मध्य प्रदेश बीजेपी में अंदरूनी राजनीति चरम पर: ‘चोर से बोला चोरी कर, साहूकार से बोला जागते रहना’

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा (Rameshwar Sharma) को विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है. वहीं पहले मंत्रीमंडल और अब प्रोटेम स्पीकर, इस सब को लेकर पार्टी का एक धड़ा खासा नाराज़ हो रहा है.
Madhya Pradesh BJP Internal politics, मध्य प्रदेश बीजेपी में अंदरूनी राजनीति चरम पर: ‘चोर से बोला चोरी कर, साहूकार से बोला जागते रहना’

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजनीति में कुछ इसी तरह की कहावत का दौर है. तमाम वरिष्ठ बीजेपी विधायकों को किनारे करते हुए विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के पद पर रामेश्वर शर्मा (Rameswar Sharma) आसीन हो गए हैं.

विधायक रामेश्वर शर्मा की खूबी ये हैं कि वो शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के खास सिपहसालार हैं और अपने विवादित बयानों को लेकर मीडिया की सुर्खियां बटोरते हैं. संसदीय ज्ञान और इस पद के लिए ज़रुरी तत्वों से रामेश्वर शर्मा का कोई लेना-देना अभी तक नहीं रहा है.

रामेश्वर शर्मा दूसरी ही बार के विधायक

लिहाज़ा बीजेपी के अंदरखाने चर्चाएं ज़ोरों पर हैं कि शिवराज सिंह ने अपना व्यक्ति प्रोटेम स्पीकर के पद पर बैठा दिया है. 20 जुलाई से सत्र होने वाला है, उस समय स्पीकर की भूमिका अहम रहने वाली है. वरिष्ठता की बात करें तो रामेश्वर शर्मा दूसरी ही बार के विधायक हैं औऱ संसदीय ज्ञान के मामले में अभी तक उनकी परख हो नहीं सकी है.

ऐसे में सालों क्या दशकों पुराने विधायकों औऱ संसदीय समितियों में सदस्य रहे विधायकों को छोड़कर एक नए व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद देना कहीं न कहीं पार्टी के बड़े नेताओं को पसंद नहीं आ रहा. मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद चुनौतियां क्या कम थीं, जो अब इस एक फैसले ने कई और अपनों को दुश्मनों की लाइन में खड़ा कर दिया है.

तारीख 18 दिसंबर 2019, तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने विधानसभा समितियों का गठन किया था. उस समय विधानसभा की कार्यसंचालन समिति में 6 सदस्य मनोनीत किए थे. जिसमें बिसाहूलाल सिंह, लक्ष्मण सिंह, झूमा सोलंकी, संजय पाठक, जगदीश देवड़ा औऱ यशपाल सिंह सिसोदिया थे.

प्रोटेम स्पीकर बनाने की पहले ये थी रणनीति

बीजेपी की सत्ता वापसी के बाद पार्टी के ही बड़े नेताओं ने ये तय किया था कि इसी समिति से वरिष्ठता को मद्देनज़र रखते हुए जगदीश देवड़ा को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाए. लेकिन जब जगदीश देवड़ा मंत्री बन गए तो बाकी दो विधायकों संजय पाठक औऱ यशपाल सिसोदिया को छोड़कर एक गैर अनुभवी विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया.

अनुभवी विधानसभा अध्यक्ष की ज़रुरत होगी

मुमकिन है कि ये फैसला सिर्फ 15 दिन के लिए हो सकता है क्योंकि हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि सदन में बीजेपी को किसी मज़बूत और अनुभवी विधानसभा अध्यक्ष की ज़रुरत होगी. जो न सिर्फ संसदीय ज्ञान में पारंगत हो बल्कि विपक्ष और सरकार के सामंजस्य बैठा सके.

