‘बीजेपी के साथ गठबंधन कर विष निकला अब हम नीलकंठ बनने को तैयार’, सामना में शिवसेना की दो टूक

शिवसेना के मुखपत्र में लिखा गया है कि ''कांग्रेस हो या राष्ट्रवादी कांग्रेस हर कोई इस स्थिति में अपने-अपने घोड़े दौड़ाएगा, इसमें कोई संदेह नहीं.''

सियासी ड्रामे के बीच मंगलवार को महाराष्ट्र में लगाए गए राष्ट्रपति शासन पर अब शिवसेना के मुखपत्र सामना ने बीजेपी पर निशाना साधा है. बुधवार को सामना में लिखा, ”महाराष्ट्र में भले ही घोड़ाबाजार शुरू न हुआ हो लेकिन कदम उसी दिशा में चल पड़े हैं.

राष्ट्रपति शासन की सिफारिश इसी का उदाहरण है. हम नहीं तो कोई नहीं, चुनावी नतीजों के बाद जो यह अहंकारी दर्प चढ़ा है, ये राज्य के हित में नहीं है. महाराष्ट्र की जनता द्वारा दिए आदेश का पालन नहीं हो रहा है और यह जनादेश का अपमान है.

कांग्रेस या राष्ट्रवादी के साथ हमें क्या करना है, ये हम देख लेंगे. बीजेपी के साथ अमृत पात्र से निकले विष को महाराष्ट्र की अस्थिरता को मिटाने के लिए हम ‘नीलकंठ’ बनने को तैयार हैं”

‘स्वाभिमान के लिए कदम उठाना पड़ा’

सामना में लिखा गया कि, ”दोनों ने मिलकर जिस नीति पर मुहर लगाई उसे यह जनादेश मिला है. इस बात को वे मानने को तैयार नहीं थे इसीलिए महाराष्ट्र की माटी का स्वाभिमान बनाए रखने के लिए हमें ये कदम उठाना पड़ा. इसका दोष कोई हमें क्यों दे?”

‘जनता को हकीकत मालूम है’

महाराष्ट्र की जनता को हकीकत मालूम है इसलिए हमने विश्वासपूर्वक कुछ कदम उठाए हैं. शिवसेना ने सत्ता स्थापना का दावा किया. समर्थन के लिए आवश्यक कागजात समय पर नहीं पहुंच सके. १०५ वालों को जब सफलता नहीं मिली तो अगला कदम उठानेवालों को ये समझना ही चाहिए. इसका मतलब सिर्फ १०५ वाले ही जल्लोष मनाएं, ऐसा नहीं है.

‘इस स्थिति में हर कोई घोड़े दौड़ाएगा’

मेरा चंदन मैंने ही पोंछा लेकिन दूसरे का सौभाग्य मिटने की खुशी मनानेवालों की विकृति महाराष्ट्र के सामने है. हम गत कुछ वर्षों से ऐसे कई कटु अनुभवों से गुजर रहे हैं. राज्य में सत्ता का पेच भले ही हो लेकिन वो छूटेगी.

कांग्रेस हो या राष्ट्रवादी कांग्रेस हर कोई इस स्थिति में अपने-अपने घोड़े दौड़ाएगा, इसमें कोई संदेह नहीं. लेकिन किसी घोड़े पर रकीब तो किसी पर जीन नहीं. घोड़े को रथ के रूप में आगे ले जाने को कहो तो रथ के पहिए डगमगा रहे हैं. रथ को रहने दो लेकिन कम से कम तांगे से तो निश्चित मार्ग से जाने की अपेक्षा लोगों को है.

पढ़ें सामना के मुख्य बिंदु

  • वर्तमान राजनीति में साधन-शुचिता की गप हांकने वाले लोग ही ज्यादा गड़बड़ और मिलावट कर रहे हैं.
  • महाराष्ट्र जैसे राज्य में जो खेल शुरू है उससे किसी की खुजली ठीक हो रही हो तो वो खुजाते बैठे. शिवसेना किस दिशा में कदम बढ़ा रही है इस पर टीका-टिप्पणी होने दो.
  • चुनाव के बाद जो अहंकार चढ़ा है वो राज्य के हित में नही है.
  • ये जनादेश बीजेपी और हमें साथ मे मिला है लेकिन बीजेपी इस बात को मानने को तैयार नही.
  • बीजेपी का ये कहना कि हम विपक्ष में बैठेंगे, ये सब शिवसेना को नीचा दिखाने का षड्यंत्र है.
  • कश्मीर में महबूबा और बिहार में नीतीश कुमार का ‘घरौंदा’ बसाते समय तत्व और विचारों का क्या हुआ?
  • बिहार में नीतीश कुमार और लालू यादव को जनादेश था. उस जनादेश को तोड़-मरोड़कर भाजपा और नीतीश कुमार में बन ही गई न! हमें नीतीश कुमार की चिंता है.
  • राज्यपाल ने हमें केवल 24 घंटे दिए जिसमें सभी विधायकों के हस्ताक्षर मुमकिन नहीं थे.
  • राज्यपाल को कानून का पालन करना चाहिए.

Shiv Sena Saamana BJP, ‘बीजेपी के साथ गठबंधन कर विष निकला अब हम नीलकंठ बनने को तैयार’, सामना में शिवसेना की दो टूक

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