CMO से सीधे जेल में किसके फोन जाते थे? ‘सामना’ में शिवसेना ने BJP पर लगाए आरोप

शिवसेना का कहना है कि जब आज इंदिरा गांधी नहीं हैं तो उनकी छवि को पिछले पांच सालों में कई बार खराब करने का प्रयास किया गया है.

मुंबई का नामी गैंगस्टर करीम लाला और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मुलाकात का जिक्र करने के बाद शिवसेना नेता संंजय राउत को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने घेरने की कोशिश की. अब इस मामले को लेकर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक बार फिर से बीजेपी पर निशाना साधा है. अपने मुखपत्र में शिवसेना ने इंदिरा गांधी की काफी तारीफ भी की है.

शिवसेना ने लिखा, “हम अक्सर कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं को समुपदेशन की आवश्यकता है. इसका उदाहरण वे अपने कृत्यों से रोज दे रहे हैं. मूल भाजपा एक तरफ, लेकिन भाजपा में घुसे छंटे हुए ‘परिवर्तित’ लोगों ने मुंह उठाकर ‘बांग’ देनी शुरू की है. ये अच्छी मानसिकता के लक्षण नहीं हैं. हम समझ सकते हैं कि सत्ता हाथ से निकल जाने के कारण अनिद्रा के रोग ने उन्हें जकड़ा हुआ है. लेकिन इस अनिद्रा से उन्हें झटके लगते रहते हैं. इससे महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा में दरार पड़ रही है.”

कभी नहीं रहा गैर-जिम्मेदार विरोधी दल 

“महाराष्ट्र के इतिहास में इतना गैर-जिम्मेदार विरोधी दल कभी नहीं रहा होगा. लेकिन जैसे पहले अक्ल मारी जाती है, फिर रहा-सहा भी सब खत्म हो जाता है, ये मामला कुछ ऐसा ही है. सुविधानुसार टोपियां पहनने और बदलने का धंधा शुरू है.”

“प्रधानमंत्री मोदी के विशाल व्यक्तित्व को ‘पेड़ेवाले’ जैसी ओछी उपमा देकर उनकी हंसी उड़ानेवालों के साथ पूरी भाजपा खड़ी है. मोदी की तुलना सतारा के पेड़ेवालों से करने की बात भाजपा नेतृत्व को बिना शर्त स्वीकार होगी तो सवाल ही खत्म. लेकिन राज्य का भाजपा नेतृत्व इसे एक बार साफ कर दे तो ठीक है.”

“छत्रपति शिवाजी महाराज की लड़ाई सिर्फ स्वराज्य के लिए थी, खुद के लिए नहीं थी. इसे समझ लेना चाहिए. सैनिकों को शिवराय ने स्वराज्य का उद्देश्य दिया था. जुल्म के खिलाफ लड़ाई के लिए साथ दिया था. शिवराय का नाम लेकर सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध करनेवालों को ये बात समझ लेनी चाहिए. उनसे सिर्फ इतना ही कहना है कि शिवराय को समझ लें. भाजपा को आज ‘मोदी पेड़ेवाले’ प्रिय हैं. हम उनका स्वागत करते हैं. लेकिन इंदिरा गांधी भी प्रिय हो गईं, इसकी हमें सबसे ज्यादा खुशी है.”

इंदिरा गांधी का व्यक्तित्व खराब करने की कोशिश

“इंदिरा जी का व्यक्तित्व महान था. उसे खराब करने का प्रयास पिछली सरकार की ओर से किया गया. अब भाजपा को लगता है कि इंदिरा गांधी का अपमान हुआ है. उन्हें ऐसा ‘प्रतीत’ होना ही इंदिरा जी का सम्मान है.

हमने करीम लाला और इंदिरा गांधी की एक पुरानी मुलाकात का उल्लेख किया. इसलिए भाजपा की उथली यंग ब्रिगेड की ओर से पूछा जा रहा है कि कांग्रेस इसका खुलासा करे. भाजपा के पास कोई विशेष काम न होने के कारण वे अब कई विषयों का उत्खनन करने लगे हैं.”

