‘मौका पड़े तो गधे को भी बाप कहना पड़ता है’, डोनाल्‍ड ट्रंप के भारत दौरे पर शिवसेना का तंज

सामना में लिखा है कि ट्रंप के भारत आने पर उन्हें सीधे गुजरात ले जाकर सरकार कौनसा सन्देश देना चाहती है. ट्रंप के अहमदाबाद दौरे के लिए बड़ी-बड़ी दीवारें बनाई जा रही है, जिससे गरीबी को छुपाया जा सके, झुग्गी झोपड़ियों पर ट्रंप की नजर ना पड़े.

शिवसेना के मुखपत्र सामना में एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के बारे में लिखा गया है. सामना में लिखा है कि ट्रंप के भारत आने पर उन्हें सीधे गुजरात ले जाकर सरकार कौनसा सन्देश देना चाहती है. ट्रंप के अहमदाबाद दौरे के लिए बड़ी-बड़ी दीवारें बनाई जा रही है, जिससे गरीबी को छुपाया जा सके, झुग्गी झोपड़ियों पर ट्रंप की नजर ना पड़े.

इसके साथ ही लिखा गया है कि ट्रम्प के दौरे के लिए सरकारी खजाने से करोड़ो रुपये खर्च हो रहा है और गरीबी हटाओ की घोषणा अब गरीबी छुपाओ में तब्दील होती दिख रही है. सामना में ट्रम्प के भारत दौरे को आजादी से पहले अंग्रेजों के आने से जोड़ा गया है. सामना ने लिखा है कि गुलाम हिंदुस्तान में इंग्लैंड के राजा या रानी आते थे, तब उनके स्वागत की ऐसी ही तैयारी होती थी और जनता की तिजोरी से बड़ा खर्च किया जाता था.

वहीं, अमेरिका के राजनीति पर सामना ने लिखा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने कार्यकाल में ‘मजबूत’माने जाते हैं, उसी तरह ट्रंप भी हैं. ट्रंप ये कोई बड़े बुद्धिजीवी, प्रशासक, दुनिया का कल्याण करनेवाले विचारक हैं क्या? निश्चित ही नहीं लेकिन सत्ता पर बैठे व्यक्ति के पास होशियारी की गंगोत्री है. यह मानकर ही दुनिया में व्यवहार करना पड़ता है. सत्ता के सामने होशियारी चलती नहीं बाबा! ‘मौका पड़े तो गधे को भी बाप कहना पड़ता है.

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