महाराष्‍ट्र में कांग्रेस ने चला कर्नाटक वाला दांव तो आदित्‍य ठाकरे बन सकते हैं सीएम

सोनिया गांधी और शरद पवार के बीच यह बातचीत उद्धव ठाकरे के उस बयान के बाद हुई है, जिसमें दूसरे ऑप्‍शन भी खुले रखने की बात कही. मतलब बीजेपी से अलग जाकर विकल्‍प तलाशने की बात.
sonia gandhi called sharad pawar, महाराष्‍ट्र में कांग्रेस ने चला कर्नाटक वाला दांव तो आदित्‍य ठाकरे बन सकते हैं सीएम

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में बीजेपी-शिवसेना को गठबंधन को बहुमत तो मिल गया, लेकिन मुख्‍यमंत्री पद को लेकर दोनों दलों के बीच छिड़ी जंग के चलते सरकार बनाने का रास्‍ता अब तक साफ नहीं हो पाया है. शिवसेना चाहती है कि बीजेपी लिखित में 50-50 फॉर्मूले पर हामी भरे. मतलब ढाई साल राज्‍य में शिवसेना का सीएम होगा और ढाई साल बीजेपी का मुख्‍यमंत्री सरकार चलाएगा. शिवसेना की इस मांग को बीजेपी ने सिरे से खारिज कर दिया है.

बीजेपी-शिवसेना के बीच सीएम पद को लेकर हो रहे इस टकराव के बीच कांग्रेस-एनसीपी में हलचल बेहद तेज हो गई है. खबर है कि कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से फोन पर बात की है. दोनों ने महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने को लेकर बनते दिख रहे सभी विकल्‍पों पर चर्चा की.

सोनिया गांधी और शरद पवार के बीच यह बातचीत उद्धव ठाकरे के उस बयान के बाद हुई है, जिसमें दूसरे ऑप्‍शन भी खुले रखने की बात कही. मतलब बीजेपी से अलग जाकर विकल्‍प तलाशने की बात. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्‍या कांग्रेस महाराष्‍ट्र में कर्नाटक जैसा दांव खेलकर बीजेपी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए आदित्‍य ठाकरे को सीएम बनवा सकती है? हालांकि, विकल्‍प बीजेपी के सामने भी खुले हैं, अब देखना होगा कि सरकार गठन को लेकर चल रही यह कवायद महाराष्‍ट्र की राजनीति को किस दिशा में लेकर जा रही है?

क्‍या कह रही हैं कांग्रेस?

महाराष्‍ट्र में कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण से जब शिवसेना को समर्थन देने के संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्‍होंने बड़ा रोचक जवाब दिया. चव्‍हाण ने कहा, ‘महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी की सरकार बनाने की कवायद चल रही है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि वे जल्द से जल्द सरकार बनाएं. उनको जनादेश मिला है वो सरकार बनाएं. दोनों पार्टियों के जिस तरह स बायन आ रहा है उससे प्रतीत होता है सरकार बनाने में अड़चन है और दोनों में अनबन चल रहा है.’

चव्‍हाण ने आगे कहा, ‘अमित शाह, मुख्यमंत्री फड़नवीस और उद्धव ठाकरे के बीच गठबंधन करते समय जो फॉर्मूला तय हुआ था, तब के और अब के उनके बयानों में अंतर है. दोनों में कोई एक सच बोल रहा है, इसीलिए महाराष्ट्र की जनता भ्रम में है. दोनों एक साथ आकर प्रेस कांफ्रेंस करें और आकर खुलासा करें.’

चव्‍हाण ने यह भी कहा कि शिवसेना ने अभी तक उनसे समर्थन के बारे में संपर्क नहीं किया है और अगर वहां से कोई प्रस्‍ताव आता है तो कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्‍व इस पर विचार करेगा.

क्‍या है आंकड़ों का खेल

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 में बीजेपी 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, कांग्रेस को यहां 80 सीटों पर जीत मिली थी और जेडीएस को 38 सीटों पर जीत मिली थी. कांग्रेस ने बीजेपी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए जेडीएस को समर्थन देकर उसे सीएम पद भी दे दिया था. हालांकि, कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस सरकार कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी और अब यहां बीजेपी की सरकार है. लेकिन कांग्रेस महाराष्‍ट्र में अगर यही दांव चलती है तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
ये है महाराष्‍ट्र का अंक गणित

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, कांग्रेस को 44, एनसीपी को 54, एमएनएस को 01, प्रकाश अंबेडकर वंचित 03 और अन्‍य को 25 सीटों पर जीत मिली. महाराष्‍ट्र में कुल 286 सीटों पर विधानसभा चुनाव हुए थे.

अब जानते हैं कि महाराष्‍ट्र में बहुमत का जादुई आंकड़ा क्‍या है. 286 सीटों के हिसाब से महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने के लिए 144 सीटे चाहिए. इस लिहाज से देखें तो बीजेपी-शिवसेना से बहुत से काफी ज्‍यादा यानी 161 सीटें हैं, लेकिन अगर इन दोनों दलों में सहमति नहीं बनती है और बीजेपी या शिवसेना अलग-अलग जाकर सरकार बनाने के प्रयास करती हैं तो क्‍या-क्‍या विकल्‍प हैं.

शिवसेना के लिए क्‍या हैं विकल्‍प?

उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास 56 सीटें हैं. अगर वह बीजेपी से अलग जाकर सरकार बनाना चाहे और कांग्रेस-एनसीपी उसे समर्थन दे दें तो आंकड़ा बहुमत की जादुई संख्‍या के पार चला जाता है. 56+44+54=154. अगर कांग्रेस बीजेपी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए शिवसेना पर दांव खेलना चाहेगी तो ठाकरे परिवार से पहली बार चुनाव लड़ने वाले आदित्‍य ठाकरे के सीएम बनने की राह साफ हो जाएगी.

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