दुनिया का पहला हैंड ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर खुद हैरान, ‘कैसे बदल रहा है हाथों का रंग’?

पुणे की 21 साल की लड़की के हैंड ट्रांसप्लांट करने के बाद आखिर क्यों बदलने लगा हाथों का रंग, जानने के लिए डॉक्टरों ने शुरू की रिसर्च.
Pune girl hand transplant, दुनिया का पहला हैंड ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर खुद हैरान, ‘कैसे बदल रहा है हाथों का रंग’?

अभी तक आपने हार्ट, किडनी या लीवर ट्रांसप्लांट के बारे में सुना होगा, लेकिन भारत के डॉक्टर  एक ऐसा कारनामा कर चुके हैं जिसने सभी के होश उड़ा दिए थे.

दरअसल 2018 में डॉक्टरों ने एक्सीडेंट में अपने दोनों हाथ खो चुकी श्रेया के फिर से दोनों हाथ जोड़ दिए थे. ये हाथ 20 साल के युवक के थे, जिसने एक एक्सीडेंट में अपनी जान गवां दी थी. अब जो बात डॉक्टरों को हैरान कर रही है वो ये कि श्रेया के हाथों का रंग और शेप बदलने लगा है.

श्रेया के मुताबिक मुझे नहीं पता कि ये बदलाव कैसे हुआ, लेकिन अब ये मेरे अपने हाथों की तरह लगते है. ट्रांसप्लांट के बाद स्किन का रंग बहुत गहरा था, ऐसा नहीं कि ये कभी मेरे लिए चिंता की बात रही थी, लेकिन अब ये मेरी स्किन टोन के साथ मेल खाता है.

अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIMS) में हुए हैंड ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर्स इस बात की रिसर्च कर रहे हैं कि क्या महिलाओं के हार्मोन ऐसे बदलावों को पकड़ सकती हैं. AIMS में प्लास्टिक और पुनर्निर्माण सर्जरी के प्रमुख डॉ सुब्रमण्य अय्यर के मुताबिक हम हैंड ट्रांसप्लांट के दो मामलों पर रिसर्च कर रहे हैं. इसमें समय लगेगा, श्रेया के मामले में स्किन टोन के बदलने की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं, लेकिन हमें उंगलियों और हाथों के शेप में बदलाव को समझने के लिए और ज्यादा सबूतों की जरुरत है. एक अफगान सैनिक जिसे यहां एक पुरुष डोनर से डबल-हैंड ट्रांसप्लांट मिला था. उसने भी स्किन टोन में थोड़ा बदलाव देखा था, लेकिन पिछले हफ्ते अफगानिस्तान में उसकी मौत हो गई। हम ज्यादा दस्तावेज नहीं जुटा सके.

प्लास्टिक सर्जन डॉ मोहित शर्मा का कहना है कि इंटर हैंड ट्रांसप्लांट में रिसर्च बहुत सीमित रहती है.फिलहाल श्रेया के फिजियोथेरेपिस्ट कहते हैं कि तीन में से एक नसों और उसकी उंगली की मांसपेशियों को अभी पूरी तरह से काम करना है लेकिन समय के साथ सुधार होगा.

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