पाकिस्‍तान के झूठ का दंश झेल रहा हूं…मैं कुलभूषण जाधव बोल रहा हूं…!

मुझे यहां की जेलों से बेहतर तो श्मशान लगता है. वहां तो एकबार मौत के बाद एक अदद सुकून ए एहसास होता है. कमबख्त इस मुल्क की सलाखें भी बड़ी जालिम हैं....

इस्लामाबाद: मैं निर्दोष हूं…ये कहते-कहते मैं थक चुका हूं. मेरी एक नहीं सुनी गई. मुझ पर अज्जियतों का अंबार लग गया है. अब मैंने सोचना बंद कर दिया है. अब मुझे आदत हो गई है. अब तो कोई दिन बिना कष्ट के बीतता है तो मुझे अजीब लगता है. मैं आदी हो गया हूं. आदी हो गया हूं गालियों का, आदी हो गया हूं मार का. आप लोगों को कुछ बता भी सकता. अपनों को कभी देख भी नहीं सकता. मेरी मां, मेरा परिवार कहां है किस हालत में है मुझे कुछ भी नहीं पता… लेकिन मुझे उम्मीद है कि एक न दिन मैं जरूर हिंदुस्तान की माटी को चूमूंगा और अपने वतन वापस लौटूंगा…यहीं इच्छाशक्ति मुझे जीने के लिए विवश करती है…आप मुझे पहचान पाए. मैं कुलभूषण जाधव बोल रहा हूं.

पाकिस्तान ने मुझे ईरान से अगवा किया था. मैं तो भारतीय नौसेना से रिटायर होकर कुछ काम के सिलसिले में ईरान गया हुआ था. मुझको वहीं से अगवा कर लिया गया. ये पाकिस्तान बोलता है कि मुझे 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्‍तान के मश्‍केल क्षेत्र से गिरफ्तार किया. ऊपर से मेरा नाम कुलभूषण जाधव से हुसैन मुबारक पटेल कर दिया.

मुझे यहां की जेलों से बेहतर तो श्मशान लगता है. वहां तो एकबार मौत के बाद एक अदद सुकून ए एहसास होता है. कमबख्त इस मुल्क की सलाखें भी बड़ी जालिम हैं. यहां मुझसे गम तो मुक्तसर होते नहीं, लगता है जिंदगी ही मुक्तसर हो जाए तो सुकून मिल जाए. मैं आपको बताऊंगा कि मैं यहां हर दिन कैसे गुजारता हूं तो आंखें भी नम हो जाएंगी लेकिन मेरी आंखें रोती नहीं है. मैं भारतीय सेना का जवान हूं. मैं अपने वतन के लिए मरता था. कष्ट सिर्फ इस बात का हुआ कि मैं बेकसूर हूं. कसूरवार होता तो शायद इतना कष्ट नहीं होता. भारतीय नौसेना में रहते कई बार मौत मुझसे टकराई लेकिन मैं डिगा नहीं. जानते हो क्यों. क्योंकि जब शरीर में भारतीय सेना की वर्दी होती है तो चट्टानें भी बालू के ढेर के माफिक नजर आते हैं.
मुझे अब कुछ याद भी नहीं रहता. शायद कुछ दिनों पहले मां आई थी. उसको देखकर दिल बहुत रोया लेकिन मैं मुस्कराता रहा. अगर मैं रो जाता तो मां का क्या होता. वो तो जीते जी मर जाती. मैं नहीं रोया. लेकिन जब मां लौट गई तो मैं बहुत रोया. उस रात मैं सोया ही नहीं. बस सलाखों से बाहर झांकता रहा और मां की परछाई देखता रहा.

मां के साथ मेरी पत्नी भी आई थी. उसमे हिम्मत नहीं थी वो मुझे देख पाए. लेकिन वो भी एक फौजी की पत्नी है हिम्मतवाली तो होगी. उसके चेहरे का नूर कहीं गायब था. ऐसा लग रहा था कि बस वो जिंदगी जी रही है. मेरी और उसकी दशा एक ही जैसी है. वो आजाद होकर भी कैद है. वो कैद है मेरी यादों में. वो कैद है उम्मीदों में. हर रोज टेलीवीजन खोलती है न्यूज चैनल देखती है ताकि मेरा कुछ हाल पता चल पाए. लेकिन यहां तो मुझे कई दिन बीत जाते हैं मैं रोशनी भी नहीं देख पाता हूं.

ये वक्त मेरा बहुत तकलीफों से गुजर रहा है. जब भी दोनों मुल्कों में कोई भी तल्खी होती है तो मुझे भारत समझ लिया जाता है. मैं इनका गुनहगार हो जाता हूं. सुना है कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया. मुझे कुछ भी नहीं पता था लेकिन उस दिन मुझे मिलने वाली गालियां और भी भद्दी हो गईं थीं. मुझे भूखा रखा गया. मुझे लगा कि शायद कुछ तो हुआ होगा सरहद पर तभी ऐसा हो रहा है. यहां मैं तिल-तिल कर मर रहा हूं. मेरे आगे मेरे मुल्क को गालियां दी जाती है. मुझ पर दबाव बनाया जाता है कि मैं बोल दूं कि हां मैं भारत का जासूस हूं. मुझे किस-किस तरह का जुल्म हो रहा है मैं लफ्जों में बयां नहीं कर सकता. सच कहूं बस जिंदा लाश बन गया हूं.

मुझे निदा फाजली का एक शेर याद आता है. वो कहते थे कि यही है ज़िंदगी कुछ ख्वाब चंद उम्मीदें, इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो… मेरे पास भी यही दो खिलौने है जिनके सहारे सांस ले रहा हूं. मेरे कुछ भी नये ख्वाब नहीं. बस पता नहीं इन सलाखों से कभी निकल पाऊंगा कि नहीं.

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मेरी रिहाई की सुनवाई चल रही है. मुझे कॉन्सुलर एक्सेस भी दिया गया है. अभी दो दिन पहले ही मेरी मुलाकात भारतीय उच्चायुक्त से हुई थी. मैं उनके सामने नि:शब्द था. क्या बोलता. कुछ देर की मुलाकात के बाद मुझे रहना तो उन्हीं जालिमों के साथ ही है. मार देंगे मुझको. ऐसे-ऐसे सितम मुझपर होते हैं कि कुछ बोल भी नहीं पा रहा हूं….अब मैं कुछ नहीं बोलूंगा. सारे देशवासियों को मेरा बहुत सारा प्यार. अपना ख्याल रखना. भारत माता की जय, हिंदुस्तान जिंदाबाद….

नोट- पाकिस्तान की सलाखों में बंद भारतीय नौसेना के जांबाज सिपाही कुलभूषण जाधव शायद यही सोचते होंगे. हम उनसे मिल तो नहीं पा रहे लेकिन जेहन में एक अदद सोच जरूर आती है. ये कुलभूषण जाधव नहीं बोल रहे बल्कि ये हम सोच रहे हैं कि पाकिस्तान ने फरेब से जिस हिंदुस्तानी को कैद किया है वो वहां हर दिन, हर रात क्या सोच रहे होंगे.