क्‍या है 25 हजार करोड़ का महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला? मंत्रियों-अफसरों से लेकर पूर्व सीएम तक फंसे

FIR के मुताबिक, 1 जनवरी, 2007 से 31 दिसंबर, 2017 के बीच MSCB घोटाले से सरकारी खजाने को 25,000 करोड़ रुपये की चपत लगी.
महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला, क्‍या है 25 हजार करोड़ का महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला? मंत्रियों-अफसरों से लेकर पूर्व सीएम तक फंसे

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है. महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में ED ने केस दर्ज किया है. पूर्व मुख्‍यमंत्री और नेशनलिस्‍ट कांग्रेस पार्टी (NCP) अध्‍यक्ष शरद पवार, उनके भतीजे और पूर्व डिप्‍टी सीएम अजित पवार समेत कई नेताओं और अधिकारियों पर FIR हुई है.

ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट (PMLA) के तहत यह केस दर्ज किया है. अधिकारियों के मुताबिक, महाराष्‍ट्र स्‍टेट कोऑपरेटिव बैंक (MSCB) घोटाला करीब 25,000 करोड़ रुपये की बंदरबांट का है.

क्‍या है महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला?

नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्‍चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) की ऑडिट रिपोर्ट में कई नियमों को तोड़ने-मरोड़ने का खुलासा हुआ था. NABARD के मुताबिक, सुगर फैक्ट्रियों और स्पिनिंग मिल्‍स को कर्ज बांटने में आरोपियों ने बैंकिंग नियमों और रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस को ताक पर रख दिया.

खराब रिकॉर्ड के बावजूद फैक्ट्रियों को कर्ज दिए गए. कई मामलों में तो कोई गारंटी तक नहीं ली गई. बिना किसी आधार के फैक्ट्रियों को अतिरिक्‍त सुविधाएं भी मुहैया कराई गईं. लोन की रिकवरी में लापरवाही बरती गई और री-पेमेंट पर ध्‍यान नहीं दिया गया. नतीजा ये हुआ कि ब‍हुत सी को-ऑपरेटिव सुगर फैक्ट्रियों की माली हालत बिगड़ने लगी.

महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में महाराष्‍ट्र को-ऑपरेटिव सोसायटीज (MCS) एक्‍ट के तहत एक जुडिशियल इंक्‍वायरी कमीशन भी ग‍ठित किया गया था. इसने अपनी चार्जशीट में अजित पवार और अन्‍य आरोपियों को नुकसान के लिए जिम्‍मेदार ठहराया था.

RBI ने 2011 में MSCB बोर्ड को नजरअंदाज करते हुए इसके कामकाज को देखने के लिए एडमिनिस्‍ट्रेटर तैनात कर दिया था. हाई कोर्ट ने NABARD की इंस्‍पेक्‍शन रिपोर्ट, एक्टिविस्‍ट की शिकायत, MCS एक्‍ट के तहत दाखिल चार्जशीट के आधार पर कहा था कि मामले में आरोपियों के खिलाफ ‘सबूत’ हैं.

2015 में एक्टिविस्‍ट सुरिंदर अरोड़ा ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में MSCB में महाराष्‍ट्र को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला की शिकायत की थी. अरोड़ा ने हाई कोर्ट में भी याचिका लगाई कि मामले में FIR दर्ज हो.

पुलिस की FIR के मुताबिक, महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला से 1 जनवरी, 2007 से 31 दिसंबर, 2017 के बीच MSCB घोटाले से सरकारी खजाने को 25,000 करोड़ रुपये की चपत लगी.

कौन-कौन है महाराष्‍ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में आरोपी?

पुलिस की FIR के मुताबिक, तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्रियों, उप-मुख्‍यमंत्रियों, मंत्रियों, नेताओं, सरकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. इसके अलावा, MSCB, डिस्ट्रिक्‍ट सेंट्रल बैंक के तत्‍कालीन निदेशकों और वरिष्‍ठ अधिकारियों, पेन को-ऑपरेटिव बैंक के निदेशकों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है.

ED ने मुंबई पुलिस की FIR के आधार पर मामला बनाया है. इस FIR में बैंकों के तत्‍कालीन निदेशकों, पूर्व डिप्‍टी सीएम अजित पवार और को-ऑपरेटिव बैंक के 70 पूर्व अधिकारियों के नाम हैं. महाराष्‍ट्र के पूर्व सीएम और NCP प्रमुख शरद पवार का नाम भी ED ने अपनी FIR में जोड़ा है.

दिलीपराव देशमुख, ईशरलाल जैन, शिवाजी राव, जयंत पाटिल, आनंद राव अद्सुल, मदन पाटिल और राजेंद्र शिंगाने समेत कई मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों का नाम भी ED की FIR में है. इन सभी पर IPC की धारा 420, 409, 406, 465, 467 और 120 B लगाई गई है.

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