अश्वेतों के मुकाबले गोरे लोगों को आसानी से फ्री यात्रा करने देते हैं बस ड्राइवर, क्वींसलैंड की स्टडी में दावा

अध्ययन में ये बात सामने आई कि बस चालक भी रंग के आधार पर भेदभाव (Racial Discrimination) करते हैं. जहां ड्राइवरों ने 72 प्रतिशत गोरे यात्रियों को मुफ्त में यात्रा करने दिया, वहीं 36 प्रतिशत अश्वेत लोगों को ही फ्री यात्रा की सुविधा मिली.
bus drivers let white customers ride for free, अश्वेतों के मुकाबले गोरे लोगों को आसानी से फ्री यात्रा करने देते हैं बस ड्राइवर, क्वींसलैंड की स्टडी में दावा

अश्वेत लोगों की तुलना में गोरे लोगों को आसानी से बस ड्राइवर फ्री यात्रा करने देते हैं,एक स्टडी रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है. यह स्टडी रिपोर्ट द इकोनॉमिक जर्नल (The Economic Journal) में प्रकाशित हुई थी. इस स्टडी के लिए रिसर्चर ने कुछ लोगों को बस यात्रा के दौरान जीरो बैलेंस वाला ट्रेवल कार्ड लेकर यात्रा करने को कहा.

जिसके बाद उनसे कहा गया कि वो बस चालक से उन्हें मुफ्त में यात्रा करने देने की विनती करें. सार्वजनिक बस परिवहन के अधिकारिक नियमों के अनुसार, किसी भी यात्री को बिना टिकट लिए या सर्विस चार्ज दिए बिना यात्रा करने नहीं दिया जाता है. इसके विपरीत लगभग दो-तिहाई बस चालकों ने यात्रियों को ऐसा करने की इज़ाज़त दी, खासकर गोरे यात्रियों को आसानी से फ्री यात्रा करने दी गई.

एशियाई और भारतीय लोगों को भी मिले ज्यादा मौके

ऑस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैंड में किये गए इस अध्ययन में ये बात सामने आयी कि बस चालक भी रंग के आधार पर भेदभाव करते हैं. जहां ड्राइवरों ने 72 प्रतिशत गोरे यात्रियों को मुफ्त में यात्रा करने दिया, वहीं 36 प्रतिशत अश्वेत लोगों को ही फ्री यात्रा की सुविधा मिली.

51 प्रतिशत भारतीयों को बस चालकों ने मुफ्त में यात्रा करने दिया, तो वहीं 73 प्रतिशत एशियाई लोग बस में बिना टिकट ट्रैवेल कर सके. हैरानी की बात तो यह रही की रंग के आधार पर यात्रियों को मुफ्त में यात्रा करने देने का यह फैसला बस चालकों ने महज कुछ सेकंड्स में ही ले लिया.

 

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