SC ने पूछा, आप किस तरफ से हैं राज्यपाल या? रोहतगी बोले मुझे नहीं पता किस तरफ से पेश होना चाहिए

मनु सिंघवी ने कहा- किस आधार पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई?
maharashtra government formation supreme court, SC ने पूछा, आप किस तरफ से हैं राज्यपाल या? रोहतगी बोले मुझे नहीं पता किस तरफ से पेश होना चाहिए

महाराष्ट्र में शनिवार सुबह अचानक बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को शपथ दिलाए जाने के खिलाफ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी शिवसेना का पक्ष रख रहे थे और कपिल सिब्बल कांग्रेस का जबकि मुकुल रोहतगी सॉलिसिटर जनरल के तौर पर SC पहुंचे थे.

कोर्ट ने मुकुल रोहतगी से पूछा कि आप किनकी तरफ से पक्ष रख रहे हैं.? राज्पाल? या कोई और…

इसके जवाब में मुकुल रोहतगी ने कहा मैं सॉलिसिटर जनरल के रूप में पेश हुआ हूं. मुझे नहीं पता कि किसके लिए पेश होना चाहिए.

हालाकि बाद मैं मुकुल रोहतगी ने कहा कि मैं बीजेपी विधायकों की तरफ से हूं.

सुनवाई के आखिर में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं केन्द्र सरकार की तरफ से पेश हो रहा हूं. जिसके बाद SC ने तुषार मेहता से राज्यपाल को विधायकों को समर्थन वाले सौंपे गए पत्र को कोर्ट में दिखाने को कहा है. अब इस मामले में सोमवार सुबह 10:30 पर आगे की सुनवाई होगी.

पढ़ें-SC में सुनवाई की मुख्य बातें

कोर्ट ने पूछा- बीजेपी के तरफ से कब बताया गया कि उनके पास पर्याप्त समर्थन है.

सिब्बल- किसी को कुछ नहीं पता, नहीं बताया गया. राज्यपाल ने कब निमंत्रण मिला, यह पता नहीं.

सिब्बल- कपिल सिब्बल ने 2018 के कर्नाटक विधानसभा के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का रेफरेंस दिया.

कोर्ट ने पूछा कि तुषार मेहता आप किसकी तरफ से हैं? गवर्नर की तरफ से?

तुषार मेहता- मैं सॉलिसिटर जनरल के रूप में पेश हुआ हूं. मुझे नहीं पता कि किसके लिए पेश होना चाहिए. मुकुल रोहतगी ने कहा कि मैं बीजेपी विधायकों की तरफ से हूं.

मुकुल रोहतगी ने रविवार को सुनवाई का विरोध किया.

सिब्बल- महाराष्ट्र के लोगों को सरकार की जरूरत है. ये लोग बीजेपी नहीं चाहते कि फ्लोर टेस्ट जल्दी हो. अगर इनके पास बहुमत है तो साबित करें.

कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखना शुरू किया.

मनु सिंघवी- किस आधार पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई?

सिंघवी- जब शनिवार 3.30 बजे अजित पवार को हटा दिया गया तो क्या ये लोकतंत्र की हत्या नहीं है?

सिंघवी- एनसीपी ने कल बैठक की जिसमें 41 व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षर कर अजीत पवार को हटा दिया गया.

सिंघवी ने कोर्ट में 1998 में यूपी के मामले में, 2018 में कर्नाटक मामले का उदाहरण दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था.

सिंघवी- लोकतंत्र संख्या और बहुमत के दम पर चलता है लेकिन यहां राज्यपाल ने बिना किसी बहुमत और समर्थन पत्र के शपथ दिलाई. कल जिसने शपथ ली आज बहुमत साबित करने से मना कर रहा है.

कोर्ट ने कहा कि मिस्टर रोहतगी, कोर्ट पहले ही इस मुद्दे सेटल कर चुके हैं. राज्यपाल किसी को भी मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं दिला सकते हैं.. जब तक बहुमत का आंकड़ा साफ न हो. हाउस कोर्ट का सम्मान करता है, कोर्ट को भी हाउस का सम्मान करना चाहिए.

रोहतगी ने तत्काल फ्लोर टेस्ट की मांग का विरोध किया, रोहतगी ने कहा कि कम-से-कम 2 से 3 दिन का समय दिया जाना चाहिए, समर्थन जुटाने में समय लगता है.

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