क्या उदयनराजे भोसले का पार्टी में शामिल होना, बीजेपी का है मास्टर स्ट्रोक?

शिवाजी और मराठा मानुष, इन दो मुद्दों की वजह से ही शिवसेना महाराष्ट्र में बीजेपी से अलग है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से देखा जाए तो बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) सभी राज्यों में अपने वोट प्रतिशत में इज़ाफ़ा कर रही है. इतना ही नहीं बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने समाज के सभी वर्ग के लोगों को पार्टी से सीधे जोड़ने का काम किया है. शायद यही वजह है कि उत्तर भारत के सभी राज्यों में बीजेपी ने क्षेत्रीय दलों के वोट बैंक में सेंध लगाई है.

इसी क्रम में शनिवार को छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और महाराष्ट्र के सातारा से NCP सांसद उदयनराजे भोसले ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. ज़ाहिर है महाराष्ट्र में इसी साल चुनाव होने वाला है. ऐसे में बीजेपी के नज़रिए से उदयनराजे भोसले का पार्टी में शामिल होने का फैसला फलदायक हो सकता है.

बता दें कि उदयनराजे भोसले का मराठा समुदाय में काफ़ी लोकप्रियता है और राजनीतिक पकड़ भी है. उदयनराजे का राजनीतिक सफर उतार चढ़ाव वाला रहा है. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी लेकिन आगे चलकर उन्होंने बीजेपी ज्वाइन किया, फिर कांग्रेस और हाल फ़िलहाल तक राष्ट्रवादी कांग्रेस में रहे, अब वो फिर से बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं.

उदयनराज के बार में एक क़िस्सा बहुत मशहूर है. एक बार वो रात में सतारा की सड़कों पर चक्कर लगा रहे थे. जब वो बस स्टैंड पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहां पर कई रिक्शेवाले खड़े थे. उन्होंने पूछा कि पूरी रात में कितना कमा लेते हो? रिक्शेवाले ने जवाब में कहा 500 रुपये. जिसके बाद उन्होंने सारे रिक्शेवालों को 500-500 के नोट थमाए और कहा- घर जाकर आराम करो.

उदयनराज, इन्हीं ख़ासयितों की वजह से लोगों के बीच में काफी प्रिय हैं. बीबीसी से बात करते हुए पकत्रकार विजय चोरमारे ने कहा, ‘उदयनराजे की मराठा समाज में काफ़ी लोकप्रियता है. वो अगर बीजेपी में शामिल होते हैं तो मराठा वोटरों को आकर्षित किया जा सकता है ऐसा मुख्यमंत्री फड़नवीस को भी लगता है.’

ज़ाहिर है बीजेपी में रहते हुए उदयनराज के मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ रिश्ते अच्छे रहे हैं और वो भी उन्हें बीजेपी में शामिल कराना चाहते थे.

विजय चोरमारे कहते हैं, “उदयनराजे को छत्रपति शिवाजी महाराज की 13वीं पीढ़ी का वंशज माना जाता है और उदयनराजे को इसका गर्व है. इसलिए भी लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता है. उनके समर्थक चाहते हैं कि वो दिल्ली जाकर केंद्रीय राजनीति में अपना नाम कमाएं. लेकिन उदयन को सतारा के बाहर की राजनीति में कोई भी दिलचस्पी नहीं है. बीजेपी में उनके जाने एक कारण ये भी है कि उनके ख़िलाफ़ काफ़ी मुक़दमे दर्ज हैं और अगर वो सत्ता के ख़िलाफ़ रहे तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. हालांकि वो बीजेपी में भी कितने दिन रहेंगे ये कहा नहीं जा सकता.”

उदयनराजे भोसले के बीजेपी में शामिल होने के और भी कई मायने हैं. एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की सहयोगी शिवसेना महाराष्ट्र में ख़ुद को बड़े भाई की भूमिका में देखती है. ये वही शिवसेना है जो शिवाजी और मराठा मानुष पर अपना कॉपीराइट बताती है.

आपको याद होगा जनवरी 2019 में जब शिवाजी स्मारक के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदी लगा दी थी तो शिवसेना राज्य की बीजेपी सरकार पर ही निशाना साधने लगी थी. जबकि वो ख़ुद भी सरकार में शामिल है.

पार्टी ने कहा है, ‘कुछ लोग पूछते हैं छत्रपति शिवाजी और बालासाहेब ठाकरे के स्मारक का क्या इस्तेमाल है? छत्रपति शिवाजी महाराज नहीं होते तो पाकिस्तान की सीमा तुम्हारी दहलीज तक आ गई होती और बाला साहेब ठाकरे नहीं होते तो हिंदुओं को भी नमाज पढ़नी पड़ती.’

पार्टी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर शिवाजी स्मारक का निर्माण रोक दिया है. यह बार-बार हो रहा है जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सरकार स्मारक बनाने को लेकर गंभीर है.

ज़ाहिर है शिवसेना छत्रपति शिवाजी मुद्दे को लेकर अपनी सहयोगी दलों को भी बख़्शने के मूड में नहीं रही है क्योंकि वो इस मुद्दे पर अपना कॉपीराइट खोना नहीं चाहती. शिवाजी और मराठा मानुष, इन दो मुद्दों की वजह से ही शिवसेना महाराष्ट्र में बीजेपी से अलग है. ऐसे में शिवाजी के वंशज उदयनराजे भोसले का बीजेपी में शामिल होना शिवसेना के लिए ज़्यादा नुकसानदायक है. क्योंकि शिवसेना को अब अपने वोट बैंक छिटकने का डर सता रहा है.