अभिनंदन से जितना काम मोदी ले रहे उतना एयरफोर्स नहीं ले पाई!

चुनाव आयोग से लेकर पूर्व सैनिकों तक सभी ने अपील कर रखी है कि सेना का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए न किया जाए. लेकिन पीएम मोदी 'दिल चाहता है' फिल्म के एक गाने की तर्ज पर काम कर रहे हैं.
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“अगर पाकिस्तान हमारे पायलट अभिनंदन को नहीं लौटाता तो वह उसके लिए ‘कत्ल की रात’ होती.”

21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के पाटन में थे. वहां ये बड़ी महत्वपूर्ण बात कही. इतना कहते ही मोदी-मोदी के नारे लगने लगे. ऐसा नहीं है कि मोदी की रैली में अभिनंदन-अभिनंदन के नारे लगने चाहिए थे. नैतिक रूप से रैली में पीएम को अभिनंदन का नाम ही नहीं लेना चाहिए था.

ये बात हवा हवाई नहीं है. चुनाव आयोग ने सेना की तस्वीर का इस्तेमाल चुनाव में करने पर रोक लगा रखी है. 156 पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी थी कि कोई भी पार्टी सेना का इस्तेमाल प्रचार के लिए न करे. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने ट्वीट किया है कि “प्रधानमंत्री मोदी लगातार चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं और चुनाव आयोग हर बार इसे नजरअंदाज कर रहा है.’

ये सब बातें एक तरफ, मोदी जी का स्वैग दूसरी तरफ. ‘दिल चाहता है’ फिल्म में उनके लिए एक गाना बना था. “कोई कहे कहता रहे कितना भी हमको दीवाना. हम लोगों की ठोकर में है ये जमाना.” वो अपनी हर रैली, हर स्पीच में सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र जरूर करते हैं. उनकी पार्टी के नेताओं के साथ अभिनंदन की फोटो वाले पोस्टर लग जाते हैं.

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अब भले हर रैली में पीएम मोदी अभिनंदन का जिक्र करते हों. लेकिन जिस वक्त अभिनंदन को पाकिस्तान आर्मी ने पकड़ा था तो पूरे देश में भूचाल आया हुआ था. उनके वीडियोज़ सर्कुलेट हो रहे थे. मीडिया-सोशल मीडिया पर हल्ला मचा था. लेकिन पीएम मोदी ने अपने मुंह से न एक बार अभिनंदन का नाम लिया न कहीं कोई ट्वीट किया. इमरान खान ने पाकिस्तान की संसद में कहा कि कल अभिनंदन को वापस सौंप दिया जाएगा. तब भी नहीं बोले. जिस दिन अभिनंदन की वापसी होने वाली थी उस दिन राजस्थान के चुरू में कहा “एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो गया.”

किसी पार्टी का कोई छोटा मोटा नेता या कार्यकर्ता कानून के उलट कोई काम करे तो एक बार इग्नोर किया जा सकता है. देश की सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठा शख्स वही गलतियां बार बार करे तो उस पद की मर्यादा छलनी होती है. किस मुंह से जनता को कानून का पालन करने की सलाह दे पाएंगे हम?

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