Coronavirus: यहां बना अनोखा नियम, रक्षाबंधन पर बेटियों के आने पर रोक-बहुएं भी नहीं जाएंगी मायके

छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले (Balod District) के एक छोटे से गांव भोथीपार के ग्रामीणों ने कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने और कोरोना (Corona) से बचाव के लिए गांव की बेटियों को अपने मायके गांव में आने और बहुओं को उनके मायके जाने पर पाबंदी लगाई है. 
In this Village ban on daughters to Come home on Rakshabandhan, Coronavirus: यहां बना अनोखा नियम, रक्षाबंधन पर बेटियों के आने पर रोक-बहुएं भी नहीं जाएंगी मायके

कोरोना (Corona) महामारी ने हर त्योहार का रंग फीका कर दिया है, किसी भी त्योहार में ना उल्लास नज़र आ रहा है और ना ही लोगो में हर्ष है. इसकी बड़ी वजह बढ़ते कोरोनावायरस (Coronavirus) के आंकड़े है. कोरोना संक्रमण (Corona) से बचाव व इसकी चेन तोड़ने के लिए हर वर्ग नियमों का पालन कर रहा है, वहीं लोगों ने त्योहारों को मनाने का भी तौर तरीका बदला है.

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ऐसी ही एक अनूठी पहल छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के गांव भोथीपार के ग्रामीणों ने पेश की है, जिसकी तारीफ़ जिले भर में हो रही है.

दरअसल छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले (Balod District) के एक छोटे से गांव भोथीपार के ग्रामीणों ने कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने और कोरोना (Corona) से बचाव के लिए गांव की बेटियों को अपने मायके गांव में आने और बहुओं को उनके मायके जाने पर पाबंदी लगाई गई है.

इसके साथ ही नियमों का उलंघन करने पर 251 रुपये दंड का भी प्रावधान किया गया है. ग्रामीणों ने कोरोना काल को देखते हुए सामूहिक रूप से बैठक लेकर यह निर्णय लिया है. महिलाओं ने भी कोरोना संकट को देखते हुए ग्रामीणों की बातों को स्वीकार कर इस बार ससुराल में ही तीज त्योहार मनाने का निर्णय लिया है.

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