मध्य प्रदेश: क्या सुर्खियों में रहने के लिए विवादित बयान देती हैं सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ?

हाल ही में प्रज्ञा ठाकुर (pragya thakur) ने जो विवादित बयान दिया है उसका उनकी पार्टी बीजेपी (BJP) की ओर से किसी ने भी इस बात का समर्थन नहीं किया. तो ये क्यों ना माना जाए कि प्रज्ञा सिंह सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की बयान बाज़ी करती हैं, जिसका जवाबदेह बाद में उनकी पूरी पार्टी को बनना पड़ता है.

अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाली भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक बार फिर बिना नाम लिए राहुल गांधी (Rahu Gandhi) को लेकर विवादित बयान दे दिया. ऐसे बेहद कम मौके आए हैं जब सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर किसी विवाद के बिना भी सुर्खियों में आई हों. तो आखिर क्या वजह है कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर बार बार अपने बयानों को लेकर विवादित हो जाती हैं. ताजा मामला ही ले लीजिए सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने चीन के मामले में कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि चाणक्य ने कहा था कि विदेशी महिला के गर्भ से पैदा हुआ कोई कभी भी राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता. ये बयान देने के बाद प्रज्ञा एक बार फिर कांग्रेस के निशाने पर आ गईं. क्योंकि निशाने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी थे.

अब चाणक्य को आधार बनाकर प्रज्ञा सिंह ने बयान तो दे दिया, लेकिन क्या उस समय की काल परिस्थिति की आज तुलना करना सही है. इतिहास पर नज़र डालें तो जब चाणक्य ने ये बात कही थी तब यूनानी आक्रमणकारी सेल्यूकस चन्द्रगुप्त मौर्य से हार चुका था और उसकी पूरी सेना बंदी बना ली गयी थी. तब उसने अपनी बेटी हेलेना के विवाह का प्रस्ताव चन्द्रगुप्त मौर्य के पास भेजा. चाणक्य ने प्रस्ताव मिलने पर विवाह तो कराया लेकिन विवाह से पहले हेलेना और चन्द्रगुप्त से कुछ शर्ते रखीं. उसमें से एक शर्त ये भी थी कि उन दोनों से उत्पन्न संतान राज्य की उत्तराधिकारी नहीं होगी क्योंकि हेलेना का बेटा विदेशी मां का पुत्र होने के नाते उसके प्रभाव से मुक्त नहीं हो पाएगा और देश की मिट्टी और लोगों के प्रति पूर्ण निष्ठावान नहीं हो पाएगा.

तो सोचने वाली बात ये है कि चाणक्य की उन शर्तों के लिए कुछ परिस्थितियां निर्मित हुईं थीं. वो भी तब जब एक दूसरे के खिलाफ युद्ध कर रहे दो देशों के बीच एक समझौता हुआ. तो क्या यहां ये संदर्भ देना उचित था. क्या विदेशी मूल से ताल्लुक रखने वाले हर शख्स को अपने राष्ट्रभक्त होने का प्रमाण देना होगा. इसे लेकर उनकी पार्टी बीजेपी की ओर से किसी ने भी इस बात का समर्थन नहीं किया. तो ये क्यों ना माना जाए कि प्रज्ञा सिंह सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की बयान बाज़ी करती हैं, जिसका जवाबदेह बाद में उनकी पूरी पार्टी को बनना पड़ता है.

ये सवाल पूछने का आधार कुछ बयान हैं, जिनका ज़िक्र करना यहां ज़रुरी है

17 अप्रैल 2019 को प्रज्ञा सिंह बीजेपी में शामिल हुईं और इसी के बाद से उनके विवादित बयानों का सिलसिला सा चल पड़ा. पार्टी में शामिल होने के एक दिन बाद ही 18 अप्रैल 2019 को वो पहली बार सुर्खियों में आईं जब उन्होंने आतंकवादियों की गोली से शहीद हुए हेमंत करकरे के बारे में बयान दिया कि हेमंत करकरे की मौत उनके श्राप से हुई.

18 अप्रैल 2019- लोकसभा चुनावों के दौरान एक कार्यक्रम में प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने शहीद हेमंत करकरे को लेकर बयान दिया कि हेमंत करकरे की मृत्यु उनके श्राप से हुई. प्रज्ञा सिंह ने कहा कि हेमंत करकरे ने मुझे मालेगांव ब्लास्ट में फंसाया था. इस दौरान उन्होंने मुझे कई यातनाएं दी थीं, मैनें उनसे कहा था कि तेरा सर्वनाश हो जाएगा, वो अपने कर्मों के चलते मरे. सवा महीने का सूतक लगता है, मैं गई और सवा महीने बाद उनकी मौत हो गई.

