ये तस्वीर नहीं हिंदुस्तान की कैफ़ियत है मियां, मंदिर बने या मस्जिद बस सलामत रहें हमारी बस्तियां

नवंबर का महीना...हवा में ठंडक, सवेरे का आफताब और रात की चांदनी. सरयू की कलकलाती ध्वनि... मस्जिद की अज़ान...हनुमान गढ़ी की आरती चचा हमारी अयोध्या को किसी की नजर न लगे. लेकिन चचा सुना है कुछ दिनों बाद अयोध्या का फैसला आने वाला है. चचा हम डर लग रहा है. कहीं दंगा फसाद न हो जाए.

नवंबर का महीना…हवा में ठंडक, सवेरे का आफताब और रात की चांदनी. सरयू की कलकलाती ध्वनि… मस्जिद की अज़ान…हनुमान गढ़ी की आरती चचा हमारी अयोध्या को किसी की नजर न लगे. लेकिन चचा सुना है कुछ दिनों बाद अयोध्या का फैसला आने वाला है. चचा हम डर लग रहा है. कहीं दंगा फसाद न हो जाए.

चचा- हां बेटा, सुना तो है, ख़ुदा मेरे मुल्क की हिफाजत करे. बेटा तुम लोगों को बचपन से गोद पर खिलाया है. तुम अपने वालिद के पास कम रहते थे और मियां चचा के साथ ज्यादा वक्त ज़ाया करते थे. चाहे जो हो बेटा बस मेरे आका हमारे शहर का मिज़ाज न बिगड़े.

बेटा- चचा एक बात बताओ. आप की उम्र जितनी पुरानी तो मेरे दादा है. ये मसला क्या है. चचा सबको पता है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था. फिर चचा इतना शोर शराबा क्यों हो रहा है.

चचा- बेटा तुम बिल्कुल सही कह रहे हो. लेकिन लड़ाई ही कुछ ऐसी है. हिंदू ऐसा कहते हैं कि यहां पहले एक मंदिर होता था, उसके बाद मुगल शासक बाबर ने मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाई थी. तब से यहां बाबरी मस्जिद थी. लेकिन बाद में यहां नमाज अदा करनी बंद हो गई. यहां पुलिस का पहरा हो गया था. आजादी के बाद से ही यहां जंग छिड़ी हुई है.
बेटा हमें इतिहास भूगोल नहीं पढ़ी. हम अनपढ़ हैं. बस ख्वाहिश महज मेरी इतनी है कि ऐसा न हो कि तुम जिसको आज चचा कह रहे हो उसी को दुश्मन मान लो, आज मैं जिसको अपना बेटा कह रहा हूं उसी को मारने को दौड़ पड़ूं.

बेटा- अरे चचा…ऐसा कभी नहीं हो सकता. चचा प्रभु श्री राम के नाम के आगे मर्यादा पुरुषोत्तम लगाया जाता है वो कभी ऐसा नहीं होने देंगे. और चचा आप बिलकुल परेशान मत होना…मैं पापा से बोलकर आपको अपने घर में रख लूंगा और अगर चचा कोई और हमें मारने आया तब क्या होगा.

चचा- अरे ला हौल वला कुव्वता इल्ला बिल्लाह, तुम ऐसा मत सोचो. मैं ख़ुद को ख़ाक कर दूंगा लेकिन तुमको कुछ होने नहीं दूंगा. (इतना कहते ही चचा की आंख नम हो जाती हैं और वो बच्चे को सीने से लगा लेते हैं)

इतने में एक ही सरदार मुस्कराते हुए आया और बोला…चचा अस सलाम अलैकुम

चचा- वालेकुम अस्सलाम पाजी. तशरीफ़ रखिए हुजूर. आपकी यहां मकबूलियत कैसे जनाब.

सरदार जी- अरे चचा. माहौल बहुत गर्माया हुआ है. आज की रात तो बहुत भारी होने वाली है.

चचा- परेशां मत हो…अल्लाह सब ठीक कर देगा

सरदार जी- हां चचा..वाहे गुरू से अभी यही मना कर आया हूं. चचा चारों तरफ इंसान कम पुलिस ज्यादा दिख रही है. वैसे तो हमलोग पुलिस के आदी हो चुके हैं लेकिन इस बार तो चचा रंग-बिरंगी फौज दिख रही है. चचा वाहे गुरू से यही अरदास है कुछ दंगा वंगा न हो. बाप दादा बताते हैं कि 1990-1992 में बहुत दंगा फ़साद हुए थे. बहुत लोग मारे गए थे.

चचा- हां बेटा, ऐसा ही कुछ हुआ था. वो दिन ख़ौफनाक मंजर जेहन में आता है तो रूह कांप जाती है मेरी. बेटा ऐसा तो कुछ नहीं होगा न.

