आजम खान को फजीहत से बचने के लिए करना होगा ये मुश्किल काम!

ऐसा जरूरी नहीं कि आजम खान हर बार जान बूझकर विवादित बयान देते हों. एकाध बार गलती से भी होता है, उन्हें ये ट्राई करना चाहिए.

आजम खान ट्रेंडिंग लिस्ट में हैं. उन्हें ट्रेंडिंग लिस्ट और सुर्खियों में रहने की ऐसी लत लग गई है कि वो कभी अपनी वाणी को विराम नहीं देते. वो लगातार बोलते रहते हैं. कभी सदन में, कभी किसी मंच पर, कभी किसी न्यूज चैनल के माइक पर बोलते ही रहते हैं. उन्हें अपनी बात से ‘कीवर्ड’ निकलने की उम्मीद हमेशा रहती है. कब गंदी बात मुंह से निकल जाए और वो मीडिया-सोशल मीडिया पर छा जाएं, इसी इंतजार में रहते हैं.

ऐसा ही एक बार फिर कुछ किया है. उनका बयान इतना गंदा था कि सदन के रिकॉर्ड से मिटा दिया गया है. लोकसभा में तीन तलाक बिल पर चर्चा के दौरान सदन की अध्यक्षता बीजेपी सांसद रमा देवी कर रही थीं. उनको देखते हुए आजम खान ने शेरो शायरी की और ऐसी बात कही जिसे सभ्य तो नहीं कहा जा सकता. उसके बाद जब रमा देवी ने माफी मांगने को कहा तो बेशर्मी से कह दिया कि वो बहन जैसी हैं.

Azam khan, आजम खान को फजीहत से बचने के लिए करना होगा ये मुश्किल काम!

इस बयान से आजम खान के बारे में दो-तीन बातें पता चलती हैं. पहली तो ये कि आजम खान को बहनों से बात करने की तमीज नहीं है. मम्मी ने बचपन में दो कंटाप मारकर समझाया नहीं कि बहनों से बात कैसे करते हैं. दूसरी बात- उम्र बढ़ने के साथ आजम खान नीचे आते जा रहे हैं. विवादित बयान भले बढ़ जाएं लेकिन तमीज के मामले में पिछड़ते जा रहे हैं. तीसरी बात- मुलायम सिंह यादव ने इन्हीं के लिए कहा था ‘लड़के हैं, गलती हो जाती है.’

वैसे पूरे चांसेज इस बात के हैं कि आजम खान हर विवादित बयान सुर्खियों में रहने के लिए देते हैं. लेकिन मान लेते हैं कि वे अचानक से इन सिचुएशन में फंस जाते हों, जैसे धमाल फिल्म में जावेद जाफरी उर्फ मानव श्रीवास्तव खतरनाक सिचुएशन में आगे आ जाते थे. ऐसी सिचुएशन से बचने के लिए आजम खान को एक काम तत्काल प्रभाव से शुरू कर देना चाहिए. मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं है. कोशिश करने से मुश्किल आसान होती है.

ऐसी दुर्घटना से बचने का सबसे अच्छा उपाय होता है चुप रहना. माना कि सांसद का धर्म सदन में बोलना है लेकिन अगर मुंह आजम खान को हो तो उसे बंद रहना चाहिए. लॉन्ग टर्म चुप्पी के कोर्स के लिए वो आडवाणी जी से संपर्क कर सकते हैं. आजीवन चुप्पी का कोर्स करने के लिए गुरू जी मनमोहन सिंह के पास जाएं. सेलेक्टिव चुप्पियों के लिए तो पूरे भारत में नगीने भरे हैं, किसी से भी सीख लें. बस रिक्वेस्ट इतनी है कि कुछ दिन चुप रहें.