इतना ही नहीं, उसे सत्ता पक्ष, विपक्ष और आसंदी की शक्ति का भी पूरा ज्ञान होना अनिवार्य है. बीजेपी विधायक के तौर पर रामेश्वर शर्मा सिर्फ अपने विवादित बयानों के लिए ज़रुर कई बार सुर्खियां बटोर चुके हैं लेकिन संसदीय व्यवस्थाओं में सरकार उनका किस तरह से उपयोग करने वाली है ये देखना दिलचस्प होगा.

ये विधायक वरिष्ठता में सबसे ऊपर

अब बात करते हैं कि रामेश्वर शर्मा ही क्यों? क्या पार्टी के पास एक यही चेहरा था जिसे प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता? जबकि बीजेपी के विधायक दल में से मंत्रियों को हटा भी दिया जाए तो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, गौरी शंकर बिसेन, राजेंद्र शुक्ला, रामपाल सिंह, यशपाल सिसोदिया, रमेश मेंदोला सरीखे सीनियर विधायक हैं जो कि संसदीय ज्ञान में न सिर्फ पारंगत है बल्कि वरिष्ठता के लिहाज से भी रामेश्वर शर्मा से काफी ऊपर हैं.

पार्टी का एक धड़ा खासा नाराज़

पहले मंत्रीमंडल और अब प्रोटेम स्पीकर, इस सब को लेकर पार्टी का एक धड़ा खासा नाराज़ हो रहा है. खासकर ये कि रामेश्वर शर्मा में ऐसा क्या गुण पार्टी ने देखा कि उन्हें प्रोटेम स्पीकर बना दिया गया. इसे लेकर पार्टी के बड़े नेता नाराज़ तो हैं और हाईकमान से अपनी नाराज़गी का इज़हार भी कर चुके हैं.

”बीजेपी में अब नई तरह की राजनीति का उदय”

हालांकि सूत्रों की मानें तो पार्टी हाईकमान तक को इस बात की जानकारी नहीं थी कि प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा को बना दिया गया है. एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने बातचीत में कहा कि बीजेपी में अब नई तरह की राजनीति का उदय हो रहा है. ‘यहां चोर से कहा जाता कि चोरी करो और साहूकार से कहा जाता है कि जागते रहना’.

पार्टी के कई पुराने और खाटी नेता इस बात को अब खुलकर कहने लगे हैं कि कुछ बडे़ नेता पार्टी के अंदर ही राजनीति करके अपनी बिसात बिछाने का काम करते हैं. अगर शह और मात का ये खेल पार्टी के अंदर ही खेला जाता रहा तो ये पार्टी के हित में नहीं होगा और आने वाले दिनों में इसके परिणाम काफी घातक होंगे.

क्या सिंधिया के आने से पार्टी खेमों में बंट रही है?

पार्टी को ये नहीं भूलना चाहिए कि बीजेपी को 24 उपचुनावों में जनता के बीच जाना है. बीजेपी के कई नेता ये भी मानते हैं कि सिंधिया के पार्टी के अंदर आने के बाद पार्टी खेमों में बंट रही है जो कि पहले नहीं होता था. जहां हर ज़िले में सिंधिया कांग्रेस, दिग्विजय कांग्रेस और कमलनाथ कांग्रेस होती थी, वहीं अब हर ज़िले में सिंधिया बीजेपी की सुबगुबाहट सुनाई देने लगी है.

‘सम्मान की रक्षा करने का प्रयास किया गया’

मतलब साफ है कि पार्टी के अंदरखाने सब कुछ ठीक तो नहीं चल रहा. सूत्र बताते हैं कि विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के नाम को लेकर एक दर्जन से ज़्यादा नामों की फेहरिस्त थी लेकिन मौका रामेश्वर शर्मा को दिया गया. दबी जुबान में बीजेपी नेता ये भी बता रहे हैं कि रामेश्वर शर्मा खुद मंत्री पद की रेस में थे लेकिन विश्वास सारंग के बाजी मारने के बाद प्रोटेम स्पीकर बनाकर रामेश्वर शर्मा के सम्मान की रक्षा करने का प्रयास किया गया है.

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