धरती चपटी है, ये साबित करने के लिए बनाया रॉकेट, उड़ान भरते ही हुआ क्रैश, वैज्ञानिक की मौत

धरती चपटी है, इसका सबूत खोजने के लिए माइक हग्स ने खुद एक रॉकेट बनाया था. 64 साल के माइक का अपने दावे पर इतना भरोसा था कि लोग उन्हें पागल कहने लगे थे. अपने रॉकेट से उन्होंने उड़ान भरी थी और स्पेस पहुंचने से पहले ही वह क्रैश हो गया.
Mike Hughes Killed In Crash, धरती चपटी है, ये साबित करने के लिए बनाया रॉकेट, उड़ान भरते ही हुआ क्रैश, वैज्ञानिक की मौत

आपने स्कूल के समय विज्ञान की किताबों में सौरमंडल की तमाम जानकारी के साथ यह भी पढ़ा होगा कि धरती गोल है. लेकिन ऐसा सब लोग नहीं मानते, धरती को रोटी जैसी चपटी मानने वालों की भी अच्छी खासी संख्या है. अमेरिका में रहने वाले माइक हग्स (Mike Hughes) ऐसे ही शख्स थे. ‘थे’ इसलिए क्योंकि धरती को चपटी साबित करने की कोशिश में इनका रॉकेट क्रैश हो गया. हादसे में इनकी मौत हो गई.

धरती चपटी है, इसका सबूत खोजने के लिए माइक हग्स ने खुद एक रॉकेट बनाया था. 64 साल के माइक का अपने दावे पर इतना भरोसा था कि लोग उन्हें पागल कहने लगे थे. अपने रॉकेट से उन्होंने उड़ान भरी थी और स्पेस पहुंचने से पहले ही वह क्रैश हो गया. कैलिफोर्निया के बार्स्टोव में लोगों ने यह ब्लास्ट होते देखा था. ब्लास्ट के बाद माइक का पैराशूट तो मिल गया लेकिन उनकी बॉडी नहीं मिली थी.

वाल्डो स्टेक्स (Waldo Stakes) नाम के शख्स शनिवार को रॉकेट लॉन्च के समय मौके पर मौजूद थे. उन्होंने माइक की मौत की पुष्टि की. साइंस चैनल ने खबर ट्वीट करते हुए लिखा ‘दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि माइकल हग्स रॉकेट लॉन्च करने के दौरान दुनिया को अलविदा कह गए. उनका हमेशा से सपना था कि वे अपना रॉकेट लॉन्च करें और साइंस चैनल पर उसे टेलिकॉस्ट करें.’

स्टेक्स ने बताया कि उनकी टीम ने यह रॉकेट बनाने के लिए 18 हजार डॉलर खर्च किए थे. 24 मार्च 2018 को पहला रॉकेट लॉन्च किया गया था जो 1,875 फिट की ऊंचाई तक गया था.

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