महात्‍मा गांधी : धोती पहनकर बंदूक का सामना करने वाले असली सुपरहीरो

नई पीढ़ी को नए अंदाज में बताना चाहिए कि महात्मा गांधी ही वो सुपरहीरो हैं जो बंदूक का सामना धोती पहनकर करने की हिम्मत रखते थे.

दिल्ली के बिड़ला हाउस में महात्‍मा गांधी की प्रार्थना सभा की रिकॉर्डिंग होती थी जो रेडियो पर प्रसारित की जाती थी. गांधी जी कभी-कभी समयसीमा से ज्यादा बोल देते थे जिस वजह से रिकॉर्डिंग करने वाले कर्मचारी को दिक्कत होती थी. उसने एक दिन झिझकते हुए ये बात गांधी जी के कान में डाल दी. फिर क्या था बापू ने बोला कि तुम बस इशारा कर दिया करो, मैं चुप हो जाऊंगा. रेडियो कर्मचारी को लगा कि महात्मा जैसा बड़ा आदमी यूं ही बोल गया होगा. इसका पालन कैसे संभव है कि मेरे जैसा छोटा कर्मचारी इशारा भर करे और गांधी जैसी शख्सियत चुप हो जाए लेकिन उसे तो आज्ञा का पालन करना था. रेडियो कर्मचारी ने अगले दिन गांधी जी को समय पूरा होने से कुछ मिनट पहले इशारा कर दिया और गांधी जी ने ठीक समय पर अपनी बात खत्म कर दी. ये क्रम बिड़ला हाउस में जारी रहा जहां कुछ दिनों बाद महात्‍मा गांधी की हत्या कर दी गई. सोचिए, जिस व्यक्ति ने दुनिया को सबसे क्रांतिकारी विचार दिया वो आम जिंदगी में कितना विनम्र था.

गांधी जी को सोशल मीडिया पर तीन मुद्दों के लिए ही याद किया जाता है-
गांधी की वजह से भगत सिंह को फांसी चढ़ाई गई.
गांधी ना होते तो पाकिस्तान ना बनता.
गांधी की वजह से पटेल पीएम नहीं बन पाए, नेहरू बन गए.

इन तीन मामलों की वजह से गांधी जी को झोला भर-भर कर गालियां दी जाती हैं. महात्‍मा गांधी को गाली देना आसान भी है क्योंकि वो गालियों का जवाब गालियों से नहीं देते. ये हिंदुस्तान के लोगों की फितरत है जिस पड़ोसी से दिन में तीन बार चाय की पत्ती मांगकर लाते हैं, पीठ पीछे उसकी बुराई करने से नहीं चूकते तो गांधी किस बला का नाम है. महात्‍मा गांधी से रिश्ता ही क्या है?

आज की पीढ़ी से पूछेंगे तो वो गांधी को कमजोरी का प्रतीक मानती है. ‘मजबूरी का नाम महात्‍मा गांधी’ तो कहावत बनकर रच बस गई है. बच्चों को लगता है कि गांधी कोई दुर्बल इंसान थे जो थप्पड़ खाने पर अपना दूसरा गाल आगे कर देते थे. जो उनके वीडियो गेम स्टार की तरह दुश्मनों को उछल-उछल कर पंच नहीं मार पाते. नई पीढ़ी के लिए गांधी बस 2 अक्टूबर और 30 जनवरी को आने वाले दो पर्व हैं और शायद परीक्षा के चंद सवाल. अगर पेपर में नंबर का मामला ना हो तो शायद गांधी को एक पेज भी ना पढ़ा जाए, उनका महत्व समाप्त कर दिया गया है.

150वीं जयंती पर दुनिया को याद आए ‘बापू’

दुनिया भर के देशों ने अपने हीरोज़ को सहेजा है. अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग हो या फिर एकदम उलट विचारधारा के माओ से तुंग या फिर फिदेल कास्त्रो ही क्यों नहीं. हर मुल्क ने अपने नायकों को नई पीढ़ी तक उन्हीं के तरीके में ढालकर परोसने का भरसक प्रयास किया पर हमारे यहां क्या हुआ ? मोटी-मोटी किताबों और कठिन शब्दों में बापू को बांध कर रख दिया गया. बच्चों को ये बताना चाहिए कि जब देश दंगों की आग में जल रहा था तो जो काम पूरी आर्मी पाकिस्तान से जुड़ी सरहद पर कर रही थी वो काम अकेले दुबले-पतले गांधी ने बंगाल की सरहद पर किया था.

पाकिस्तानी सरहद से पहले बंगाल की सरहद पर शांति ने कदम रखे थे. महात्‍मा गांधी ही वो शख्सियत थे जिनके सम्मान में मानव इतिहास में पहली बार किसी जज ने सिर झुकाया था. बापू को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयोग ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ ने जरूर किया जिसने एक नई लकीर खींची थी पर नतीजा अपने अंजाम तक नहीं पहुंचा. नई पीढ़ी को नए अंदाज में बताना चाहिए कि महात्मा ही वो सुपरपावर से लैस सुपरहीरो हैं जो बंदूक का सामना धोती पहनकर करने की हिम्मत रखते थे. मेरा ये निजी तौर पर मानना है कि गांधी को आज की तकनीक के साथ जोड़कर बच्चों तक पहुंचाया ही नहीं जा रहा.

जीवन के हर क्षेत्र में मिलेंगे महात्‍मा गांधी

बच्चों से निकलकर अगर बड़ों की बात करें तो महात्‍मा गांधी को बस उन तीन सवालों में समेट दिया गया है जिनका जिक्र मैंने ऊपर किया. महात्मा को विस्तार देने को कई लोग तैयार ही नहीं हैं. आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में देख लीजिए, कहीं ना कहीं गांधी जी मिल जाएंगे. स्वच्छता से लेकर जातिगत भेदभाव मिटाने तक और पर्यावरण से लेकर महिला सशक्तीकरण तक जो भी समस्याएं आज देश को नोच रही हैं, वो सब 100 साल पहले ही बापू ने कस कर पकड़ ली थी लेकिन देश का दुर्भाग्य देखिए महात्‍मा गांधी को याद करते हैं तो बस तीन मुद्दों के लिए, वो भी आधे अधूरे तथ्यों को साथ.

ना तो गांधी जी बंटवारा चाहते थे ना ही वो पटेल से किसी तरह का कोई बैर रखते थे. अगर रखते तो कैसे संयोग था कि गांधी की हत्या से ठीक पहले पटेल ही उनके पास बैठे थे. गांधी की हत्या से चंद मिनट पहले ही पटेल यानि देश के गृह मंत्री ने गांधी की बात मानी थी पर जो लोग पटेल के नाम पर बापू को भर-भर कर गालियां देते हैं वो बापू का एक भी उसूल मानने को तैयार नहीं. बापू को ना सही पटेल को ही देखकर सीख लो. ये विचारों का खोखलापन नहीं तो क्या है. भारत का सौभाग्य है कि महात्‍मा गांधी यहां जन्मे क्योंकि आज सात समंदर पार आप गर्व से अपने हीरो का नाम ले सकते हैं. मार्टिन लूथर किंग से लेकर नेल्सन मंडेला और बराक ओबामा तक ने गांधी से प्रेरणा ली है लेकिन जो लोग बापू से प्रेरणा नहीं लेना चाहते वो हम हिंदुस्तानी हैं. आप खुद विचार कीजिए. 150वीं जयंती पर महात्मा गांधी को बार बार नमन.

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