हद कर दी आपने…रेप को एंजॉय कौन करता है मोहतरमा?

लड़कियों का रेप हो उसे एंजॉय करें! मजा लें और जब सबूत मिटाने के लिए उनका मुंह दबाकर आखिर में उन्हें मार दिया जाए तब?? अन्ना आप इस पर भी कुछ वाहियात सी पोस्ट लिख देना क्योंकि अच्छे की तो आप से उम्मीद भी नहीं है.

अन्ना लिंडा ईडन,

आपके नाम के साथ कुछ और नहीं लगाऊंगी क्योंकि आपकी आज की फेसबुक पोस्ट के बाद आपने इसका विकल्प मेरे पास नहीं छोड़ा है. आप ने आज फेसबुक पर लिखा, किस्मत रेप जैसी है…अगर आप इसे रोक नहीं पा रहे तो उसका मजा लीजिए. इस पोस्ट के साथ आपने एक तरफ जलभराव से जूझते कोच्चि की तस्वीर और दूसरी तरफ पति की पेस्ट्री खाते हुए फोटो पोस्ट की. फिर आप ने मैसेज दिया कि मुसीबत के हाल में खुश रहना सीखें…

मोहतरमा हद होती है किसी चीज को दूसरी से कनेक्ट करने की. लानत है आपकी सोच पर जो इतनी घटिया है कि आपने एक पीड़ा को दूसरी बड़ी और असहनीय पीड़ा से जोड़ा.

मैं आपसे बस ये पूछना चाहती हूं कि रेप को एंजॉय कौन करता है? जो एंजॉय किया जाए वो रेप होता है? आप एक महिला हैं, आपको समझ नहीं आता ये फर्क? शायद आपने हैरासमेंट और मानसिक उत्पीड़न को कभी महसूस न किया हो जिससे आपके देश की हर लड़की कभी और कहीं न कहीं गुजरी होगी.

मैडम आप जैसी सोच सबकी हो जाए तो फिर सारी दिक्कतें ही खत्म, रेप के केस ही नहीं बनेंगे. किसी को सजा दिलाने की जरूरत भी नहीं होगी. लड़कियों का रेप हो उसे एंजॉय करें, मजा लें और जब सबूत मिटाने के लिए उनका मुंह दबाकर आखिर में उन्हें मार दिया जाए तब?? अन्ना आप इस पर भी कुछ वाहियात सी पोस्ट लिख देना क्योंकि अच्छे की तो आप से उम्मीद भी नहीं है.

अच्छा हां, अब आप कहेंगी कि आपको खेद है. आपने तो माफीनामा भी पोस्ट कर दिया है. बता दूं आपका माफीनामा, पिछली पोस्ट से भी ज्यादा घटिया है. आपने लिखा, सोशल मीडिया पर आपके इरादों से परे चर्चा हुई. अरे इरादों से परे तो आपने लिखा. क्या आपके जहन में शब्दों और उदाहरणों की कमी हो गई थी? कुछ और नहीं मिला कोच्चि के हालात से जोड़ने को? रेप ही मिला? फिर इरादे तो आपके खराब हैं, सोशल मीडिया को ब्लेम मत करिए.

आप माफीनामे में लिखती हैं एक प्रतिनिधि की पत्नी के रूप में आपने लोगों का दुख दर्द देख उनके साथ रहने की कोशिश की है… अच्छा ऐसी कोशिश? मोहतरमा दर्द बांटना ये नहीं होता कि आप घर बैठकर पेस्ट्री खाएं और फेसबुक पर पोस्ट लिखें. दर्द बांटना था तो लोगों की मदद के लिए आगे बढ़तीं. क्या किसी काम आईं आप लोगों के? सिवाय ये पोस्ट लिख उन्हें भड़काने के आपने कोच्चि में जलभराव से जूझते लोगों के लिए क्या किया?

ज्यादा कुछ हो पाए तो एक पोस्ट और लिख दीजिएगा. आपकी इस सोच से ताज्जुब होता है  कि महिला होते हुए भी हमारे समाज और महिलाओं के बारे में आपकी ये सोच है. अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है जब कठुआ और अलीगढ़ में मासूमों को दरिंदगी का शिकार बनाया गया. ऐसे न जाने कितने ही मामले हैं. शायद आपको ये सब कभी नहीं दिखा इसलिए आप कुछ भी लिख रही हैं.

आप एक सांसद की पत्नी हैं, जिनकी कुछ जवाबदारी और जिम्मेदारी होती है लोगों के प्रति. इसके बावजूद इस तरह की सोच आपको जंचती नहीं है. जब आप ही ये सब कहेंगी तो दूसरों से कोई क्या उम्मीद करे. मैं नहीं मानती कि रेप से बड़ा क्राइम कुछ है…आपके तर्क से इस जुर्म में परदा डाला जा रहा है.

आपको लोगों की इतनी ही फिकर है न तो बस एक काम करिए आप ये वाहियात बातें करना बंद कर दीजिए. बाकी आप हैं तो एक महिला ही, इस नाते ही सही, कभी सोच-समझ कर लिख लीजिया करिए. और हां अबकी बार माफीनामा जरा ढंग का लिखकर पोस्ट कीजिएगा.

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