‘दया, कुछ तो गड़बड़ है’, सामना में शिवसेना ने किस पर जताया शक?

सामना में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा, हम सुलगते अंगारों पर चलने वाले लोग हैं. ये अंगारे बुझे हुए कोयले नहीं हैं.

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद शिवसेना अपने मुखपत्र सामना के जरिए लगातार तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा है. गुरुवार को सामना में लिखा कि ”राज्य में राष्ट्रपति शासन का सिलबट्टा घुमा दिया गया है और इस पर कोई घड़ियाली आंसू बहाए तो उसे एक ‘स्वांग’ के रूप में देखा जाना चाहिए. मुख्यमंत्री श्री फडणवीस राष्ट्रपति शासन को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए व्यथित हैं. मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की है कि राजनीतिक अस्थिरता के कारण महाराष्ट्र में होने वाले निवेश पर विपरीत परिणाम होगा. ये उनका मिथ्या विलाप है.”

राज्यपाल पर साधा निशाना

सामना में लिखा है कि ”विधानसभा को 6 महीनों के लिए स्थगित करके राज्यपाल ने उसके प्रशासकीय सूत्रों को राजभवन के नियंत्रण में ले लिया है. अब वे सलाहकारों की सहायता से इतने बड़े राज्य की देख-रेख करेंगे. राज्यपाल कई वर्षों तक संघ के स्वयंसेवक थे. वे उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. लेकिन महाराष्ट्र अलग राज्य है.”

”इसका आकार और इतिहास भव्य है. यहां टेढ़ा-मेढ़ा कुछ नहीं चलेगा. इतने बड़े राज्य में सरकार स्थापना करने के लिए आप 48 घंटे भी नहीं दे रहे होंगे तो ‘दया, कुछ तो गड़बड़ है’, जनता को ऐसा लग सकता है. छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लाद दिया लेकिन सरकार स्थापना के लिए दो दिनों की मोहलत नहीं बढ़ाई.”

‘पटकथा पहले से ही लिखी जा चुकी थी’

सामना में लिखा गया है, ”सरकार स्थापना के लिए कम से कम 24 घंटे बढ़ाने की बात लेकर राजभवन पहुंचे नेताओं के बारे में जहां राज शिष्टाचार का पालन नहीं हुआ वहां 24 मिनट भी समय बढ़ाकर मिल सकता था क्या? ठीक है. हमने थोड़ा समय मांगा लेकिन दयालु राज्यपाल ने अब राष्ट्रपति शासन लागू करके बहुत समय दिया है. मानो महाराष्ट्र पर जो राष्ट्रपति शासन का सिलबट्टा घुमाया गया है उसकी पटकथा पहले से ही लिखी जा चुकी थी.”

‘महाराष्ट्र जुए में लगाने की ‘चीज’ नहीं है’

”आज महाराष्ट्र में चार अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियां अपने-अपने पत्ते हाथ में रखकर पीस रही हैं. इस खेल में दुक्का और तिर्री को भी महत्व मिल गया है. राजभवन के हाथ में ‘इक्का’ नहीं था, फिर भी उन्होंने उसे फेंका. जुए में ऐसे जाली पत्ते फेंककर दांव जीतने का प्रयास अब तक सफल नहीं हुआ है और महाराष्ट्र जुए में लगाने की ‘चीज’ नहीं है. सरकारें आएंगी, जाएंगी लेकिन अन्याय और ढोंग से लड़ने की महाराष्ट्र की प्रेरणा अजेय है.”

सामना में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा, ”महाराष्ट्र ने कभी किसी की पीठ पर वार नहीं किया. अफजल खान की अंतड़ियां भी सामने ही निकालीं. हम सुलगते अंगारों पर चलने वाले लोग हैं. ये अंगारे बुझे हुए कोयले नहीं हैं. अंगारों से मत खेलो. लेकिन कोयला समझकर अंगारों को हाथ में लोगे तो जलोगे ही और मुंह भी काला कर लोगे. हम किसी भी प्रकार के संघर्ष के लिए तैयार हैं.”

संजय राउत ने किया ट्वीट

शिवसेना के नेता संजय राउत चुनाव परिणाम के बाद से ही तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. उन्होंने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, ‘अब हारना और डरना मना है’.

ये भी पढ़ें

चुनावों से पहले जब फडणवीस को बताते थे अगला सीएम, तब क्यों नहीं हुई आपत्ति: अमित शाह

Exclusive: महाराष्ट्र में सरकार बनाने की जोड़-तोड़ के बीच सामने आई कांग्रेस के फिजूलखर्चों की लिस्ट