Corona से नहीं साहब…डर इसके ‘साइड इफेक्ट्स’ से लगता है!

कोरोनावायरस (Coronavirus) ने पैसे वालों को चिंता में डाल दिया है. खासतौर से भ्रमणकारी भारतीयों को. विदेश भ्रमण के एडिक्ट ऐसे लोगों की तो रातों की नींद ही उड़ गई है.
corona virus latest, Corona से नहीं साहब…डर इसके ‘साइड इफेक्ट्स’ से लगता है!

कोरोना-कोरोना-कोरोना. जीना मुहाल कर रखा है. इतनी घबराहट तो पतियों को पत्नियों से, बहुओं को सासों से और दंगाइयों से दिल्ली के मासूम लोगों को भी नहीं हुई थी. हर कोई डरा हुआ है. अगर आप ऐसा सोच रहे हैं, तो बिल्कुल गलत हैं. ये घबराहट और डर तो बस समाचार बेचने वाले खबरिया चैनल्स फैला रहे हैं. सच तो कुछ और है.

दरअसल, इनसाइड स्टोरी बिल्कुल ही अलग है. लोग बीमारी से परेशान नहीं हैं, बल्कि बीमारी के साइड इफेक्ट्स से दुबले हुए जा रहे हैं. आप सोच रहे होंगे कि बीमारी हुई नहीं, तो फिर साइड इफेक्ट कैसा? तो यही तो एक्सक्लूसिव खबर है.

Corona से नहीं बीवी के तानों से डर

अब देखिए न. आज अचानक पत्नी नाराज हो गई. सोसाइटी में साथ-साथ निकला था. रूमाल से नाक पोंछ रहा था. सामने मास्क लगाए टिप-टॉप कुछ अड़ोसी-पड़ोसी दिख गए. घर आकर क्या-क्या नहीं सुनाया. तुम एक दम ‘डाउन मार्केट’ (Down Market) हो. देखा नहीं? लोग कैसे-कैसे मास्क लगाकर निकलते हैं! और एक तुम! पत्नी ऑनलाइन ऑर्डर दे चुकी है. पूरे दो दर्जन मास्क किसी भी वक्त मेरे घर में दस्तक दे सकते हैं.

पत्नी को कोरोना का उतना खौफ नहीं है, जितना सोसाइटी में पिछड़ा दिखने का. ‘डाउन मार्केट’ नजर आने का. आगे के लिए आदेश ये भी है कि सोसाइटी में घूमते हुए वक्त-बेवक्त सैनिटाइजर (Sanitizer) हाथ पर मलता रहूं और ऐसा कर ‘अप मार्केट’ होकर पड़ोसियों के दिलों में खलता रहूं.

काश…कोरोना में राष्ट्रवादी एंगल होता

Corona ने देश के कुछ नेताओं को बुरी तरह से चिंताग्रस्त कर दिया है. समझ नहीं पा रहे कि इस पर राजनीति कैसे की जाए? वायरस (Coronavirus) पाकिस्तान से आता, तो मजा आ जाता. कोरोना के खिलाफ सारी मुहिम राष्ट्रवाद का हिस्सा बन जाती. कोरोना के खिलाफ लड़ाई, पाकिस्तानी साजिश को कुचलने का काम कहलाती. फिर वायरस को एक खास धर्म का बताकर स्थानीय राजनीति में धर्म का तड़का भी लग जाता. वैसे एक माननीय सांसद ने वायरस के ‘इटली कनेक्शन’ की ओर इशारा कर इसमें राजनीति की संभावनाएं तलाशने की नेक पहल जरूर कर दी है.

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‘भ्रमणकारी भारतीयों’ की अपनी अलग चिंता

कोरोना ने पैसे वालों को चिंता में डाल दिया है. खासतौर से भ्रमणकारी भारतीयों को. विदेश भ्रमण के एडिक्ट ऐसे लोगों की तो रातों की नींद ही उड़ गई है. पहले लंदन-दुबई-लग्जमबर्ग-टोक्यो-फ्लोरिडा आदि-आदि से लौटने पर दोस्तों-रिश्तेदारों के बीच क्या खिदमत होती थी! विदेश से लाए टुच्चे-से चॉकलेट थमाकर घंटों गप्पें सुनाने का सुख होता था. क्या जलवा रहता था! कोरोना ने विदेश भ्रमण के बाद डींगें हांकने का मौका ही छीन लिया है! क्या फायदा! इतने खर्चे भी करो और लौटो तो हालत ये कि कहानियां सुनना तो दूर, मित्र-रिश्तेदार उलटे नजरें चुरा ले रहे हैं.

‘स्पर्श सुख’ में चुभा Corona का कांटा!

कई लोग कोरोना की वजह से हाथ मिलाने से परहेज कर रहे हैं. बहुत नाइंसाफी है. डॉक्टरों के इस फरमान ने दफ्तरों में ऐसे लोगों का सिरे से मूड बिगाड़ दिया है. इनमें ज्यादातर बॉसेज की प्रजाति वाले हैं. कुछ उनके चेले-चपाटे भी. ये सब कल तक महिला कर्मचारियों से हाथ मिलाकर ‘स्पर्श सुख’ लिया करते थे. इन दिनों इस सुख से वंचित हैं और कोरोना को कोस रहे हैं.

कोरोना पीड़ित LIVE और EXCLUSIVE…काश ऐसा हो पाता!

खबरिया चैनल दिन-रात एक किए हैं. कोरोना संकट को बड़े से बड़ा बताने की होड़ है. बीच-बीच में ये कहकर अपना पाप धोते हैं कि डरने की जरूरत नहीं है. संकट है, तो समाधान भी है. मगर लौटकर फिर वही रोना-धोना और हंगामा लेकिन पता चला है कि ये चैनल वाले एक खास चिंता में डूबे हैं, जो खुलकर बता नहीं रहे. चिंता इस बात की है कि कोरोना की जिम्मेदारी किसी पर खुलकर डाल नहीं पा रहे हैं. चर्चाओं में एक-दूसरे से तू-तू मैं-मैं नहीं कर पा रहे हैं. न ही सिर्फ हमारे चैनल पर कोरोना पीड़ित LIVE और EXCLUSIVE वाली व्यूअर्स से पुकार लगाती पट्टी दिखा पा रहे हैं. वैसे देश के लिए चैनलों की ये कुर्बानी मामूली नहीं है.

ध्यान रहे : बहुतेरे और भी साइड इफेक्ट्स कोरोनावायरस (Coronavirus Side Effects) के देखे गए हैं. उनके सूक्ष्म परीक्षण और प्रमाणिक होने के बाद आप तक कोरोना के इन प्रभावों की जानकारी जरूर पहुंचाई जाएगी. क्योंकि जानकारी में ही बचाव है.

-व्यंग्य

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