सुशांत केस: रिया चक्रवर्ती-महाराष्ट्र सरकार की ‘संदिग्ध सुर साधना’, कैच करने लायक है बहुत कुछ

ऐसा लगता है कि पूरी पटकथा कहीं और लिखी जा रही है, शायद बहुत उच्च स्तर पर लिखी जा रही है. सामने दिखने वाले किरदार बस उसे जुबां दे रहे हैं, तभी सुर इतने मिल रहे हैं, लेकिन सुशांत केस में ये ‘सुर साधना’ चीजों को बेहद संदिग्ध बना रही है.

1. महाराष्ट्र सरकार में बैठे लोग सुशांत केस में मीडिया कवरेज से परेशान हैं. रिया भी परेशान है और सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल रही हैं.

2. महाराष्ट्र सरकार के नुमाइंदे सुशांत के पिता और बहन से रिश्ते पर सवाल उठाते हैं. रिया भी एक व्हाट्सएप चैट जारी कर सुशांत के अपने परिवार से खराब रिश्ते को स्थापित करने की कोशिश करती हैं.

3. महाराष्ट्र सरकार में बैठे लोग सुशांत केस के पीछे बिहार चुनाव को देखते हैं, रिया भी यही वजह देखती हैं.

4. महाराष्ट्र सरकार सुशांत केस की सीबीआई जांच को उचित नहीं मानती. सबसे पहले सीबीआई जांच (CBI Investigation) की मांग करने वाली रिया भी अब सीबीआई जांच के खिलाफ हैं.

5. संजय राउत सुशांत और दिशा केस को जोड़कर देखने के खिलाफ हैं. अगले ही दिन एंबुलेंस का एक ड्राइवर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज उस सबसे सनसनीखेज तथ्य को खारिज कर देता है, जिससे दिशा की मौत सामान्य खुदकुशी से कुछ ज्यादा नजर आने लगती है और जिससे दिशा केस के सुशांत केस से जुड़ने के आसार नजर आने लगते हैं.

ऐसा लगता है कि पूरी पटकथा कहीं और लिखी जा रही है, शायद बहुत उच्च स्तर पर लिखी जा रही है. सामने दिखने वाले किरदार बस उसे जुबां दे रहे हैं, तभी सुर इतने मिल रहे हैं, लेकिन सुशांत केस में ये ‘सुर साधना’ चीजों को बेहद संदिग्ध बना रही है.

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मीडिया से महाराष्ट्र सरकार भी परेशान, रिया भी !

रविवार को ऐसी खबरें आईं कि महाराष्ट्र सरकार और सरकार से जुड़े लोग बेहद परेशान हैं. उनकी परेशानी सुशांत केस में मीडिया कवरेज को लेकर है. कहा गया कि इसे रोकने के रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं.

जिस दिन महाराष्ट्र की सरकार सुशांत केस में मीडिया कवरेज को लेकर चिंतित, परेशान और बौखलाई नजर आई, उसके ठीक अगले दिन रिया की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई. कथित मीडिया ट्रायल पर रोक लगाने की याचिका. सुशांत केस में सच को सामने लाने की कोशिश को ‘मीडिया ट्रायल’ कहा गया. क्या यह बस एक संयोग है कि जो कुछ करने का इरादा महाराष्ट्र सरकार से जुड़े लोगों का था, उसे मुकाम तक पहुंचाने के लिए रिया देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच जाती है?

फिर ऐसा नहीं लगता कि सुशांत केस में जिस खेमे में रिया खड़ी है, उसी खेमे में पूरी महाराष्ट्र सरकार और मुंबई की पुलिस नजर नहीं आ रही है? क्या यही वजह है कि रिया का पीछा करती मुंबई तक गई बिहार पुलिस को उद्धव सरकार की मुंबई पुलिस ने कदम-कदम पर रोका? उसे प्रताड़ित किया?

शक लाजिमी है कि कहीं रिया तक पहुंचने वाली सच की कोई भी आंच किसी ऐसी बड़ी शख्सियत को झुलसाने वाली तो नहीं है, जिसे महाराष्ट्र की पूरी सरकार अपनी साख चूल्हे में झोंककर भी बचाना चाहती है?

संजय राउत की झल्लाहट के पीछे क्या है?

