नागरिकों को पाकिस्तान भेजने का हक ‘एसपी साहब’ को किसने दिया?

मेरठ के सिटी एसपी ने जो बोला वो डायलॉग सोशल मीडिया के ट्रोल्स बोलते हैं. तो क्या खाकी वर्दी के हथकंडों में लाठी चार्ज, आंसू गैस, वॉटर कैनन के अलावा अब सोशल मीडिया ट्रोलिंग के डायलॉग भी शामिल हो चुके हैं?

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं. दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन उग्र हुआ तो दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी और लाइब्रेरी में घुसकर स्थिति को नियंत्रण में लिया. इसे स्वीकार किया गया क्योंकि हालात बिगड़ चुके थे, पुलिस एक्शन जरूरी था.

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा प्रदर्शनों से निपटने के दौरान हुई फायरिंग के वीडियो वायरल हुए. पहले पुलिस ने इनकार किया, अब 9 जगह फायरिंग की बात स्वीकार की है. इसके बारे में भी कहा जा सकता है कि ‘ऊपर से’ ऑर्डर मिले होंगे.

अब एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें मेरठ के एसपी सिटी प्रदर्शनकारियों से कह रहे हैं ‘पाकिस्तान चले जाओ….करियर बरबाद कर दूंगा.’ ये किसी सरकार ने या प्रशासनिक अधिकारी ने आदेश नहीं जारी किया होगा कि एक सरकारी पद पर बैठा आदमी देश के नागरिक से कहे कि तुम पाकिस्तान चले जाओ.

ये डायलॉग सोशल मीडिया के ट्रोल्स बोलते हैं. तो क्या खाकी वर्दी के हथकंडों में लाठी चार्ज, आंसू गैस, वॉटर कैनन के अलावा अब सोशल मीडिया ट्रोलिंग के डायलॉग भी शामिल हो चुके हैं? अगर एसपी साहब को लग रहा था कि ये लोग देशविरोधी गतिविधि में शामिल हैं तो ऐसे लोगों के खिलाफ आईपीसी की दफाए हैं. जिनके तहत उन्हें मुकदमा दर्ज करना चाहिए था. कोर्ट में जुर्म साबित होने तक किसी को पाकिस्तान भगाने और करियर बरबाद करने की धमकी देना, क्या ये गुनाह नहीं है?

क्या अब पुलिस तय करेगी कि किसे देशनिकाला देना है और किसे देश में रहने देना है? अगर स्थिति को कंट्रोल करने के लिए पाकिस्तान भेजने और करियर बर्बाद करने की धमकी देना बहुत जरूरी है तो भी उसके लिए सरकार का आदेश होना चाहिए, या ये काम पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर कर रही है? क्या अब जुर्म साबित करने के लिए मुजरिम को अदालत तक लाने वाला सिस्टम खत्म हो गया है?

अब इस मामले में एसपी सिटी अखिलेश नारायण की सफाई आई है. उन्होंने स्वीकार किया है कि वहां पाकिस्तान जाने को कहा गया था क्योंकि कुछ युवक पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे. मेरठ के एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा है कि ऐसे वीडियो माहौल खराब कर सकते हैं. वहां हालात सामान्य नहीं थे, एसपी ने बहुत धैर्य से काम लिया. फिर भी सवाल यही है कि सोशल मीडिया के कम्युनल ट्रेंड का असर अगर वर्दी वाले अफसर पर हो जाएगा तो क्या कानून की रक्षा हो पाएगी?

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