‘सेक्युलर’ पर जोर देने वाले उद्धव की पार्टी ने जब की थी संविधान से ये शब्द हटाने की मांग

धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाली शिवसेना ने 2015 में मांग उठाई की थी कि संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द को स्थायी रूप से हटा देना चाहिए.
shiv sena on secularism, ‘सेक्युलर’ पर जोर देने वाले उद्धव की पार्टी ने जब की थी संविधान से ये शब्द हटाने की मांग

उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के 18वें मुख्यमंत्री बन गए हैं. शपथ ग्रहण से पहले शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस ने उद्धव के नेतृत्व में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (न्यूनतम साझा कार्यक्रम) जारी किया. इसमें सेक्युलर यानी धर्मनिरपेक्ष शब्द पर जोर दिया गया है. तीनों पार्टियों ने संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्ष मूल्य बरकरार रखने की बात कही है.

धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाली शिवसेना ने 2015 में मांग उठाई की थी कि संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द को स्थायी रूप से हटा देना चाहिए.

शिवसेना सांसद संजय राउत ने 66वें गणतंत्र दिवस के बाद कहा था कि भारत सेक्युलर नहीं हिंदू राष्ट्र है, इसलिए संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए सेक्युलर और सोशलिस्ट शब्द को हमेशा के लिए हटा दिया जाना चाहिए.

सांसद राउत ने कहा था कि यह दोनों शब्द संविधान की प्रस्तावना में कभी नहीं थे. संविधान के पुराने प्रस्तावना को छापना गलती है तो इसे रोज छापा जाना चाहिए.

संजय राउत ने ये मांग तब की थी जब 66वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर छपे सूचना प्रसारण मंत्रालय के एक सरकारी विज्ञापन पर धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं था.

उन्होंने कहा कि अनजाने में ही सही लेकिन 26 जनवरी को सूचना प्रसारण मंत्रालय ने जो विज्ञापन जारी किया वह भारत के लोगों की भावना का सम्मान करने वाला है, यदि इन शब्दों को इस बार गलती से हटाया गया है तो अब इसे संविधान की प्रस्तावना से स्थायी तौर पर हटा दिया जाना चाहिए.

उस वक्त केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी शिवसेना की मांग को सही बताया था. शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा था कि “ये देश कभी सेक्युलर नहीं था. 1947 में विभाजन धर्म के आधार पर हुआ है और पाकिस्तान धर्म के आधार पर बना है. पाकिस्तान मुसलमानों के लिए बना है तो हिंदुस्तान हिंदुओं के लिए है. तो ये देश सेक्युलर नहीं है.”

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