संजय राउत एक संजीदा नेता माने जाते हैं, हल्की बातें अमूमन नहीं करते हैं. तथ्यों पर भरोसा रखते हैं, कम बोलते हैं, सटीक बोलते हैं. लेकिन रविवार को उनका एक अलग ही रूप सामने आया.

भन्नाए हुए संजय राउत, परेशान संजय राउत, अनाप-शनाप बोलते हुए संजय राउत, तर्कहीन बातें करते हुए संजय राउत. कुल मिलाकर अपनी छवि से बिल्कुल अलग संजय राउत, क्यों? आखिर ऐसा क्यों? सुशांत सिंह राजपूत के परिवार पर लांछन लगाते रहे.

चरित्र हनन तक करने की कोशिश की. सुशांत के परिवार को लेकर ऐसे-ऐसे सवाल उठाए, जिनका कोई मतलब नहीं. तथ्यों के स्तर पर भी तैयारी आधी-अधूरी. सुशांत के पिता की दो शादी होने की बात कही, जो गलत निकली. क्या राउत पर भी वही दबाव काम कर रहा था, जिसकी वजह से मुंबई पुलिस अपनी साख को गिरवी रखकर जांच में अड़ंगा लगा रही थी?

सुशांत के परिवार पर रिया के भी सवाल, राउत के भी !

रिया और महाराष्ट्र सरकार में बैठे लोगों की मिलीभगत हर कहीं दिखी है. रिया सुशांत का एक व्हाट्सएप चैट लीक करती (करवाती हैं/या लीक होता है) हैं. चैट के जरिए यह बताने की कोशिश होती है कि सुशांत के अपने परिवार से रिश्ते ठीक नहीं थे.

बहन से उनकी अनबन चल रही थी. संजय राउत मीडिया के सामने आते हैं. खुद के परिवार से सुशांत के रिश्ते पर बेहद बे-सिर-पैर की बातें करते हैं. उस हद तक चले जाते हैं, जिसे चरित्र हनन माना जा सकता है. शिवसेना प्रवक्ता और रिया का सुर-से-सुर मिलना फिर से चौंका जाता है.

सुशांत और दिशा केस को अलग दिखाने की बेचैनी क्यों?

सीबीआई जांच शुरू भी नहीं हुई है कि संजय राउत का ऐलान आता है कि दिशा और सुशांत केस में कोई जुड़ाव नहीं है. राउत यह भी कहते हैं कि कुछ लोग साजिशन दोनों केस को जोड़ने की कोशिश में हैं, लेकिन जिस दिन राउत ये दावा कर रहे होते हैं उसी दिन दिशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का वह हिस्सा सामने आता है, जिसमें लिखा है कि मौत के वक्त दिशा की बॉडी न्यूड थी, न्यूड बॉडी.

ये ऐसा तथ्य है, जिसके बाद ना तो दिशा की मौत सामान्य खुदकुशी रह जाती है और ना ही अब उसकी मौत को सुशांत केस से जोड़कर देखना बेवजह लगता है. संयोग देखिए, राउत के दावे के ठीक बाद कथित तौर पर दिशा की डेड बॉडी को अस्पताल ले जाने वाला एंबुलेंस ड्राइवर सामने आता है. ये एंबुलेंस ड्राइवर दिशा केस को संदिग्ध बनाने वाले उसी सबसे बड़े तथ्य को खारिज कर देता है.

वह कहता है कि दिशा के शरीर पर पूरे कपड़े थे. वह तो कपड़ों के रंग तक बताता है. अब ये तो महाराष्ट्र की सरकार को ही बताना होगा कि पोस्टमार्टम करने वाले उनके अस्पताल के काबिल डॉक्टर ने सही रिपोर्ट लिखी है या एंबुलेंस ड्राइवर सच बोल रहा है?

लेकिन फिर वही सवाल. फिर वही संदिग्ध हालात. आखिर ऐसा क्यों है कि महाराष्ट्र की सरकार और सरकार में बैठे लोग जो सोचते या चाहते हैं, उसके समर्थन में कुछ ही घंटों के अंदर कोई-ना-कोई चेहरा खड़ा दिखता है?

बातें ‘मैच’ कर रही हैं…‘कैच’ करने लायक बहुत कुछ है!

