Opinion : क्या कांग्रेस ने अदनान सामी पर सनाउल्लाह से बात की?

बतौर विरोधी दल कांग्रेस को सवाल उठाने का हक है. लेकिन सामी पर उठाए गए सवाल के पीछे के कमजोर तर्कों ने सनाउल्लाह पर किए गए कांग्रेस के गंभीर सवाल को भी कमजोर कर दिया.
Kargil War veteran Mohammed Sanaullah NRC, Opinion : क्या कांग्रेस ने अदनान सामी पर सनाउल्लाह से बात की?

अदनान सामी को पद्मश्री क्यों? भारत के खिलाफ युद्ध लड़ने वाले पाकिस्तानी फौजी के बेटे को देश का पद्म सम्मान क्यों? करगिल में भारत के लिए लड़ने वाले सनाउल्लाह पर एनआरसी की गाज क्यों? सनाउल्लाह को विदेशी घोषित करने की कार्रवाई क्यों? अदनान और सनाउल्लाह से जुड़े दोनों सवाल कांग्रेस ने एक ही दिन पूछे.

दोनों को एक-दूसरे में उलझाकर पूछे. अदनान के पद्मश्री पर सवाल उठाने के लिए सनाउल्लाह का इस्तेमाल किया. बतौर विरोधी दल कांग्रेस को सवाल उठाने का हक है. लेकिन सामी पर उठाए गए सवाल के पीछे के कमजोर तर्कों ने सनाउल्लाह पर किए गए कांग्रेस के गंभीर सवाल को भी कमजोर कर दिया.

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी और पाकिस्तानी फौज में फर्क जरूरी

हम अक्सर आतंकियों और पाकिस्तानी फौज के बीच का फर्क भूल जाते हैं. निश्चित तौर पर इस घालमेल के लिए सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सत्ता और वहां की सेना ही जिम्मेदार है. लेकिन ये पिछले कुछ वर्षों की बात है. उन दिनों की नहीं, जब अदनान सामी के पिता पाकिस्तानी फौज में थे और भारत के खिलाफ जंग लड़ी थी.

Kargil War veteran Mohammed Sanaullah NRC, Opinion : क्या कांग्रेस ने अदनान सामी पर सनाउल्लाह से बात की?

तो क्या भारत के खिलाफ लड़ने वाले पाकिस्तानी फौजी को सम्मानित किया जाए? बिल्कुल नहीं. लेकिन इससे अदनान पद्मश्री सम्मान के अयोग्य भी नहीं हो जाते. हमने लंदन में जन्मे पाकिस्तानी मूल के अदनान सामी को नियमों के तहत नागरिकता दी है. और अब नियमों के तहत ही पद्म सम्मान भी. ऐसे में नागरिकता कानून को नागरिकों के साथ भेदभाव का औजार बताने वाली कांग्रेस इस मुद्दे पर भटकाव की राह पर साफ-साफ नजर आ रही है. और अगर यह भटकाव नहीं है, तो फिर सोची-समझी मतलब की राजनीति जरूर है.

‘नागरिकता’ पर लड़ रही कांग्रेस की बड़ी भूल

ये कैसे हो सकता है कि आप एक तरफ नागरिकता कानून में पाकिस्तान के मुस्लिमों को भी शामिल करने की बात करें, तो दूसरी तरफ सिर्फ इस बात के लिए पाकिस्तान के एक पूर्व फौजी के बेटे को अयोग्य ठहरा दें क्योंकि वह भारत के खिलाफ युद्ध लड़ चुके फौजी का बेटा है.

क्या कांग्रेस को (या किसी और को भी) इस वजह से और भी ज्यादा उदार नहीं होना चाहिए कि कोई भी फौजी बस अपने देश की ड्यूटी पर होता है. और जो अपने देश के लिए वफादार रहा हो हम उसकी पीढ़ियों का तिरस्कार सिर्फ इस बिना पर नहीं कर सकते, क्योंकि उस फौजी की वफादारी हमारे दुश्मन देश के लिए थी. सिर्फ इस वजह से उसका हक नहीं मार सकते कि उसकी पैदाइश एक फलां परिवार में हुई है.

क्या ये असहिष्णुता और कट्टरता नहीं है?

कांग्रेस आए दिन बीजेपी पर आरोप लगाती है. कट्टरता और असहिष्णुता का आरोप. मनमानी का आरोप. विरोधी आवाज को दबाने का आरोप. कांग्रेस के ये आरोप तभी तक जायज लगेंगे, जब तक वह खुद इस काम में उलझती हुई न नजर आए.

अदनान सामी को पद्मश्री देने का विरोध इस मोर्चे पर बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस के आरोपों को कमजोर करता है.

कश्मीर में कुछ परिवारों से कुछ युवाओं ने आतंक की राह पकड़ ली. गुमराह होकर या स्वेच्छा से. वजह जो भी हो, क्या हमने ऐसे परिवारों का हुक्का-पानी बंद कर दिया? क्या हम उन परिवारों के दूसरे बच्चों या बड़ों को सरकारी सुविधाएं और सम्मान देना बंद कर देंगे?

क्या ब्रिटेन गांधी-नेहरू का सम्मान नहीं करता?

पिछले ही साल ब्रिटेन ने गांधी जी की 150 जयंती पर सिक्का जारी करने का फैसला किया. ये फैसला लेते हुए ब्रिटिश के वित्त मंत्रालय ने कहा कि बापू को ये सम्मान इसलिए, जिससे कि दुनिया उनकी सीख को कभी न भूले.

