गडकरी के शहर में सरकारी अस्पतालों की ऐसी दुर्दशा, महिला को खुद करनी पड़ी अपनी डिलीवरी

एक ओर जहां मातृ मृत्यु की रोकथाम के लिए सरकार लगातार अनेकों उपाय करती है, सरकार इस पर करोड़ो रुपए खर्च कर रही है लेकिन सरकारी अस्पताल के स्त्री रोग व प्रसूति विभाग की ये कहानी कुछ और ही बयां कर रही है.
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नागपुर: सरकारी अस्पताल की एक घटना आजाद भारत और यहां की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है. इस अस्पताल में मौजूद एक महिला कोअपनी डिलीवरी करनी पड़ी, बच्चे को खुद बाहर निकाला. इसके बाद अस्पताल स्टाफ नहीं पसीजा, महिला और नवजात को नीचे फर्श पर सुलाया गया.

23 वर्षीय इस महिला का नाम सुकेशनी चतारे है, जिसकी डिलीवरी के दौरान अस्पताल प्रबंधन की ये लापरवाही सामने आई. बता दें कि ये मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्र में नंबर 3 या 4 की हैसियत रखने वाले नितिन गडकरी का शहर है.

हुआ यूं कि एक महिला इस अस्पताल के प्रसूति कक्ष में अकेली पड़ी थी, प्रसव का दर्द ऐसा कि उसके चिल्लाने और दर्द में जोर-जोर से कराहने की आवाज सुन दूसरी महिला भी सिहर जाए. ऐसी ही एक महिला जो खुद मरीज थी, तड़प की आवाज सुन पीड़ित महिला के रूम में दाखिल हुई और जो उसने देखा उसके होश फाख्ता हो गए. जब उसने देखा की महिला शिशु को जन्म दे रही है, महिला का शिशु आधा बाहर निकला है और आधा अंदर.

ये देख वो महिला घबरा गयी कि महिला प्रसूता अपने हाथ से ही शिशु को बाहर खींच कर निकाल रही है और आखिर में महिला ने पूरा जोर लगाकर शिशु को बाहर निकाल लिया. इस दौरान उसके हाथ की सलाइन निकल गई और सलाइन की जगह से खून बहने लगा और खून पूरे फर्श में फैल गया.

इसी बीच प्रसूता महिला ने कंपकपाते हाथों से अपनी मां को फोन किया और वार्ड के किसी किनारे में बैठी मां दौड़कर आई और उसने भी शोर मचाना शुरू कर दिया. इस शोर को सुनकर नर्स अंदर पहुंची और उसने नाड़ा काटकर प्रसूता को नवजात शिशु के साथ फर्श पर ही सुला दिया.

सुकेशनी की मां ने अपने पास की चादर नीचे बिछाई अपने नवजात शिशु को लेकर प्रसूता सुबह 10:00 बजे तक यूं ही एक किनारे पड़ी रही.

बता दें कि ये अस्पताल एशिया खंड में दूसरे नंबर पर आता है लेकिन ये वाकया हर किसी को दहलता है. प्रसूति की अवधि नजदीक होने के साथ ही सुकेशनी शनिवार 1 जून को अस्पताल के वार्ड नंबर 33 में भर्ती हो गई. शुरुआत में उसे जमीन पर सोने के लिए कह दिया गया, इसकी शिकायत जब विभाग प्रमुख डॉक्टर से की गयी तब पलंग तो मिला लेकिन ना गद्दा मिला ,ना चादर मिली, और ना ही तकिया.

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