500 वर्षों का जन आंदोलन सफल, अयोध्या में राम के रूप में हो रहा भव्य राष्ट्र मंदिर का निर्माण

देश के करोड़ों लोगों को संस्कारों का व्यवहार एवं संस्कृति का स्वरूप जिन महापुरुषों में साक्षात दिखाई देता है उनमें भगवान राम सर्वोपरि है. भगवान राम विश्व भर में फैले करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र बिंदु हैं. भगवान राम का मंदिर उस आस्था का मंदिर है. आंदोलन के नेतृत्वकर्ता इसको राष्ट्र मंदिर निर्माण की संज्ञा देते हैं.
nation temple in Ayodhya through Lord Ram, 500 वर्षों का जन आंदोलन सफल, अयोध्या में राम के रूप में हो रहा भव्य राष्ट्र मंदिर का निर्माण

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी आस्थाओं के मानने वाले पूज्य धर्मगुरुओं द्वारा 5 अगस्त को विधिवत पूजन के साथ अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हो जाएगा. आंदोलन को अपना संपूर्ण समर्थन देकर निर्णायक स्थिति तक पहुंचाने में सहायक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत की उपस्थिति भी समाज के लिए प्रेरक रहेगी. देश के सभी तीर्थ स्थानों की मिट्टी एवं सभी नदियों का पवित्र जल मंदिर निर्माण के लिए पूजन में उपयोग होना देश की एकात्मता का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण है. सभी संप्रदायों के धर्म गुरुओं का आशीर्वाद सामाजिक एवं आर्थिक हस्तियों को आमंत्रण एवं उपस्थिति देश की एकात्मता एवं सामाजिक सद्भाव की अनूठी मिसाल है.

मानवीय मूल्यों की पराकाष्ठा है भगवान राम का जीवन

आज अपने देश एवं दुनिया के सम्मुख जो समस्याएं दीवार की तरह खड़ी हैं, उन सब का समाधान प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र में दिखाई देता है. महिला सशक्तिकरण अभियान के माध्यम से जो संदेश हम समाज को देना चाहते हैं, राम का रावण के साथ युद्ध उसका प्रत्यक्ष व्यवहार है. माता सीता के वन गमन के समय स्वयं राजमहल में रहकर भी वन के समान जीवन जीना यह स्त्री के प्रति उनके आदर भाव को प्रकट करता है. समाज में जो शक्तियां सवर्ण-दलित, शहरवासी – वनवासी (जनजाति), संपन्न-गरीब की खाई को बढ़ाकर संघर्ष उत्पन्न करना चाहती हैं, उनको राम का महाराज निषाद एवं माता शबरी के जूठे बेर खाना, सटीक उत्तर है. वन में उनका व्यवहार एवं पेड़-पौधे, जीव-जंतु आदि के प्रति प्रेम पर्यावरण एवं जैव विविधता के प्रति उनकी दृष्टि को प्रकट करता है. मानवता के शत्रु राक्षसों का वध करके आतंक का उन्मूलन तो उन्होंने करके ही दिखाया है. उनका सारा जीवन इसी की प्रेरणा है. पिता-पुत्र, भाई-भाई, शिक्षक, पत्नी आदि के प्रति उनका व्यवहार मानवीय मूल्यों की पराकाष्ठा है. इस कारण राम मंदिर का निर्माण एक पूजा स्थान मात्र नहीं, बल्कि सामाजिक विघटन के इस वातावरण में मानवता को आदर्श व्यवहार का संदेश भी देगा.

