नया ट्रैफिक नियम रास नहीं आ रहा? भारी भरकम चालान को कोस रहे हैं? सबसे पहले ये पढ़ें

बहुत से लोग ये कह रहे हैं कि चालान की आड़ में ट्रैफिक पुलिस रिश्वत वसूल रही है. ये कितना सच है, नहीं पता लेकिन अगर ऐसा हो रहा है तो आप इसे रोक सकते हैं.

सरकार ने ट्रैफिक नियमों में बदलाव किया है. नियम तोड़ने पर लगाए जा रहे जुर्माने की राशि को लगभग दोगुना कर दिया गया है. कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जब लोगों से लाखों रुपये का चालान वसूला गया है. लोग ट्रैफिक पुलिस को कोस रहे हैं. मगर क्यों?

आपसे चालान वसूला जा रहा है, क्या इसके ट्रैफिक पुलिस जिम्मेदार है? सच में? नहीं. शायद इसके लिए सिवाय आपके कोई भी जिम्मेदार नहीं है. एकलौती गलती आपकी है. हो सकता है आपको मेरी बात रास न आए लेकिन ये सच है.

नियम बनाए गए हैं आपकी सुरक्षा के लिए. आप कहेंगे इतने कड़े नियम? जब कड़े नहीं थे, जुर्माने की राशि कम थी, आपने नियमों का पालन किया? नहीं किया. इसीलिए सख्ती दिखाई गई है. सख्ती भी आपको बचाने के लिए. ताकि आप सही सलामत अपनी मंजिल पर पहुंच सकें.

अब आप ट्रैफिक पुलिस की तरफ से काटे गए लाख-लाख रुपये के चालान का हवाला देंगे. आप ही बताइए अब तक जितने भी मामले आये हैं क्या वो सही थे? हाल ही में एक ओवरलोडेड ट्रक का 6 लाख रुपये का चालान काटा गया. कोई कुछ भी कहे इसमें गलती ट्रक के मालिक की थी. पहली गलती नियम तोड़ने की और दूसरी नियमों को नजरंदाज करने की. न जाने कितने ही मामले सामने आए हैं जब ओवरलोडेड ट्रक पलटे और बड़ा हादसा हुआ. इसे रोकने के लिए पहल की जा रही है तो इसमें गलत क्या है?

बहुत से लोग ये भी कह रहे हैं कि चालान की आड़ में ट्रैफिक पुलिस रिश्वत वसूल रही है. लोग कहते हैं चालान की राशि इतनी ज्यादा है कि सब पुलिस को आसानी से कम पैसे देकर मामला रफा-दफा करने के लिए तैयार हो जाते हैं (मानो जिसका चालान 20,000 का हुआ वो 5,000 देकर बच जाएगा). कुल मिलाकर ट्रैफिक पुलिस के पौ-बारा हैं. ये कितना सच है, नहीं पता लेकिन अगर ऐसा हो रहा है तो आप इसे रोक सकते हैं. जब आप हर नियम का पालन करेंगे तो न कोई चालान होगा न उसके लिए रिश्वत ली जा सकेगी.

अब सबसे खास बात ये नियम किसलिए बनाए गए हैं? आपकी जान बचाने के लिए. पिछले कुछ सालों में रोड एक्सीडेंट के केस बढ़ते जा रहे थे, एक्सीडेंट के आंकड़े कम करने के लिए नियम सख्त किए गए.

न जाने कितने बच्चों ने अपने पापा, चाचा या फिर ताऊ से कहा होगा कि शाम को काम से लौटते वक्त चॉकलेट लेते आना मगर न उन तक चॉकलेट पहुंची और न ही चॉकलेट लाने वाला. वजह पापा/चाचा/ताऊ ने जल्दबाजी में सड़क पर चलते वक्त बरती जाने वाली छोटी-छोटी सावधानियों को इग्नोर किया और रोड एक्सीडेंट में उनकी जान चली गई.

