एक काम कर लेती कांग्रेस तो शत्रुघ्न सिन्हा न बनते पार्टी के शत्रु

शत्रुघ्न सिन्हा जब तक बीजेपी में थे तब तक पार्टी से नाराज थे. अब कांग्रेस में हैं तो कांग्रेस को नाराज कर रखा है. कांग्रेस की नाकामी ये है कि सिर्फ शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी में शामिल किया, उनकी पत्नी पूनम सिन्हा को समाजवादी पार्टी के लिए छोड़ दिया. यहीं गड़बड़ हो गई.

6 अप्रैल 2019 को भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक दिन था. ऐतिहासिक दिन तो रोज होता है लेकिन वो कुछ ज्यादा ऐतिहासिक था. शत्रुघ्न सिन्हा की अंतरात्मा को ठिकाना मिल गया और उन्होंने कांग्रेस जॉइन कर ली थी. वो अंतरात्मा जो दो दशक से ज्यादा बीजेपी के पिंजरे में तड़प रही थी. गब्बर भी 20 साल जेल में नहीं रुका था लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी में रुके रहे. जब कांग्रेस में वो आए तो लगा कि सारे विरोधियों को ‘खामोश’ कर देंगे. लेकिन लेटेस्ट घटनाक्रम कुछ ऐसा हुआ कि शत्रुघ्न कांग्रेस के ही प्रत्याशी के शत्रु बन गए हैं.

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दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा के कांग्रेस जॉइन करने के 10 दिन बाद उनकी पत्नी ने पूनम सिन्हा ने सपा जॉइन कर ली. यहीं कांग्रेस से भारी गलती हो गई. उसके साथ ‘घर का भेदी लंका ढाए’ हो गया. पूनम सिन्हा को सपा ने लखनऊ से प्रत्याशी बनाया है. अब लखनऊ में बीजेपी राजनाथ सिंह हैं. कांग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णम हैं. समाजवादी पार्टी से पूनम सिन्हा हैं. कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के प्रत्याशी के खिलाफ समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी यानी पूनम सिन्हा यानी अपनी पत्नी के लिए प्रचार कर रहे हैं.

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शत्रुघ्न सिन्हा असल में किसके शत्रु हैं ये कभी जाहिर नहीं होने देते. जब तक बीजेपी में थे तब तक उसे दुखी कर रखा था. अब कांग्रेस में आकर उसकी लुटिया डुबोने में लग गए हैं. गुड़ से भरी हंसिया से लेकर गले की हड्डी तक के मुहावरे उनके लिए ही बने हैं. इस बीच कांग्रेस प्रत्याशी आचार्य प्रमोद ने कहा कि ‘हमें किसी शत्रुघ्न सिन्हा की जरूरत नहीं है.’ आचार्य जी जरूरत होती भी तो आदमी पहले अपनी घर गृहस्थी संभालेगा कि पहले संन्यासियों को दान पुण्य करने में लग जाएगा?

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वो दोहा है न-

साईं इतना दीजिए जा में कुटुम समाय
मैं भी भूखा न रहूं साधु न भूखा जाय

इस दोहे में साफ लिखा है कि पहले कुटुम समाय. अर्थात पहले परिवार की बात है. शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ भी कर दिया है कि परिवार पहले, पार्टी बाद में. आचार्य प्रमोद काफी क्रोधी आदमी हैं, लेकिन ट्विटर पर. निजी जीवन में क्रोधी होते तो अब तक साक्षी महराज की तरह श्राप दे चुके होते. (शराप और गिलास वाला घटिया जोक कोई नहीं मारेगा यहां)

राहुल गांधी भी सोच रहे होंगे कि वो कौन सा मनहूस दिन था जब शत्रुघ्न की डायलॉग डिलिवरी के झांसे में आ गए. एक तरफ कांग्रेसी हैं जो पार्टी के आगे परिवार की नहीं सोचते. ये बात अलग है कि उनका पूरा परिवार पहले से पार्टी में है.

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