“सुनो… अंधेरा होने से पहले घर आ जाना, अब डर लगता है बेटी सुरक्षित घर पहुंचेगी या नहीं?”

शर्म आती है कि एक ऐसे देश में रह रहे हैं हम लोग, जहां पर लोग अपनी हवस को मिटाने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं. ऐसे लोगों के लिए केवल फांसी की सजा उचित नहीं है.

जिस अनहोनी से वह डर रही थी, आखिर वही हुई. एक लड़की जब घर से बाहर निकलती है तो अपने आस-पास के माहौल को देख वो खुद ही नहीं डरती बल्कि उसके मां-बाप भी डरते हैं.

वे जानते हैं कि माहौल इतना खराब हो चुका है कि बेटी को अकेले भेजना ठीक नहीं है. जितनी देर वो बाहर रहती है मां-बाप के मन में उसके सुरक्षित होने की चिंता सताती रहती है. जब वह घर वापस लौटती है, तब जाकर उनकी जान में जान आती है. यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है. ऐसा रोज होता है.

क्यों है ये डर का माहौल? क्यों कोई लड़की बेफिक्र होकर अपने घर से बाहर नहीं निकल सकती? क्यों उसे इस बात का डर रहता है कि कहीं उसपर किसी वहशी दरिंदे की नजर न पड़ जाए? ऐसी तमाम चिंताएं और डर लेकर वह फिर भी घर से काम या पढ़ने के लिए निकलती है.

चीख-चीखकर तस्वीर कर रही दरिंदगी बयां

हैदराबाद में महिला डॉक्टर अर्पिता (बदला हुआ नाम) के साथ जो हुआ वह बहुत ही झकझोर के रख देने वाला है. अर्पिता की जली हुई लाश वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. यह तस्वीर उसके साथ हुई दरिंदगी को चीख-चीख कर बयां कर रही है. तस्वीर बता रही है कि अर्पिता के आरोपियों के अंदर कितनी कुंठा भरी हुई थी, जिसका शिकार उसे होना पड़ा.

26 साल की एक लड़की अर्पिता, उसके अपने करियर और भविष्य को लेकर कितने अरमान होंगे. मम्मी-पापा ने अपनी बेटी के लिए क्या कुछ नहीं सोचा होगा, लेकिन इन वहशी दरिंदों ने सभी के अरमानों का कत्ल कर डाला.

अर्पिता की हत्या के आरोप में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन आरोपियों के नाम हैं, मोहम्मद पाशा, नवीन, केशावुलू और शिवा. पुलिस का अंदेशा है कि अर्पिता के साथ पहले गैंगरेप किया गया और फिर गला घोंटकर हत्या करने के बाद उसके शव को जला दिया गया, ताकि कोई उसकी पहचान न कर सके और आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर रहें. पर ऐसा हो न सका.

अर्पिता ने जब स्कूटी पंक्चर होने की बात अपनी बहन से कही थी, तो तभी उसे उसकी मदद के लिए आगे आने वाले एक आरोपी का हुलिया अपनी बहन को बता दिया था. जिससे आरोपियों को पकड़ने में मदद मिली. अर्पिता की मौत का मामला अभी सुलझा ही नहीं था कि जहां पर अर्पिता का शव बरामद हुआ, वहीं पर एक महिला की और जली हुई लाश मिलती है. अब एक सवाल यह भी उठता है कि क्या इस महिला की मौत के पीछे भी इन्हीं लोगों का हाथ था या इस वारदात को किसी और ने अंजाम दिया है.

देश के ऐसे तमाम हिस्से हैं, जहां पर बच्चियों और महिलाओं के साथ ऐसी घिनौनी वारदात को अंजाम देने के मामले सामने आते हैं. ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जिन्हें देख रूह तक कांप उठती है. रेप को लेकर देश में तमाम कठोर से कठोर कानून बना दिए गए, लेकिन इसका असर पड़ा कहां.

सुरक्षा है कहां?

राजधानी दिल्ली की ही बात करें तो पिछले साल के मुकाबले दिल्ली में रेप के मामले बढ़े हैं. ऐसा ही हाल अन्य शहरों का भी है. न तो देश का कानून लड़कियों को सुरक्षा दे पा रहा है और न ही देश की पुलिस. क्या हम लड़कियां अब घरों में बंद होकर बैठ जाएं?

मैं जब घर से बाहर जाती हूं तो मेरे मम्मी-पापा मुझे आज भी कहते हैं कि अंधेरा होने से पहले घर आ जाना. ये उनकी रुढ़िवादी सोच नहीं है बल्कि ये उनके अंदर का डर है, जो कहता है कि बस उनकी बेटी सुरक्षित घर पहुंच जाए.

शर्म आती है कि एक ऐसे देश में रह रहे हैं हम लोग, जहां पर लोग अपनी हवस को मिटाने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं. ऐसे लोगों के लिए केवल फांसी की सजा उचित नहीं है. इन दरिंदों को तो ऐसी सजा दी जानी चाहिए, जिसे देखकर कोई भी व्यक्ति किसी भी बच्ची, लड़की या महिला के साथ वहशी हरकत करने से पहले हजार बार सोचे. हमारी सरकार सोई हुई है. निर्भया गैंगरेप के बाद देश आक्रोशित हो उठा था, लेकिन हुआ क्या और बदला क्या. आज भी माहौल वैसा का वैसा ही है.

 

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