करीम लाला ने पठानों की समस्याओं को दूर किया

“राजनीति में कौन कब किससे मिलेगा और मिलने की परिस्थिति बन जाएगी, ये नहीं कहा जा सकता. ऐसा नहीं होता तो देशद्रोह और अलगाववाद के आरोपों से घिरीं महबूबा मुफ्ती से ‘गुफ्तगू’ करके श्री मोदी या शाह पर सरकार बनाने की नौबत न आती. साठ के दशक में करीम लाला मुंबई में रहकर दुनिया भर के पठानों की समस्याओं को दूर करने के लिए एक संगठन चला रहे थे और खान अब्दुल गफ्फार खान उर्फ सरहद गांधी उनके आदर्श थे.”

“आजादी की लड़ाई के अलावा पाकिस्तान की प्रमुख दुआ के रूप में सरहद गांधी का महत्व था. उनका ‘खुदाई खिदमतगार’ नामक संगठन था और करीम लाला जैसे युवक उस संगठन से जुड़े थे. खान अब्दुल गफ्फार खान का स्पष्ट रूप से मानना था कि धार्मिक आधार पर देश का विभाजन न हो. उन्हें खेद था कि पाकिस्तानी हुकूमत में पठान समुदाय अच्छी जिंदगी नहीं जी पाएगा और इससे पठान समुदाय के कई युवा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और कुछ हिंदुस्थान में आकर जीवनयापन कर रहे थे. इन्हीं में से एक थे करीम लाला. ये जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध है.”

“उस दौरान करीम लाला मुंबई में रहते हुए खान अब्दुल गफ्फार खान का काम कर रहे थे. मुसाफिरखाना में करीम लाला का कार्यालय था और वहां करीम लाला ने दुनियाभर के नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें लगाई थीं. आज वो कार्यालय उनका दीवानखाना अस्तित्व में नहीं है. वहां की तस्वीरें अगर भाजपा नेताओं ने देखी होतीं तो आज इंदिरा गांधी के बारे में आक्षेप नहीं करते और उनकी आंखें ही निकलकर बाहर आ गई होतीं.”

राजनीतिक पार्टियों के करीम लाला से करीबी संबंध

“सभी पार्टियों के लोगों से करीम लाला के करीबी संबंध थे और वो मुंबई में अंडरवर्ल्ड शुरू होने का दौर था. हालांकि ये सबकुछ गत कुछ सालों से राजनीति में शुरू है और वाल्या से वाल्मीकि बनानेवाली ‘वाशिंग मशीन’ राजनीति में कौन लाया और ऐसे वाल्मीकियों के लिए किसने पालथी मारी, इसका खुलासा हम करें क्या? ये पब्लिक है! सब कुछ जानती है! प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने किससे मुलाकात की, ये विवाद का विषय हो ही नहीं सकता. प्रधानमंत्री होने के कारण कई बार अलगाववादियों से चर्चा करनी पड़ती है और ऐसी चर्चा हाल के दिनों में कई बार हो चुकी है.”

CMO से सीधे जेल में किसके फोन जाते थे?

“पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे जेल में किसके फोन जाते थे? क्यों? किसलिए? इस पर कई बार विस्फोट हो चुके हैं. कोल्हापुर में उम्रकैद की सजा काटनेवालों को चुनाव लड़ने के लिए रसद भेजनेवाले कौन थे और ऐसे कई आधुनिक वाल्मीकियों को पुलिस सुरक्षा कैसे मिल रही थी? अगर इसका खुलासा हुआ तो कई लोगों के मुंह हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे.”

“आज इंदिरा गांधी नहीं हैं लेकिन गत 5 वर्षों में उनकी प्रतिमा को बार-बार मलिन करने का प्रयास किया गया. इंदिरा जी शक्तिशाली नेता थीं. उन्होंने पाकिस्तान के टुकड़े करके विभाजन का बदला लिया. जो लोग इंदिरा जी की स्मृतियों को हमेशा के लिए मिटाना चाहते हैं, उन्हें इंदिरा जी के व्यक्तित्व की चिंता होना आश्चर्यजनक है. शिवसेना ने इंदिरा जी के महान व्यक्तित्व का उनके पुरुषार्थ के कारण सदैव आदर किया.”

“जब-जब इंदिरा गांधी की प्रतिमा को मलिन करने का प्रयास किया गया तब-तब शिवसेना ढाल बनकर खड़ी रही. शिवसेना ने अपनी सुविधा के लिए न छत्रपति शिवराय का उपयोग किया और न ही इंदिरा गांधी का. फिलहाल इतना ही!”

 

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