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भारत में राष्ट्र और राम में एकात्मता का दर्शन

लोक कल्याण का विचार लेकर ऋषियों के तप के परिणाम स्वरूप जिस राष्ट्र का निर्माण हुआ, आसेतु हिमाचल विस्तृत भूभाग वाला यह भारत राष्ट्र ही है. जीवन जीने की शैली जिसमें संपूर्ण विश्व का कल्याण निहित है, वह इस राष्ट्र में विकसित हुई. मानव का मानव के प्रति, प्रकृति एवं सृष्टि में व्याप्त चराचर जीव-जगत के प्रति हमारा व्यवहार कैसा हो, यह संस्कार संपूर्ण विश्व को इस धरा ने ही दिया है. शरणार्थी की सहायता एवं संकट में सहयोग, यहां का संस्कार है. इस देश में जन्मी ऋषि परंपरा, देवी- देवताओं की वाणी, महापुरुषों एवं राजा-महाराजाओं ने अपने व्यवहार से इस संस्कार को अपने जीवन में साकार रूप दिया. लंबी परंपरा से विकसित यह संस्कार ही हमारी थाती बन गए हैं, जो हमारी संस्कृति के रूप में प्रकट होते हैं. देश के करोड़ों लोगों को इन संस्कारों का व्यवहार एवं संस्कृति स्वरूप जिन महापुरुषों में साक्षात दिखाई देता है उनमें भगवान राम का नाम सर्वोपरि है. इस कारण भगवान राम विश्व भर में फैले करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र बिंदु हैं. भगवान राम का मंदिर उस आस्था का मंदिर है. इस कारण राम मंदिर निर्माण आंदोलन के नेतृत्वकर्ता इसको राष्ट्र मंदिर निर्माण की संज्ञा देते हैं. इस आस्था के कारण ही करोड़ों का समाज मंदिर आंदोलन से जुड़ा, जो अब साकार रूप ले रहा है.

महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि- भव्य राम मंदिर निर्माण

प्रभु श्रीराम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण हिंदू समाज की चिर आकांक्षा थी, जो अब पूर्ण हो रही है. इस आकांक्षा की पूर्ति के लिए लगभग 500 वर्षों से हिंदु समाज संघर्षरत था. असंख्य बलिदान अब तक हो चुके हैं. मुक्ति का यह संघर्ष साधु-संत, राजा-महाराजाओं आदि के नेतृत्व में चला है. इस आंदोलन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब 1983 में विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन अपने हाथों में लिया. स्वर्गीय अशोक सिंघल जी के साहसी एवं यशस्वी नेतृत्व के कारण आंदोलन देशव्यापी बना. रथ यात्रा, शीला पूजन, चरण पादुका यात्रा, कार सेवा आदि कार्यक्रम आंदोलन को गति देने वाले निर्णायक चरण थे. भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष श्री लालकृष्ण आडवाणी की यात्रा से संपूर्ण देश का जनमानस आंदोलन के साथ जुड़ गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्वर्गीय मोरोपंत पिंगले, गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ, स्वामी वामदेव एवं स्वामी सत्यमित्रानंद सरीखे अनेक महापुरुष जिनका आंदोलन को गति देने में उल्लेखनीय योगदान है- अब इस दुनिया में नहीं है. आंदोलन के शिखर पुरुष स्वर्गीय अशोक सिंघल भी अपने जीवित रहते मंदिर नहीं देख पाए. मंदिर का निर्माण इन सब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है.

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दुनिया भर में शोध का विषय बना 500 वर्षों का सक्रिय जन आंदोलन

मंदिर निर्माण का यह आंदोलन विश्व के लोगों के लिए एक शोध का विषय रहेगा. समाज के द्वारा अपनी आकांक्षा पूर्ति के लिए 500 वर्षों तक चलने वाला यह अनूठा जन आंदोलन है. सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय एक समिधा के समान यज्ञ की पूर्ण आहुति में सहायक बना है. विश्व के सभी आस्थावान व्यक्ति अयोध्या आकर प्रभु श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेंगे, अपने संस्कारों को सुदृढ़ करेंगे एवं संस्कारों के बल पर मानवीय मूल्यों के संरक्षक एवं वाहक बनेंगे. प्रभु श्रीराम एवं प्रभु श्रीराम का मंदिर इसकी प्रेरणा युगों-युगों तक देता रहेगा. मंदिर निर्माण आंदोलन में सहायक सभी ज्ञात अज्ञात लोगों का पुण्य स्मरण.

– राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री, भाजपा

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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