कोरोना के बहाने पूरी तरह घिर चुका है चीन, एशिया का नया लीडर बना भारत

कोरोना (Coronavirus) के मामले में चीन (China) बुरी तरह घिरा हुआ है. मगर इस बीच सीमा विवाद पर भारत (Border Dispute with India) को मिलता समर्थन बहुत कुछ कहता है. चीन पहले से ही दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर दोनो ही इलाकों में अपनी हरकतों से विवादों के घेरे में है.
China surrounded on pretext of Coronavirus, कोरोना के बहाने पूरी तरह घिर चुका है चीन, एशिया का नया लीडर बना भारत

चीन को कोरोनावायरस (Coronavirus) के मामले में पूरे विश्व में प्रबल विरोध का सामना करना पड़ रहा है. उसे कोरोना साजिश का प्रमुख सूत्रधार माना जा रहा है. अमेरिका (America) और यूरोप के प्रमुख देश (European Countries) चीन पर साजिश और मुआवजे दोनो का दबाव डाल रह हैं. चीन की कंपनियों और चीनी कारोबार दोनों पर अंकुश लगाने की वैश्विक कोशिशें शुरू हो चुकी हैं. इस बीच भारत की कूटनीति को वैश्विक समर्थन और मजबूत होता जा रहा है. एशिया में भारत नया लीडर बनकर उभरा है. भारत और चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद (Ind0-China Border Dispute) में भी भारत (India) को विश्व की मजबूत शक्तियों का खुला समर्थन मिल रहा है.

अमेरिका का भारत को समर्थन, चीन को सुनाई खरी-खोटी

भारत-चीन की सीमा पर लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने खुलकर नई दिल्ली का समर्थन किया है. अमेरिका ने चीन की विस्तारवादी नीति का विरोध किया है. दक्षिण एशिया मामलों की जिम्मेदार अमेरिका की एक शीर्ष राजनयिक ने चीन पर आरोप लगाया है कि वो अपने आक्रामक और परेशान करने वाले व्यवहार से यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. चीन इसके चलते भारी दबाव में है.

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वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक एलिस जी वेल्स ने चीन पर बड़ा हमला बोला. चीन की मौजूदा स्थितियों के चलते उनके इस प्रहार के कई महत्वपूर्ण मायने निकाले जा रहे हैं. वेल्स ने भारत-चीन सीमा पर तनाव और विवादित दक्षिण चीन सागर में बीजिंग के बढ़ते आक्रामक व्यवहार को जोड़ते हुए इसमें चीन की नापाक साजिश की आशंका जताई. चीन पर अमेरिका की ये टिप्पणियां इस दौर में खासी मायने रखती हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप (US President Donald Trump) पहले से ही चीन पर खासे हमलावर रहे हैं. ट्रंप ने कोरोनावायरस को चीनी वायरस तक कह डाला. ट्रंप ने साफ-साफ कहा कि चीन कोरोना वायरस के फैलने के लिए जिम्मेदार है. उन्होंने खुलकर कहा कि इस वायरस का केंद्र चीन का वुहान शहर है.

बुरी तरह घिरा चीन

कोरोना के मामले में चीन बुरी तरह घिरा हुआ है. मगर इस बीच सीमा विवाद पर भारत को मिलता समर्थन बहुत कुछ कहता है. चीन पहले से ही दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर दोनो ही इलाकों में अपनी हरकतों से विवादों के घेरे में है. चीन ने इस क्षेत्र में कई द्वीपों पर अपना सैन्य अड्डा भी बनाया है. ये दोनों क्षेत्र खनिज, तेल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न हैं और वैश्विक व्यापार का अहम समुद्री मार्ग भी हैं. इसी को देखते हुए अमेरिका यहां चीन को खुली चुनौती दे रहा है. इससे पहले ताइवान और हांगकांग के मामले में भी अमेरिका चीन की घेराबंदी कर चुका है.

China surrounded on pretext of Coronavirus, कोरोना के बहाने पूरी तरह घिर चुका है चीन, एशिया का नया लीडर बना भारत

हाल के दिनों में भारत से सटी सीमा पर चीनी सैनिकों द्वारा लगातार अतिक्रमण और घुसपैठ की कोशिशें हुई हैं. लद्दाख से लेकर सिक्किम और अरुणाचल तक में चीन लगातार सीमा पर भारतीय सैनिकों को उकसाने की कोशिश करता आया है. ऐसे में विश्व की महाशक्तियों का भारत के पक्ष में खड़ा होना बहुत कुछ कहता है. वैसे भी कोरोना काल में भारत वैश्विक लीडर बनकर उभरा है. भारत की भेजी दवा से समूचे विश्व का काम चल रहा है.

Hydroxychloroquine दवा का सबसे बड़ा उत्पादक भारत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी रोजाना की प्रेस ब्रीफिंग में बता चुके हैं कि वो कोरोना से बचने के लिए रोज कौन सी दवा लेते हैं. उन्होंने उसी हाइड्रो क्लोरोक्वीन दवा का जिक्र किया जो भारत ने बड़े पैमाने पर ट्रंप की फरमाइश पर अमेरिका भेजी थी. बतौर ट्रंप कोरोना से बचाव के लिए ये सबसे शानदार दवा है.

दुनिया में भारत इस दवा का सबसे बड़ा उत्पादक है. चीन से फैले वायरस ने जो दर्द दिया है उसकी वजह से पूरी दुनिया के देश आज हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के लिए भारत की ओर ताक रहे हैं. भारत में फार्मासिटिकल कंपनियां हर माह 20 करोड़ टेबलेट बनाने की क्षमता रखती हैं.

