लिंचिंग के खिलाफ खत लिखनेवालों को ममता से शाबाशी, ‘जय ममता’ ना बोलने पर हुई पिटाई पर क्या कहेंगी दीदी?

ममता बनर्जी उनकी पीठ तो थपथपा रहे हैं जो लिंचिंग के खिलाफ पीएम को खत लिख रहे हैं लेकिन उनके ही नाम पर उनके ही राज्य में जो कुछ हो रहा है उस पर वो खामोश हैं.

पीएम मोदी को 49 बुद्धिजीवियों ने जिनमें अभिनेता, फिल्मकार, इतिहासकार शामिल थे खत लिखा था हंगामा मच गया. ये उसी घटना की पुनरावृत्ति थी जो पिछली मोदी सरकार में घटी थी जब कई साहित्यकारों ने असहिष्णुता के बढ़ने का आरोप लगाकर और सरकार के नियंत्रण ना कर पाने पर पुरस्कार वापसी अभियान चला दिया था.

इस खत में लिखा गया कि पीएम ने भले ही लिंचिंग की घटनाओं की आलोचना की हो लेकिन ज़रूरी है कि इस पर कार्रवाई भी हो. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने उस खत को भेजनेवाले लोगों की तारीफ की. ज़ाहिर है, राजनीतिक मतभेदों के बीच ममता को ये खत उनके पक्ष को पुष्ट करनेवाला लगा होगा लेकिन सवाल इसके एक दिन बाद खड़ा हो गया.

पहले से राजनीतिक हिंसा की तपिश झेलते बंगाल के हुगली में एक प्रोफेसर को ममता के समर्थकों ने बुरी तरह इसलिए पीट डाला क्योंकि वो ‘जय ममता’ बोलने को तैयार छात्रों को बचा रहे थे. प्रोफेसर का संबंध हीरालाल पाल कॉलेज से संबंध हैं. ये पहला मामला है जब ममता की जय ना बोले जाने पर मारपीट की गई. इससे पहले जय श्री राम और जय हनुमान ना बोले जाने पर हिंसा होती रही है. खास बात है कि जो खत पीएम को भेजा गया उसमें ये ध्यान में लाया गया है कि ‘जय श्री राम’ के नारे को हिंसक गतिविधियों के दौरान इस्तेमाल में लाया जाता है. अब उस खत की तारीफ करनेवाली और खुद भी एक-दो जगह ‘जय श्री राम’ के नारे पर भड़कीं ममता से सवाल ये है कि क्या वो अपनी जय जयकार ना करनेवालों को पीटे जाने का समर्थन करेंगी? समर्थन नहीं करतीं तो क्या कार्रवाई करेंगी?

हीरालाल पाल कॉलेज में जो कुछ हो गया वो वैसा ही कुछ है जिसके खिलाफ ममता बनर्जी रही हैं और अब वो 49 लोग हैं जो पीएम को खत भेज रहे हैं. कॉलेज में टीएमसी समर्थक ‘जय ममता’ का नारा ना लगानेवाले छात्रों को पीट रहे थे. तब एक प्रोफेसर बीच-बचाव में आ गए. उनके साथ भी टीएमसी समर्थकों का बर्ताव वही रहा जो छात्रों के साथ था.

अब पीड़ित प्रोफेसर सुब्रतो चटर्जी की तरफ से उत्तरपाड़ा थाने में तृणमूल छात्र परिषद के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज करवाई गई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.