महाराष्ट्र चुनाव: नाराज शिवसेना कार्यकर्ताओं ने दिया इस्तीफा, उद्धव ठाकरे का सुनिए जवाब

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अभी तीन दिन पहले ही सामना को दिए इंटरव्यू में कार्यकर्ताओं की नाराज़गी को लेकर अपना पक्ष रखा था.
Shiv Sena workers resign, महाराष्ट्र चुनाव: नाराज शिवसेना कार्यकर्ताओं ने दिया इस्तीफा, उद्धव ठाकरे का सुनिए जवाब

महाराष्ट्र चुनाव के मद्देनजर बीजेपी के साथ सीटों के बंटवारे पर तो बात बन गई लेकिन शिवसेना की मुश्किल अब भी बरकरार है. बुधवार को 26 शिवसेना पार्षदों और 300 कार्यकर्ताओं ने प्राटी प्रमुख उद्धव ठाकरे को अपना इस्तीफ़ा भेजा है. सभी ‘सीटों के बंटवारे’ को लेकर नाराज़ है इसलिए उन्होंने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला लिया है.

ये सभी पार्षद मुंबई के कल्याण इलाक़े के हैं. वो चाहते हैं कि शिवसेना की तरफ से धनंजय बोडारे विधानसभा चुनाव लड़ें. सीट बंटवारे के बाद यह सीट बीजेपी के हिस्से में आ गई है.

हालांकि सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सभी शिवसैनिकों से गठबंधन धर्म का पालन करते हुए बीजेपी उम्मीदवार को सपोर्ट करने का आवाहन किया है लेकिन शिवसैनिक मान नहीं रहे हैं.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अभी तीन दिन पहले ही सामना को दिए इंटरव्यू में कार्यकर्ताओं की नाराज़गी को लेकर अपना पक्ष रखा था.

उनसे सवाल पूछा गया था कि 124 सीटों पर शिवसेना लड़ रही है मतलब 164 सीटों पर शिवसेना के उम्मीदवार नहीं हैं. वहां जो कार्यकर्ता कार्य कर रहे थे, जिन्होंने पार्टी के लिए तैयारी की थी लड़ने की, उन पर भी अन्याय हुआ ऐसा आपको लगता है क्या?

इस सवाल के जवाब में उद्धव ठाकरे ने कहा था, ‘अब ऐसा है कि 164 सीटों पर शिवसेना के कार्यकर्ता तैयार हैं. वैसे ही 124 जगहों पर बीजेपी के भी हैं. मतलब युति (गठबंधन) में कुछ हासिल करने के लिए कुछ गंवाना भी पड़ता है. लेकिन आखिर में एक साथ परिणाम देखने के बाद हम कहां हैं, ये पता चलता है. मैंने कहा न सत्ता हमें चाहिए ही. हां, मैंने सत्ता के लिए ही युति की. उसमें छुपाने जैसा कुछ नहीं है. ये सत्ता रहेगी तो उन 164 निर्वाचन क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं को भी मैं कुछ-न-कुछ दे सकता हूं इसलिए मैंने युति की.’

वहीं उम्मीदवारों को चुनने में होने वाली परेशानी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘जाने-अनजाने किसी पर तो अन्याय होता है. उस अन्याय के लिए मैं जिम्मेदार हूं. मैं किसी पर उसे टालता नहीं. उम्मीदवारी देना मतलब न्याय देना नहीं. उम्मीदवारी देने के बाद जब ये उम्मीदवार जीतकर आएंगे, सत्ता आएगी. अगर मैं कुछ मांगने जाता हूं तो बर्तन क्यों छुपाऊं? सत्ता के लिए हम लड़ते हैं. जब सत्ता आने के बाद मेरे जुझारू शिवसैनिकों को जिस-जिसको जो कुछ देना संभव है, उसे मैं वो दूंगा ही.’

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