मीडिया को रोकने की बात होती है तो इसके लिए रिया सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाती है. सुशांत केस को पारिवारिक झगड़े से जोड़ने की कोशिश रिया करती है, तो राउत भी उस अलर्गल तथ्य को स्थापित करने की कोशिश करते हैं. दिशा की डेड बॉडी का हाल और हुलिया सरकार और उसमें बैठे लोगों को परेशान करता है, तो एक एंबुलेंस ड्राइवर सामने आ जाता है.

यही नहीं, पूरे मामले को बिहार चुनाव से जोड़ने की जिद महाराष्ट्र सरकार से सहानुभूति रखने वालों की भी है और रिया की भी. एक-दूसरे के बचाव में सारी बातें इतनी ‘मैच’ कर रही हैं, तो इसमें-से जांच एजेंसियों के लिए ‘कैच’ करने लायक यकीनन बहुत सारी चीजें नजर आ रही हैं.

मीडिया की आह…वाह रिया जी वाह !

रिया ग्लैमर वर्ल्ड से ताल्लुक रखती हैं. उन्हें मीडिया की ताकत का भी अंदाजा होगा और उसकी जरूरत का भी. सही चीजों और घटनाओं के सिर्फ हमारे बीच मौजूद होने से काम पूरा नहीं हो जाता, उसे सामने लाना भी होता है.

रिया फिलहाल कोई महान अदाकारा तो नहीं हैं, लेकिन जितनी फिल्में उन्होंने की हैं, उनके प्रमोशन के लिए उसी मीडिया के पास जरूर गई होंगी, जहां पर आज वह अपने चेहरे को देखने भर से खौफ खा रही हैं.

क्या ये मीडिया के साथ अन्याय नहीं है. जब आप अपनी औसत या घटिया फिल्मों को भी मीडिया के मंच से महान कहकर दर्शक जुटाने की कोशिश करें, तब मीडिया ठीक. जब मीडिया सच्चाई सामने लाने की कोशिश करे, तो मीडिया ट्रायल ! वाह रिया जी वाह !

 

सच के मार्ग पर मीडिया से कैसा घबराना?

सुशांत केस में मीडिया जो कुछ कह और कर रहा है, वह सच सामने लाने की कोशिश है. मीडिया समूहों का दावा है कि तथ्यों पर बातें हो रही हैं. जो चीजें सामने आ रही हैं, उनकी एनालिसिस में कही जा रही बातों के अंदर की गलतियों को पकड़ने की गुंजाईश भी हमेशा
बनी हुई है.

फिर भी हो सकता है कि इन सबके बीच मीडिया के किसी हिस्से से थोड़ी गलती हो रही हो. कुछ चीजें बढ़ा-चढ़ाकर कही गई हों. लेकिन इसे भी दुरुस्त करने का काम हमारी जांच एजेंसियों के जिम्मे है, उनके (जांच एजेंसियों) सामने भी चैलेंज है.

वे अपनी जांच अपने तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाएं. बगैर मीडिया रिपोर्ट से प्रभावित हुए. आरोपियों और उनके हितचिंतकों की तकलीफ से सहानुभूति रखते हुए क्या मीडिया हाथ पर हाथ रख बैठ जाए? किसी सरकार को, किसी पुलिस को, किसी रिया को अपने तरीके से केस के विश्लेषण और आखिरकार उसे सेटल करने की छूट दे दे?

सबको पता है कि अगर सुशांत केस में मीडिया निष्क्रिय बना रहता, तो उसका क्या हस्र होता? शायद वही, जो दिशा सालियान केस का होने वाला था, या हो चुका था. वह तो सुशांत केस के दिशा केस से जुड़े होने के ‘शुरुआती लक्षणों’ ने दोबारा दिशा को भी न्याय मिलने की उम्मीद जगाई है.

क्या रिया और राउत भूल गए कि सुशांत केस में हंगामा मचने से पहले किसी ने जाना था कि दिशा सालियान की डेड बॉडी पर कोई कपड़ा नहीं था? और केस के संदिग्ध होने की इतनी बड़ी गवाही के बावजूद उसे मामूली सुसाइड बताकर क्लोज कर दिया गया? शायद यही सुशांत के साथ होने वाला था, जो नहीं हुआ. फिर से वही सवाल- क्या इसीलिए सुर इतने मिल रहे हैं?

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