शातिर पवार ने एक साथ बीजेपी, शिवसेना और कांग्रेस को बनाया बेवकूफ!

तब बीजेपी ने शरद पवार का खुला ऑफर ठुकराकर शिवसेना के साथ सरकार बना ली थी. ये बात बहुत से लोग भूल गए लेकिन शरद पवार को सब याद था. 2019 में बाजी पलट गई. ऑफर वही था, लेकिन ऑफर देने वाला शख्‍स बदल गया था.
Sharad Pawar latest revelations, शातिर पवार ने एक साथ बीजेपी, शिवसेना और कांग्रेस को बनाया बेवकूफ!

मुंबई: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2014 के जब नतीजे आए तो शिवसेना-बीजेपी के बीच टकराव बढ़ गया था. बयानबाजी इस कदर हुई मानो रास्‍ते अलग हो ही जाएंगे. इस माहौल के बीच राजनीति के शातिर खिलाड़ी शरद पवार ने बीजेपी को खुला ऑफर दिया.

ऑफर ये था कि बीजेपी चाहे तो एनसीपी के समर्थन से सरकार बना ले. शरद पवार ने यहां तक दरियादिली दिखाई कि कोई मंत्री पद भी नहीं मांगा. एनसीपी ने कहा, बीजेपी पांच साल सरकार चलाए, हम उसे बाहर से समर्थन देते रहेंगे. तब बीजेपी ने शरद पवार का खुला ऑफर ठुकराकर शिवसेना के साथ सरकार बना ली थी. ये बात बहुत से लोग भूल गए लेकिन शरद पवार को सब याद था. 2019 में बाजी पलट गई. ऑफर वही था, लेकिन ऑफर देने वाला शख्‍स बदल गया था.

शरद पवार ने खुद खुलासा किया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्‍हें साथ काम करने का ऑफर दिया. बकौल शरद पवार पीएम मोदी ने उन्‍हें राष्‍ट्रपति पद, बेटी सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्री पद भी ऑफर किया. शरद पवार ने भी वही किया जो 2014 में बीजेपी ने किया था, ऑफर ठुकरा दिया. मतलब हिसाब बराबर…महाराष्‍ट्र में साल 2019 के सियासी नाटक का ये एक चैप्‍टर था. दूसरा चैप्‍टर बड़ा ही इंट्रेस्टिंग है. इस चैप्‍टर में शरद पवार तो हैं, भतीजे अजित पवार भी हैं, बीजेपी भी है, एनसीपी भी है और कांग्रेस, शिवसेना भी है.

कहानी का शीर्षक कुछ यूं हैं- शरद पवार ने एक साथ पार्टियों को बेवकूफ बनाया. क्‍यों बनाया?, कैसे बनाया? कब बनाया? आइए आपको विस्‍तार से बताते हैं.

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजों में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन को स्‍पष्‍ट बहुमत मिला. शिवसेना को सीएम पद चाहिए था- वो भी 29 साल के आदित्‍य ठाकरे के लिए. शिवसेना ने 50-50 का फॉर्मूला दिया- ढाई साल बीजेपी का सीएम, ढाई साल शिवसेना का सीएम. इसमें भी आदित्‍य ठाकरे को पहले ढाई साल सीएम पद दिया जाए. सियासी लालसा ऐसी बढ़ी कि न शिवसेना पीछे हटी और न ही बीजेपी अपनी  पोजिशन से हिली. नतीजा यह हुआ कि स्‍टोरी में ट्रायंगल आ गया.

बीजेपी-शिवसेना के बीच एनसीपी की एंट्री हो गई. शिवसेना की तरफ से संजय राउत ने कमान संभाली. सबसे पहले वो शरद पवार से मिले. डील की शर्त सिर्फ एक- अगला सीएम शिवसेना का होगा. इसके बाद कांग्रेस ने मंत्री पदों की लंबी लिस्‍ट निकाली, जिसे देखकर शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार दोनों मीटिंग से उठकर चले गए. मीटिंग पर मीटिंग चलती रहीं, सोनिया गांधी से शरद पवार कई बार मिले, पर डील अब भी सील नहीं हो सकी. शिवसेना की बेचैनी बढ़ रही थी, पवार समर्थन देने की बात कर रहे थे, लेकिन बीच-बीच में गुगली भी डाल रहे थे.

