संशोधन बिल, जानें कानून में कैसे बदलाव की तैयारी

Related Posts