किसके खेल का शिकार हो गए राज ठाकरे? शिवसेना ने दिया चैलेंज – हो सके तो आगे बढ़ो!

राज ठाकरे के सीएए समर्थन को लेकर सामना ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए लिखा है कि हिंदुत्ववादी वोटों में फूट डालने के लिए यह साजिश रची गई है.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए बीजेपी और MNS चीफ राज ठाकरे पर निशाना साधा है. सीएए कानून का समर्थन करने पर राज ठाकरे के पीछे राजनीतिक साजिश का दावा किया है. सामना ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए लिखा है कि हिंदुत्ववादी वोटों में फूट डालने के लिए यह साजिश रची गई है.

सामना में लिखा, ”राज ठाकरे और उनकी 14 साल पुरानी पार्टी ने मराठी के मुद्दे पर पार्टी की स्थापना की. लेकिन अब उनकी पार्टी हिंदुत्ववाद की ओर जाती दिख रही है. इसे रास्ता बदलना कहना ही ठीक होगा.”

बीजेपी पर निशाना साधते हुए सामना में लिखा, ”शिवसेना ने मराठी के मुद्दे पर बहुत काम किया हुआ है. इसलिए मराठियों के बीच जाने के बावजूद उनके हाथ कुछ नहीं लगा और लगने के आसार भी नहीं हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को जैसी चाहिए, वैसी ही ‘हिंदू बांधव, भगिनी, मातांनो…’ आवाज राज ठाकरे दे रहे हैं. यहां भी इनके हाथ कुछ लग पाएगा, इसकी उम्मीद कम ही है.”

‘पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुसलमानों को निकालो’

सामना में लिखा, ‘देश में घुसे पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुसलमानों को निकालो. उन्हें निकालना ही चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं. लेकिन इसके लिए किसी राजनीतिक दल को अपना झंडा बदलना पड़े, ये मजेदार है. दूसरी बात ये कि इसके लिए एक नहीं, दो झंडों की योजना बनाना ये दुविधा या फिसलती गाड़ी के लक्षण हैं.’

‘भगवा रंग कभी नहीं छोड़ा’

हिंदुत्व के विचारों पर सामाना में लिखा, ”शिवसेना ने प्रखर हिंदुत्व के मुद्दे पर देशभर में जागरूकता के साथ बड़ा कार्य किया है. मुख्य बात ये है कि शिवसेना ने हिंदुत्व का भगवा रंग कभी नहीं छोड़ा. यह रंग ऐसा ही रहेगा. इसलिए दो झंडे बनाने के बावजूद राज के झंडे को वैचारिक समर्थन मिल पाएगा.”

‘शिवसेना का एक झंडा एक नेता’

”शिवसेना जैसी पार्टी ‘एक झंडा एक नेता’ के साथ 55 वर्षों से काम कर रही है. यह एक तपस्या और त्याग है. सत्ता के लिए शिवसेना ने रंग बदला है, ये ऐसी बात कहनेवाले लोगों के दिमागी दिवालिएपन की निशानी है. शिवसेना पर रंग बदलने का आरोप लगानेवाले पहले खुद के चेहरे पर लगे मुखौटे और चेहरे पर लगे बहुरंगी मेकअप को जांच लें.”

‘हिंदु वोटों में फूट डालने के लिए साजिश’

महाराष्ट्र में गठबंधन को लेकर सामना में लिखा, ‘भारतीय जनता पार्टी द्वारा 2014 और 2019 में गिरगिट की तरह रंग बदलने के कारण ही शिवसेना भगवा रंग कायम रखते हुए महाविकास आघाड़ी में शामिल हुई और अब शिवसेना कांग्रेस-राष्ट्रवादी के साथ मिलकर सत्ता बनाकर ‘तेवर’ बदलने को तैयार नहीं है.”

”इसका अंदाजा लगते ही हिंदुत्ववादी वोटों में फूट डालने के लिए यह साजिश रची गई है. गत 14 वर्षों में राज ठाकरे ‘मराठी’ के मुद्दे पर कुछ नहीं कर पाए और अब हिंदुत्व के मुद्दे पर भाग्य आजमा पाएंगे क्या? इसमें भी संदेह है.”

‘राज ठाकरे ने विरोध किया था’

राज ठाकरे के सीएए समर्थन पर सवाल खड़ा करते हुए सामाना में लिखा, ‘मनसे’ प्रमुख को अपने मुद्दे रखने और उसे आगे बढ़ाने का पूरा अधिकार है लेकिन उनकी आज की नीति और इसी मुद्दे पर 15 दिन पहले की नीति में कोई मेल नहीं दिख रहा. उन्होंने कल कहा कि नागरिकता कानून को हमारा समर्थन है और कानून के समर्थन के लिए हम मोर्चा निकालने वाले हैं. लेकिन एक महीने पहले उनकी अलग और उल्टी नीति थी.

”श्री राज ठाकरे ने तिलमिलाकर इस कानून का विरोध किया था. उनका कहना था कि आर्थिक मंदी-बेरोजगारी जैसे गंभीर मसलों से देश का ध्यान भटकाने के लिए अमित शाह इस कानून का खेल खेल रहे हैं और इसमें वे सफल होते दिख रहे हैं.”

‘राज ठाकरे शिकार हो गए’

सामना में लिखा, ”एक महीने के भीतर ही राज ठाकरे इस खेल का शिकार हो गए और उन्होंने ‘सीएए’ कानून के समर्थन का नया झंडा कंधे पर रख लिया है. दो झंडे क्यों? इससे ये बात साफ हो जाती है. एनआरसी और सीएए कानून पर देश में कोलाहल मचा है और सरकार को इसका राजनीतिक लाभ उठाना है.”

‘विचार ‘उधार’ के भले हों लेकिन हिंदुत्व के ही हैं’

हिंदुत्व के विचारों को लेकर राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए सामना में लिखा, ”भाजपा के शिवसेना द्वेष की बवासीर दूसरे रास्तों से बाहर निकल रही है और ये उनका पुराना खेल है. बालासाहेब के किसी पुराने भाषण की हू-ब-हू ‘कॉपी’ पढ़ी गई. फिर मंदिर में आरती, मुसलमानों की नमाज और बांग्लादेशियों की हकालपट्टी के मुद्दे भी आए.”

”वीर सावरकर और हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे का हिंदुत्व का मुद्दा लेकर चलना बच्चों का खेल नहीं. फिर भी देश में कोई हिंदुत्व की बात पर अपनी घड़ी फिट कर रहा है तो हमारे पास उनका स्वागत करने की दिलदारी है. विचार ‘उधार’ के भले हों लेकिन हिंदुत्व के ही हैं. हो सके तो आगे बढ़ो!”

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