बीजेपी के ख़िलाफ़ 35 साल बाद शत्रुघ्न फिर बने ‘विश्वनाथ’

शॉटगन सिन्हा ने बीजेपी के ख़िलाफ़ अपनी फिल्म का ट्रेलर जारी कर दिया है. फिल्मों की तरह वो ख़ुद को हीरो की भूमिका में देखते हैं और मोदी-शाह की जोड़ी को विलेन बता रहे हैं
Shatrughan Sinha joins Congress, बीजेपी के ख़िलाफ़ 35 साल बाद शत्रुघ्न फिर बने ‘विश्वनाथ’

1978 में आई फिल्म विश्वनाथ में शत्रुघ्न का बहुत मशहूर डायलॉग था- जली को आग कहते हैं, बुझी को राख कहते हैं, जिस राख से बारूद बने उसे विश्वनाथ कहते हैं. करीब 35 साल तक बीजेपी के साथ रहने के बाद कांग्रेस का हाथ थामते ही उन्होंने विश्वनाथ वाले अंदाज़ में बीजेपी के ही ख़िलाफ़ बयानों का बारूद उगला. 2019 में वोट डालने वाले नए दौर के करोड़ों वोटर्स ने शायद पहली बार 1978 के इस फिल्मी विश्वनाथ की बातों में असली आग महूसस की होगी. शत्रुघ्न सिन्हा को शॉटगन भी कहते हैं और शॉटगन के शोलों ने बीजेपी को हिलाकर रख दिया है. क्योंकि, कभी बिहारी बाबू के इसी अंदाज़-ए-बयां पर बीजेपी के लोग ताली बजाते थे, लेकिन अब वो बीजेपी के ही शत्रु बन गए हैं. कांग्रेस से हाथ मिला लिया है.

1984 में फिल्मी राहों पर उनके कदमों की रफ़्तार धीमी पड़ने लगी, तो अटल बिहारी वाजपेयी के संपर्क में आकर बीजेपी के नेता और वाजपेयी-आडवाणी की जोड़ी के शागिर्द बन गए. उनके फिल्मी अंदाज़ ने सियासत में उनकी राह आसान बना दी.  तेवर अब भी वही हैं, बस निशाना बदल गया है. पहले भारतीय जनता पार्टी के लिए कांग्रेस के ख़िलाफ़ बोलते थे, अब कांग्रेस के लिए भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ बोलने लगे हैं.

अटल जी के बाद आडवाणी से शत्रुघ्न की नज़दीकियां बढ़ती चली गईं.. लेकिन आडवाणी अपनी ही पार्टी में अपनों से दूर होते चले गए या कर दिए गए.. धीरे-धीरे अपने ही दल के लोगों ने उन्हें दिल से निकालना शुरू कर दिया. जो आडवाणी कभी बीजेपी अध्यक्ष थे, वो पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में डाल दिए गए.. अपने राजनीतिक गुरु की दुर्दशा देखकर उनके शागिर्द ने कांग्रेस में शामिल होते ही बयानों के ज़रिए बारूद उगला. शत्रुघ्न सिन्हा के बाग़ी बोल तो पिछले कुछ साल से लगातार सामने आ रहे थे.. हालांकि, उन्होंने इशारों में कभी कुछ नहीं कहा, पार्टी हाईकमान के ख़िलाफ़ जो कुछ भी बोला, वो सियासी शोलों से कम नहीं था. उम्मीद की जा रही थी, कि बीजेपी ख़ुद ही उनके ख़िलाफ़ कोई कड़ा फ़ैसला लेगी, लेकिन उससे पहले ही शॉटगन सिन्हा खुलकर बीजेपी के शत्रु और कांग्रेस के मित्र बन गए.

अटल बिहारी वाजपेयी के बाद बीजेपी में नंबर दो की पोज़िशन वाले नेता लालकृष्ण आडवाणी गांधीनगर से टिकट कटने के बाद चुप रहे. आडवाणी के बाद नंबर दो की पोज़िशन वाले नेता मुरली मनोहर जोशी कानपुर से टिकट कटने के बाद ख़ामोश रहे. बीजेपी ने जिन्हें लोकसभा स्पीकर बनाया, उन्हीं सुमित्रा महाजन का इंदौर से टिकट फाइनल नहीं किया. मजबूरी में चिट्ठी लिखकर उन्होंने ख़ुद ही चुनाव से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया. फिर बारी शत्रुघ्न की आई. पटना साहिब से उनका भी टिकट कटना तय था और वही हुआ भी. लेकिन, शत्रुघ्न ख़ामोश नहीं रहे. करीब 35 साल तक शत्रुघ्न सिन्हा ने बीजेपी के खेमे में रहकर कांग्रेस के ख़िलाफ़ डायलॉग बोले, फिल्मी अंदाज़ में हमले किए, स्टार प्रचारक की भूमिका निभाई और बीजेपी के लिए भीड़ जुटाई. अब भी वो वही करेंगे, लेकिन फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि शॉटगन का टारगेट बदल गया है. अब तक बीजेपी ने शॉटगन की दोस्ती देखी है अब वो शत्रु की दुश्मनी देखेगी.

यह भी पढ़ें-जानें कैसे वायनाड में राहुल गांधी का खेल बिगाड़ सकते हैं ये तीन ‘गांधी’?

यह भी पढ़ें- शत्रुघ्न सिन्हा ने थामा कांग्रेस का हाथ, बीजेपी आलाकमान को क्या-क्या बोल गए शॉटगन?

Related Posts