कभी हां, कभी ना में फंस गई थी शिवसेना 

एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में उन्‍होंने कहा, ‘सरकार बनाने के लिए हमारी बात सिर्फ कांग्रेस, शिवसेना के साथ चल रही है, बीजेपी से नहीं.’ अगले ही दिन प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में बोले- सरकार बनाने का सवाल बीजेपी-शिवसेना से पूछो. शरद पवार की कभी हां, कभी ना सुनकर संजय राउत को चक्‍कर आ गया. राउत को हारकर कहना पड़ा कि पवार साहेब क्‍या कहते हैं, ये समझने के लिए उन्‍हें 100 बार जन्‍म लेना पड़ेगा. असल में शरद पवार एक ही टाइम पर तीन पार्टियों को बेवकूफ बना रहे थे. उनकी पार्टी जब शिवसेना-कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की बातचीत कर रही थी, ठीक उसी वक्‍त उनके भतीजे अजित पवार बीजेपी के ही संपर्क में थे.

हाल ही में एक इंटरव्‍यू में शरद पवार ने खुद खुलासा किया कि बीजेपी की तरफ से ऐसा सुझाव आया था कि भले ही सरकार न बने, लेकिन बातचीत जरूर होनी चाहिए. शरद पवार ने खुद बताया कि ये बातचीत अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के बीच हो रही थी. मतलब शरद पवार की नजर से कुछ छिपा नहीं था. अजित पवार जो कर रहे थे, उन्‍हें सब पता था.

शरद पवार ने दावा किया कि कांग्रेस बहुत ज्‍यादा डिमांड कर रही थी, इसी बात से अजित पवार नाराज थे. यहीं से वह नाराज हुए और बीजेपी को समर्थन दे दिया. शरद पवार के इन खुलासों के बीच जो ‘बिटवीन द लाइंस’ वाला ‘चैप्‍टर’ वो आपको बताते हैं.

सबसे पहले कांग्रेस को कैसे बेवकूफ बनाया? सोनिया गांधी शिवसेना को समर्थन देने को तैयार नहीं थीं. शरद पवार ने महाराष्‍ट्र की लोकल कांग्रेस लीडरशिप से उन पर दबाव बनवाया. दबाव ये था कि अगर शिवसेना को समर्थन नहीं दिया तो बीजेपी कांग्रेस नेताओं को तोड़ सकती है. इसके बाद सरकार गठन की फाइनल बातचीत में कांग्रेस मंत्रियों की संख्‍या भी कम रखवाई, यहां तक कांग्रेस को मिलने वाले डिप्‍टी सीएम पद भी खुद ही विरोध जता दिया. एक प्रकार से शरद पवार ने 2019 के सियासी नाटक के जरिए बता दिया कि महाराष्‍ट्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बड़े भाई वही हैं.

शिवसेना-बीजेपी को यूं दिया धोखा- सरकार गठन को लेकर बातचीत में शरद पवार ने अपना और भतीजे अजित पवार के हित को सर्वोपरि रखते हुए बीजेपी और शिवसेना के साथ मोल-भाव किया. दोनों दलों को ये डर दिखाया कि एनसीपी शिवसेना-बीजेपी में किसी को समर्थन दे सकती है. मतलब न तो बीजेपी और न ही शिवसेना को श्‍योर था कि एनसीपी किसे समर्थन देगी?

शातिर पवार को शिवसेना के रूप में बेहतर क्‍वालिटी का रिमोट मिल गया 

शिवसेना, कांग्रेस के साथ शरद पवार खुद डील कर रहे थे और बीजेपी के साथ भतीजे को संपर्क में रखा. बीजेपी के साथ डील करने पर महाराष्‍ट्र में एनसीपी को लाभ नहीं होता दिख रहा था, शायद ईडी वाले मामलों में बीजेपी सपोर्ट नहीं कर रही थी, ऐसे में विकल्‍प शिवसेना का ज्‍यादा मुफीद लगा. अब सत्‍ता की चाबी एनसीपी के पास है, अब बीजेपी के नेताओं पर केस लादे जा सकते हैं, भतीजे और खुद को बचाने के लिए ज्‍यादा मोल-भाव करने की ताकत आ जाएगी. उद्धव ठाकरे भी सीएम बनने के लिए बेचैन थे, मतलब शरद पवार को शिवसेना के रूप में ज्‍यादा बेहतर क्‍वालिटी का रिमोट कंट्रोल मिल गया था. देवेंद्र फडणवीस अच्‍छे रिमोट कंट्रोल नहीं थे, इसलिए पेंच फंस गया और शातिर शरद पवार ने शिवसेना की सरकार बनवा दी.

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