ये रिश्ते कैसे भी हो सकते हैं, सड़क किसी भी जगह की हो सकती है, एक्सीडेंट का तरीका कुछ भी हो सकता है मगर जाता हमेशा हमारा अपना है और जाने वाला फिर कभी वापस नहीं आता. वो पीछे छोड़ जाता है पछतावा, एक वजह जिससे उसकी जान बच सकती थी.

मैं ये सब लिख रही हूं क्योंकि मेरा कोई अपना भी रोड एक्सीडेंट में मारा गया. ड्राइवर की लापरवाही ने परिवार के दो सदस्यों की जान निगल ली, रिश्तेदारी के एक भईया के सर पर चोट आई जिसकी वजह से वो पागल हो गए. हादसा 20 साल पहले हुआ मगर परिवार के लोगों को आज भी कसोटता है. वो हादसा भी रोका जा सकता था.

हमारे देश में ढेर सारे लोग ऐसे हैं जो दूसरे देश के कानून का उदाहरण देते हैं, वहां की तारीफ करते हैं, मगर जब ऐसा ही कुछ अपने देश में होता है तो उन्हें रास नहीं आता. ये मत कीजिए. चीजों को मानिए और थोड़ा सपोर्ट कीजिए. ट्रैफिक नियम पर मीम पोस्ट करने और इसकी खिल्ली उड़ाने की बजाय इसे सीरियसली लीजिए.

इस मुद्दे को दुनियादारी और पॉलिटिक्स से अलग करके देखिए, किसी सरकार और पार्टी से न जोड़कर सिर्फ अपने और करीबियों के बारे में सोचिए. हो सकता है आपकी एक कोशिश से अखबारों और तमाम न्यूज एजेंसिंयों में दिखाई जा रही हेडलाइन ‘हेलमेट या सीटबेल्ट न पहनने से गंवाई जान’ से बदलकर ‘हेलमेट की वजह से बची जान’ हो जाए.

भारत में पिछले एक दशक में करीब 12 लाख जिंदगियां रोड एक्सीडेंट की बली चढ़ चुकी हैं. एक करोड़ से ज्यादा लोग या तो गंभीर रूप से घायल हो गए या फिर हादसे ने उन्हें दिव्यांग की श्रेणी में लाकर रख दिया. लोगों ने इन हादसों को ऊपर वाले की करनी का या किस्मत का हवाला देकर भले ही अपना पल्ला झाड़ लिया हो मगर आधे से ज्यादा हादसों को रोका जा सकता था. इनमें कुछ हादसे सामने वाले की गलती से हुए और कई खुद की लापरवाही से.

कोई भी ट्रैफिक नियम हादसों को तब तक नहीं रोक सकता जब तक आप सपोर्ट नहीं करेंगे. इसलिए आगे बढ़िए, जैसे आपने कई पुरानी चीजों को छोड़कर खुद को अपडेट कर लिया है वैसे ही ट्रैफिक से जुड़े सुरक्षा नियमों को भी अपनाइए. कोई दूसरा नियम तोड़ता है उससे गलत सीखने की बजाय आप उसे सिखाइए, नियमों में चलना और गलती से बचना. आप नियमों को फॉलो करेंगे इसका सबसे बड़ा फायदा आपको ही मिलना है. फिर किसी ट्रैफिक पुलिस वाले की हिम्मत नहीं होगी कि वो आपको रोके और पैसे वसूले.

आखिर में इससे पहले कि ये सब पढ़कर आप मुझे समझाइश दें कि मैं ज्ञान न दूं, गोदी मीडिया जैसे कमेंट करे, खबर लिखने के लिए कोई दूसरा मुद्दा गिना जाएं. मैं बस ये कहना चाहूंगी कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहने इन तस्वीरें जरूर देख लें…

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ऐसी न जानें कितनी तस्वीरों से इंटरनेट भरा पड़ा है और इन तस्वीरों में लगातार इजाफा हो रहा है. इसे कम किया जा सकता है और इसे कम करना सिर्फ और सिर्फ आपके हाथ में है.

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