20 अप्रैल 2019- प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि उन्हें राम मंदिर पर बना विवादित ढांचा गिराए जाने पर गर्व है. उन्होंने कहा था कि उन्हें गर्व है कि उन्होंने देश का कलंक मिटाया. इस मामले में चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भी दिया था और उनके बयानों पर कुछ वक्त के लिए प्रतिबंध भी लगाया गया था.

10 मई 2019- प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने दिग्विजय सिंह को लेकर विवादित बयान दिया था. दिग्विजय सिंह ने एक इंटर्व्यू में कहा था कि प्रज्ञा उनकी बेटी जैसी हैं. इस बयान पर प्रज्ञा सिंह ने जवाब दिया कि जिस शख्स ने अपनी बेटी की उम्र की लड़की से शादी की हो वो मेरा पिता नहीं हो सकता. इस बयान के बाद भी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह को लेकर और भी विवादित टिप्पणियां की थीं.

16 मई 2019 – लोकसभा चुनावों में प्रचार के दौरान प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने रैली में बयान दिया कि नाथूराम गोड़से देशभक्त था, है और रहेगा. इस बयान के बाद बीजेपी की हर ओर आलोचना हुई, जिसके बाद प्रज्ञा सिंह को अपने बयान के लिए खेद ज़ाहिर करना पड़ा. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बयान की आलोचना की.

21 जुलाई 2019- सांसद प्रज्ञा सिंह ने सिहोर में कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक में कहा कि हम नाली सफाई के लिए सांसद नहीं बने हैं, जो हमारा काम है हम ईमानदारी से करेंगे. ये बात उन्होंने तब कही जब पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान की चर्चा हर ओर चल रही थी.

26 अगस्त 2019- दिवंगत नेता अरुण जेटली और बाबूलाल गौर की श्रद्धांजलि सभा में प्रज्ञा सिंह के एक बयान ने हंगामा खड़ा कर दिया. प्रज्ञा सिंह ने वरिष्ठ नेताओं के निधन पर कहा कि विरोधी ताकतें इसके लिए मारक शक्ति का प्रयोग कर रही हैं.

27 नवंबर 2019- संसद में ए राजा नाथूराम गोडसे को लेकर अपनी बात कह रहे थे तभी प्रज्ञा ने उन्हें रोकते हुए कहा कि देशभक्तों का अपमान नहीं होना चाहिए. इसके बाद एक बार फिर विवाद शुरू हो गया और साध्वी प्रज्ञा को सफाई देनी पड़ी कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया.

23 दिसंबर 2019 – सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर आरोप लगे कि उनकी वजह से विमान को टेक ऑफ में देरी हुई. इसके बाद प्रज्ञा सिंह ठाकुर का एक वीडियो भी सामने आया जो विवादों में रहा. जिसमें वो एयरलाइंस के क्रू से बहस करती हुईं नज़र आ रही थीं. एक व्यक्ति ने तो ये तक कहा था कि आपको शर्म आनी चाहिए कि आप जनप्रतिनिधि हैं और जनता को परेशान कर रही हैं. प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बाद में इस घटना को लेकर मीडिया में सफाई भी पेश की थी.

ऐसे बयानों की एक लंबी फेहरिस्त है, जो कि कई सवाल खड़े करती है. सवाल ये कि आखिर क्यों प्रज्ञा सिंह ठाकुर वक्त-वक्त पर अचानक आकर विवादित बयान देती हैं और सुर्खियां बटोर कर नदारद हो जाती हैं. गौरतलब है कि विवादों से प्रज्ञा सिंह ठाकुर का पुराना नाता है.

प्रज्ञा सिंह सबसे पहले सुर्खियों में तब आईं थीं जब उन पर मालेगांव ब्लास्ट केस का आरोप लगा था, जिसके बाद वो लंबे समय तक जेल में भी रहीं. इसके अलावा RSS कार्यकर्ता सुनील जोशी हत्याकांड़ में भी उनपर गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद सबूतों के अभाव में कोर्ट ने उन्हें बरी भी कर दिया था.

फिलहाल वो भोपाल से बीजेपी की सांसद हैं, प्रज्ञा सिंह ने कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लोकसभा चुनावों में 3 लाख 64 हज़ार वोटों से हराया था.

प्रज्ञा सिंह के बयानों को लेकर कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने कहा कि प्रज्ञा सिंह कोई साध्वी नहीं हैं, उनपर मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोप लगे हैं. वो उस गोड़से को देशभक्त कहती हैं जो गांधी जी का हत्यारा था. ऐसी महिला को उस गांधी परिवार पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं है, जिस परिवार से राजीव गांधी और इंदिरा गांधी ने देश के लिए प्राणों का बलिदान दिया.

मामले में बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने प्रज्ञा सिंह का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने क्या कहा ये महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उसके पीछे के भावार्थ को समझने की ज़रूरत है.

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