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शी जिनपिंग बने दुनिया के लिए विलेन

इस बीच एक और अहम घटनाक्रम हुआ. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग विश्व में विलेन बनकर उभरे हैं. उनके खिलाफ दुनिया के कई बड़े देश लामबंद हो रहे हैं. वहीं पीएम मोदी की लोकप्रियता आसमान पर है. कोरोनावायरस महासंकट के वक्त लोकप्रियता के मामले में पीएम मोदी वर्ल्ड लीडर्स को पछाड़ते हुए पहले पायदान पर पहुंच गए हैं. एक हालिया सर्वे में पीएम मोदी की लोकप्रियता 68 प्रतिशत बताई गई जबकि डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता 3 प्रतिशत गिर गई है.

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अमेरिका की ग्लोबल डेटा इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कनसल्ट पॉलिटिकल इंटेलिजेंस के मुताबिक 14 अप्रैल को पीएम मोदी की रेटिंग 68 प्रतिशत बताई गई है जो कि साल की शुरुआत में 62 प्रतिशत थी. पीएम मोदी की रेटिंग में सुधार की बड़ी वजह कोरोना वायरस से निपटने को लेकर उनकी तैयारी रही है. उन्होंने 25 मार्च को देश में लॉकडाउन की घोषणा की थी जिसे तीन बार बढ़ाया जा चुका है.

पीएम मोदी ने इस दौरान वैश्विक नेताओं को महामारी से निपटने में एकजुट करने की भी कोशिश की. पीएम मोदी ने सार्क देशों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक की और साथ ही जी20 देशों की बैठक कराने के लिए भी पहल की. इसके अतिरिक्त उन्होंने जरूरी दवाइयों के निर्यात से प्रतिबंध हटाते हुए मदद की पहल की है जिसे दुनियाभर के देशों ने स्वीकारा भी है. इन सभी वजहों ने ही मोदी की लोकप्रियता में इजाफा किया है. भारत एशिया का लीडर बनकर उभरा है.

चीन ने दुनिया भर में किया ‘दर्द और नरसंहार’ का प्रसार

चीन की समस्या यह भी है कि वहां कोरोना की वापसी हो रही है और वो भी नए लक्षणों के साथ. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चीन को लेकर लगातार अधिक मुखर होते जा रहे हैं. उनके मुताबिक चीन ने दुनिया भर में जो ‘दर्द और नरसंहार’ का प्रसार किया है, वह उससे ध्यान हटाने की कोशिश के तहत व्यापक दुष्प्रचार अभियान चला रहा है. ट्रंप ने चीन द्वारा COVID-19 महामारी से निपटने को लेकर निराशा जताई और दावा किया कि चीन की अक्षमता की वजह से दुनिया भर में बड़े पैमाने पर लोगों की जान गई है. चीन बुरी तरह बैकफुट पर है. उसके अधिकारी सफाई देने में जुटे हुए हैं.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन ने सफाई देते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को COVID-19 के बारे में बताने वाला चीन पहला देश था. इसका मतलब यह नहीं है कि वायरस की उत्पत्ति वुहान से हुई है. हमने कभी कुछ नहीं छिपाया है और न हम छिपाएंगे. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन के बीच मिलीभगत की खबरें भी अंतराष्ट्रीय स्तर पर उभर चुकी हैं.

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इस बीच, अमेरिकी सीनेट ने ‘होल्डिंग फॉरेंन कंपनीज अकाउंटेबल ऐक्ट’ नामक विधेयक पारित किया है जो चीन और अन्य देशों की ऐसी कंपनियों पर निगरानी को बढ़ाना देने की बात करता है जिन्हें अमेरिकी बाजार से हटाया जा सकता है. चीन के खिलाफ साजिश रचने के पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं. अमेरिकी का यहां तक मानना है कि चीन ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह इससे निपटने के लिए जरूरी चिकित्सकीय सामान की जमाखोरी कर सके.

चीन की लैब से फैला कोरोनावायरस

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने भी कहा है कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि यह वायरस चीन की प्रयोगशाला से फैला. वहीं ब्रिटेन ने दो टूक कह दिया है कि महामारी खत्म होने पर हम इस पूरे प्रकरण की तह तक जाएंगे. अमेरिका के आंतरिक सुरक्षा विभाग (डिपार्टमेंट आफ होमलैंड सिक्योरिटी-डीएचएस) के चार पृष्ठों वाले दस्तावेज के मुताबिक चीन के नेताओं ने जनवरी की शुरुआत में दुनिया से वैश्विक महामारी की गंभीरता जानबूझकर छिपाई.

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डीएचएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन कोरोना वायरस की गंभीरता को कम करके बताता रहा है. इस दौरान उसने चिकित्सकीय सामान का आयात बढ़ा दिया जबकि निर्यात घटा दिया. ऐसा करके उसने वायरस के प्रकोप को छिपाने की कोशिश की. इसमें यह भी कहा गया है कि चीन ने लगभग पूरी जनवरी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को यह जानकारी नहीं दी कि कोरोना वायरस संक्रामक है ताकि वह विदेश से चिकित्सकीय सामान मंगा सके. इस दौरान फेस मास्क और सर्जिकल गाउन का उसका आयात तेजी से बढ़ा था. इन बदले हुए हालातों में चीन की जमीन खिसकती जा रही है. ये भारत के वैश्विक शक्ति के तौर पर सूर्योदय का दौर है.

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