सरदार जी- अरे नहीं चचा. तुसी टेंशन मत लो जी. ये अयोध्या है चचा. यहां राम-रहीम-वाहे गुरु सबका आशीर्वाद बरसता है. यहां अमन शांति रहेगी चचा. और चचा अच्छा तो है ये मसला कब तक चलता रहेगा. हमारे बच्चे भी ऐसे ही डर के साए में जियेंगे क्या. सुप्रीम कोर्ट जल्दी से जल्दी फैसला करें उसके बाद हम सब मिलकर तस्वीर लेंगे और लोगों को दिखाएंगे अयोध्या की तस्वीर. अच्छा चचा चलता हूं. अपना ख्याल रखिएगा.

चचा- ठीक है बेटा तुम भी ध्यान से रहना.

अगले दिन 9 नवंबर (फैसले वाले दिन)
बेटा- चचा क्या कर रहे हो.

चचा- अरे आ गया तू. कुछ नहीं बेटा बस अभी न्यूज चैनल लगाकर सुन रहा हूं.

बेटा- अच्छा चचा क्या बोल रहे हैं न्यूज वाले. चचा सभी माइक लिए यहीं घूम रहे हैं. कुछ न कुछ बोलते रहते हैं.

चचा- हां बेटा. सभी जगह शांति है. बस कुछ ही देर बात फैसला आने वाला है.

बेटा और चचा दोनों टकटकी लगाकर न्यूज देखते हैं. तभी फैसला आता है

चचा- बेटा फैसला आ गया. विवादित जमीन रामलला को मिल गई. (चचा आंख बंद कर ख़ुदा को धन्यवाद देते हैं).

बेटा- चचा क्या बुदबुदाते रहते हो. मुझे तो कुछ समझ नहीं आता.

चचा- अरे बेटा जमाने का झगड़ा खत्म हो गया. जो जमीन का झगड़ा था वो अदालत ने रामलला के मंदिर के लिए दे दी और मुस्लिम को पांच एकड़ जमीन अयोध्या में कहीं दी जाएगी. जिससे हम लोग मस्जिद बनाएंगे.

बेटा- चचा अब झगड़ा तो नहीं होगा न. कहीं मुसलमान नहीं मानें और वो कहेंगे कि उनको वहीं मस्जिद मनानी हैं जहां अदालत ने मंदिर के लिए जमीन दी है.

चचा- नहीं बेटा. मुसलमान ऐसा कभी नहीं करेगा. बेटा मुसलमान इस मुल्क की खुशामदी चाहता है, आबादगी चाहता है. सभी को ये फैसला मानना होगा. इसी में हम सब की भलाई है. और हां बेटा, एक अदद ख्वाहिए और है मेरी..

बेटा- बोलो चचा

चचा- जब मंदिर बने तो मुसलमान जाकर सहयोग करे और जब मस्जिद बनें तो हिंदू जाकर सहयोग दें

बेटा- क्या बात बोली है चचा..चचा इसी बात पर एक शेर सुना दीजिए फिर चलते हैं सेल्फी लेते हैं.

(इतने में ही सरदार वहां आ जाता है)
सरदार जी- अरे चचा फैसला आ गया…राम मंदिर वहीं बनेगा…चचा अदालत ने बहुत अच्छा फैसला दिया है. दोनों समुदाय को मंजूर होगा. चचा कहीं भी हिंसा नहीं हुई. सबने सुप्रीम कोर्ट का सम्मान किया. अरे चचा ये लड़का तो उस दिन भी बैठा था और आज भी है. ये कौन है?

चचा- इसका नाम राम है.

सरदार जी- क्या बात है चचा आज राम-रहीम एक साथ.

चचा- नहीं, राम रहीन और वाहे गुरू भी साथ हैं…अच्छा एक शेर सुन लो

‘मंदिर में ढूंढ़ू या मस्जिद में तुझे, ख़ुदा कहूं या भगवान तुझे
चादर चढ़ाऊं या चुनरी उढ़ाऊं तुझे, इंसान हूं इंसानियत की भीख मांगता हूं
ऐ ख़ुदा मैं तुझसे अपने वतन की सलामती चाहता हूं, बस सलामती चाहता हूं’

बेटा- क्या बात है चचा…वाह चचा वाह…

सरदार जी- ओ क्या बात है जी… अच्चा चलो देर हो रही है सेल्फी ले लो चलकर…

(फिर तीनों जाकर सेल्फी लेते हैं और मुल्क की एकता,अखंडता की मिसाल पेश करते हैं) वो तस्वीर वहीं है जो आप अभी देख रहे हो और अपने मुल्क पर गुमान कर रहे हो)