Kargil War veteran Mohammed Sanaullah NRC, Opinion : क्या कांग्रेस ने अदनान सामी पर सनाउल्लाह से बात की?

निश्चित तौर पर बापू अतुलनीय हैं. लेकिन सत्य के हथियार से जिन अंग्रेजों को उन्होंने पूरी सत्ता छोड़ने पर मजबूर किया, उन्हीं की पीढ़ियां अगर गांधी से प्रेरणा ले रही हैं और उन्हें सम्मान बख्श रही है, तो ये काम भी खुद में एक बड़ी सीख है. गांधी-नेहरू की विरासत सहेजने का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी को यकीनन इस दावे की गरिमा के अनुरूप काम करना था.

सनाउल्लाह बनाम सामी की जरूरत नहीं

अदनान सामी को पद्मश्री देने का विरोध करते हुए कांग्रेस ने जिन आर्मी के रिटायर ऑफिसर सनाउल्लाह का जिक्र किया है, उन्हें भारतीय नागरिक न मानने से किसी भी भारतीय को सदमा पहुंचा है. जिस इंसान ने देश के लिए जंग लड़ी हो, उसे नागरिकता साबित करनी पड़े, इससे बड़ा दुर्भाग्य हो ही नहीं सकता. लेकिन सनाउल्लाह के केस को समझने की भी जरूरत है.

और इसे समझने के लिए एनआरसी में नाम न होने पर खुद सनाउल्लाह के 31 अगस्त 2019 के बयान को सबसे पहले सुनना चाहिए. तब सनाउल्लाह ने कहा था- “मैं ये उम्मीद नहीं कर रहा हूं कि लिस्ट में मेरा नाम होना चाहिए, क्योंकि मेरा मामला हाईकोर्ट में पेंडिंग है. मुझे देश की न्यायपालिका में पूरा भरोसा है और ये उम्मीद भी कि मुझे न्याय जरूर मिलेगा.”

Kargil War veteran Mohammed Sanaullah NRC, Opinion : क्या कांग्रेस ने अदनान सामी पर सनाउल्लाह से बात की?

सनाउल्लाह से तो पूरे देश को सहानुभूति है

दरअसल, पिछले साल मई महीने में सनाउल्लाह को न सिर्फ विदेशी घोषित कर दिया गया था, बल्कि उन्हें इसके बाद डिटेंशन कैंप भी भेज दिया गया था. 2017 में सेना से रिटायर हुए सनाउल्लाह तब अपनी दूसरी जॉब के तहत सीमा पुलिस में सहायक उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे.

सनाउल्लाह को विदेशियों के लिए बने न्यायाधिकरण ने विदेशी माना था. और जो कुछ उनके साथ हुआ उसकी बड़ी वजह रही 2008 में सनाउल्लाह का नाम मतदाताओं की सूची में ‘डी’ यानी संदिग्ध मतदाता के रूप में दर्ज होना. क्या कांग्रेस ये याद करना चाहेगी कि तब राज्य और केंद्र में किसकी सरकार थी?

कहा जाता है कि 1987 में सेना में शामिल होने वाले सनाउल्लाह ने एक सुनवाई के दौरान गलती से 1978 में सेना में भर्ती होने की बात कह दी थी. जबकि तब (1978 में) वह सिर्फ 11 साल के थे. इस वजह से भी सनाउल्लाह को लेकर पेचीदगियां बढ़ती चली गईं.

विदेशी घोषित होने पर सनाउल्लाह ने कहा भी था कि उनका परिवार 1935 से ही असम में रह रहा है. उनके पास नागरिकता से जुड़े सारे दस्तावेज हैं. तभी उन्होंने न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील करने की बात भी कही थी और बाद में अपील की भी. हाईकोर्ट के निर्णय से पहले ही असम में एनआरसी आ गया, जिसमें स्वाभाविक रूप से सनाउल्लाह का नाम नहीं था. जैसा कि खुद उन्होंने माना भी. मामला हाईकोर्ट में है और पूरे देश को उम्मीद है कि उनकी नागरिकता सम्मान के साथ बहाल होगी.

क्या कांग्रेस ने सनाउल्लाह से पूछा है?

अब इसी मामले को कांग्रेस ने अदनान सामी के सम्मान से जोड़कर उठाया है. जिसकी जरूरत शायद देश के लिए करगिल में दुश्मनों से लड़ने वाले खुद सनाउल्लाह भी नहीं समझते होंगे. क्योंकि एक फौजी की पहली ड्यूटी सनाउल्लाह से बेहतर न कांग्रेस समझ सकती है और न ही कोई और राजनीतिक पार्टी. ऐसे में पाकिस्तानी फौजी के बेटे अदनान सामी को पद्मश्री देने का विरोध क्या सनाउल्लाह करते हैं? कांग्रेस ने ये बात क्या सनाउल्लाह से पूछी है? पूछना चाहिए.

 

ये भी पढ़ें-   गौरव चंदेल हत्याकांड: मिर्ची गैंग का शार्प शूटर और एक महिला गिरफ्तार, पुलिस ने दोनों को कोर्ट में किया पेश

भोपाल गैस पीड़‍ितों की आवाज बनने के लिए मिला ‘पद्मश्री’, उनका संगठन दाने-दाने को मोहताज

Related Posts